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ZEE Jankari: सर्वे का दावा-जब मतदान प्रतिशत बढ़ता है तो बीजेपी रहती है फायदे में

2019 में बीजेपी, देश में उन राज्यों में मज़बूती से दाख़िल हो रही है जहां उसका खाता खोलना भी आसान नहीं माना जाता था. महाएक्ज़िट पोल में बीजेपी इस बार पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल और तमिलनाडु में सीटें जीत रही है.

ZEE Jankari: सर्वे का दावा-जब मतदान प्रतिशत बढ़ता है तो बीजेपी रहती है फायदे में

आज मोदी समर्थक खुश तो बहुत हैं, जबकि मोदी विरोधियों की शोकसभा शुरू हो गई है. मोदी विरोधियों के मन में आज बस एक ही लाइन गूंज रही है- कह दो ये झूठ है. Exit Polls ने 23 मई से पहले भारत के 90 करोड़ वोटर्स के मन की बात कह दी है. Exit Polls के आंकड़ों में बहुत सारे समीकरण और नए  राजनीतिक फॉर्मूले छिपे हुए हैं जिनका हम एक एक करके विश्लेषण करेंगे.

2019 में बीजेपी, देश में उन राज्यों में मज़बूती से दाख़िल हो रही है जहां उसका खाता खोलना भी आसान नहीं माना जाता था. महाएक्ज़िट पोल में बीजेपी इस बार पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल और तमिलनाडु में सीटें जीत रही है. वर्ष 2014 में बीजेपी ने 282 सीटें जीती थीं, इस बार उसका प्रदर्शन 300 के पार होने जा रहा है. यहां हम बीजेपी के प्रदर्शन का आंकलन, पिछले 10 साल में उसकी राजनीतिक सफलता की कसौटी पर करेंगे. 2009 में बीजेपी ने 17 राज्यों में 116 सीटें जीती थीं. ये देश का 52 प्रतिशत क्षेत्रफल था जिसमें भारत की 60 प्रतिशत आबादी बसती है.

2014 में बीजेपी ने बड़ी तरक़्क़ी की. उसकी पहुंच 17 राज्यों से सीधे 27 राज्यों तक हुई. तब बीजेपी 282 लोकसभा सीट जीती थी. इनमें दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड की 100 फीसदी सीटें शामिल थीं. ये देश का 81 प्रतिशत क्षेत्रफल था. इस इलाक़े में देश की 82 प्रतिशत आबादी रहती है. 2019 में बीजेपी 300 से ज़्यादा सीटें जीतने की तरफ़ बढ़ रही है. इन सीटों पर देश की 86 प्रतिशत यानी क़रीब 114 करोड़ आबादी रहती है. इस बार बीजेपी केरल, मणिपुर और त्रिपुरा में भी सीटें जीत रही है. यानी बीजेपी की पहुंच अब 30 राज्यों में है...जिनमें केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल हैं.

यहां हम ख़ासतौर पर पश्चिम बंगाल और ओडिशा की बात करना चाहते हैं. पश्चिम बंगाल में बीजेपी 17 सीट जीत सकती है. 2014 में बीजेपी को पश्चिम बंगाल को 17 प्रतिशत वोट मिले थे, एक स्टडी के मुताबिक़ इस बार बीजेपी को 30 प्रतिशत वोट मिल रहे हैं. इसलिये दो सीटों से सीधे 17 सीटों तक का फ़ासला तय करने में बीजेपी ने सिर्फ़ 5 साल लगाये हैं. इसके पीछे मोदी फैक्टर बड़ी भूमिका निभा रहा है.

वहीं ओडिशा में बीजेपी को दस सीटें मिल सकती हैं. वर्ष 2014 में बीजेपी ने ओडिशा में सिर्फ़ एक सीट जीती थी, यानी इस बार ओडिशा में बीजेपी को 9 सीटें ज़्यादा मिल रही हैं. बीजेपी ने शुरू से ही पश्चिम बंगाल और ओडिशा में प्रचार पर ज़ोर दिया और अब इसका फल देखने को मिल रहा है.

इसके अलावा कर्नाटक में बीजेपी बीस सीटें जीत सकती है. वर्ष 2014 में बीजेपी को यहां 17 सीटें मिली थीं. इस बार तीन सीटों के फ़ायदे और 50 प्रतिशत वोट शेयर के साथ बीजेपी कर्नाटक में कांग्रेस और JDS की गठबंधन सरकार के लिये बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है. इस बार कर्नाटक में कांग्रेस और JDS गठबंधन को सिर्फ़ 8 सीटें मिल रही हैं. इससे ज़ाहिर है कि बीजेपी इस वक़्त कर्नाटक में Favourite है.

इस तरह पश्चिम बंगाल, ओडिशा और कर्नाटक को मिलाकर बीजेपी को 27 सीटों का फ़ायदा हो रहा है. ये उन सीटों की भरपाई है जो बीजेपी उत्तर प्रदेश में खो सकती है. ज़्यादातर Exit Polls एकमत हैं कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में 2014 का प्रदर्शन नहीं दोहरा पाएगी . 2014 में बीजेपी गठबंधन को 73 सीटें मिली थीं. लेकिन इस बार Exit Polls के मुताबिक बीजेपी को यूपी में 10 से 25 सीटों का नुकसान हो रहा है. 2014 में बीजेपी ने हिंदी Heart Land के 5 राज्यों में Clean Sweep किया था.

तब गुजरात की सभी 26 सीटें, राजस्थान की सभी 25 सीटें, दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटें, उत्तराखंड की सभी 5 सीटें और हिमाचल प्रदेश की सभी 4 सीटें बीजेपी ने जीती थीं. लेकिन Exit Polls का अनुमान है कि इन राज्यों में भी बीजेपी को कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है.

इसके अलावा झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी को 3 से 4 सीटों का नुकसान हो सकता है. कुल मिलाकर इन सभी राज्यों में बीजेपी को करीब 25 से 40 सीटों का नुकसान हो सकता है. लेकिन समझने वाली बात ये है बीजेपी ने अपनी कुशल रणनीति से 27 सीटों की भरपाई का इंतज़ाम कर लिया है.

वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने कई मिथक तोड़ दिये हैं. बीजेपी को कभी हिंदी बेल्ट की पार्टी कहा गया, तो कभी उसे एक धर्म पर आधारित सांप्रदायिक राजनीतिक दल कहा गया. लेकिन 2019 में महाएक्ज़िट पोल से जो बातें सामने आ रही हैं, उन्होंने बीजेपी को एक ऐसी पार्टी के रूप में पेश किया है जिसे पूरा देश खुले दिल से अपना रहा है. NDA को इस महाएक्ज़िट पोल में 300 से ज़्यादा सीट मिल रही हैं.

2014 में 2009 के मुकाबले 8 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग हुई थी . तब बीजेपी को 2009 के मुकाबले 166 सीटों का लाभ हुआ था. वर्ष 2014 में देश में 66.4 प्रतिशत मतदान हुआ था. 2019 में 67.1 प्रतिशत वोटिंग हई है. यानी इस बार 0.7 % ज़्यादा मतदान हुआ है. भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 2019 के लोकसभा चुनाव में सबसे ज़्यादा मतदान हुआ है. कई Surveys में ये बात निकलकर आई है कि अगर मतदान प्रतिशत बढ़ता है तो इसका लाभ अक्सर बीजेपी को मिलता है. इस हिसाब से अनुमान है कि बीजेपी को 10 से 30 सीटों का लाभ हो सकता है. यानी बीजेपी अकेले ही 300 का आंकड़ा पार कर सकती है.

वर्ष 2014 में बीजेपी को 31 प्रतिशत वोट मिले थे. एक स्टडी के मुताबिक़ इस बार महाएक्ज़िट पोल में बीजेपी को 36 प्रतिशत वोट मिले हैं. ये पांच प्रतिशत का इज़ाफ़ा बीजेपी के लिये एक बड़ी कामयाबी है. 2014 में बीजेपी को क़रीब 17 करोड़ वोट मिले थे, इस बार बीजेपी को 21 करोड़ से ज़्यादा वोट मिल सकते हैं. भारत में क़रीब 90 करोड़ वोटर हैं और इस बार 61 करोड़ लोगों ने मतदान किया है. यानी बीजेपी के लिये इस बार एक तिहाई से ज़्यादा भारत ने वोट किया है.