ZEE जानकारी: आखिर दिल्ली में कौन फैला रहा हिंसा?

दिल्ली देश की राजधानी है.दिल्ली में ही देश की संसद है और दिल्ली से ही अक्सर देश के भविष्य की दिशा तय होती है. लेकिन राजनीतिक पार्टियों से मिले समर्थन के दम पर हिंसा करने वाले. 

ZEE जानकारी: आखिर दिल्ली में कौन फैला रहा हिंसा?

दिल्ली देश की राजधानी है.दिल्ली में ही देश की संसद है और दिल्ली से ही अक्सर देश के भविष्य की दिशा तय होती है. लेकिन राजनीतिक पार्टियों से मिले समर्थन के दम पर हिंसा करने वाले. देश की राजधानी को बंधक बनाने के सपने देख रहे हैं और आज उनका ये सपना काफी हद तक पूरा भी हो गया है. सोशल मीडिया पर एक Video वायरल हो रहा है..इस वीडियो में एक युवक मुस्लिम समुदाय से कह रहा है कि उन्हें मिलकर दिल्ली का चक्का जाम कर देना चाहिए और दिल्ली वालों का दूध और पानी बंद कर देना चाहिए. आप ये वीडियो देखिए और फिर हम आपको बताएंगे कि दिल्ली को बंधक बनाने का ये सपना आज कैसे पूरा हो गया.

देश की राजधानी दिल्ली तीन दिनों से इन हिंसक प्रदर्शनों की वजह से बंधक बनी हुई है. आज भी दिल्ली की कई मुख्य सड़कों पर लंबा जाम लगा रहा..लोग परेशान होते रहे, सात Metro Stations बंद कर दिए गए, कई जगह ट्रैफिक पर पाबंदी लगा दी गई और इन सबके बावजूद..हमारे ही देश के कई नेता..इन प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण बता रहे हैं और कह रहे हैं कि ये तो लोगों का हक है.

आज आपको हमारे वीडियो विश्लेषण के ज़रिए देखना चाहिए कि कैसे..उपद्रवियों को ये अनैतिक हक देने के चक्कर में देश की राजधानी दिल्ली को हाईजैक कर लिया गया है और आम लोग परेशान हैं .

इन दिनों एक भ्रम सोशल मीडिया पर Trend कर रहा है..वो भ्रम ये है कि देश की पुलिस के पास किसी भी University Campus में घुसकर..छात्रों पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है . इसलिए अब आपको इस अधूरे ज्ञान से जुड़ा सच भी जान लेना चाहिए . हमारे देश के कई बुद्धीजीवी और अंग्रेज़ी बोलने वाले Celebreties ये भ्रम फैला रहे हैं कि पुलिस किसी भी University कैंपस में दाखिल नहीं हो सकती..क्योंकि कानून इसकी इजाजत नहीं देता . ये दावा मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने भी अपने एक ट्वीट में किया है . और आज सुप्रीम कोर्ट में वकीलों ने भी ऐसी ही दलील पेश की . लेकिन क्या ये दावे सच हैं ?

देश के कथित बुद्धिजीवियों को ये जानकर दुख होगा कि उनकी रिसर्च में भारी कमी है..क्योंकि ऐसा कोई कानून नहीं है..जो पुलिस को हिंसा फैलाने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई से रोकता हो . आज हमने इस मामले पर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह से बात की..विक्रम सिंह इस वक्त खुद एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के pro chancellor हैं.

उन्होंने हमें बताया कि पुलिस को कैंपस में घुसने की इजाजत सिर्फ तब लेनी होती है..जब हालात सामान्य होते हैं..लेकिन हिंसा और आगजनी जैसे मामलों को रोकने के लिए पुलिस कैंपस के अंदर जाकर कार्रवाई करने के लिए भी स्वतंत्र है. और इसके लिए पुलिस को किसी की इजाजत की भी ज़रूरत नहीं होती . जिन लोगों के पास कानून की जानकारी की कमी है..उन्हें आज उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का बयान ध्यान से सुनना चाहिए .

कहते हैं ...फिल्में समाज का आईना होती हैं..लेकिन ज़रूरी नहीं है कि इस आईने के सामने खड़े फिल्म स्टार्स सब कुछ साफ-साफ देख पाएं . कई बार उनकी आंखों पर भी एजेंडे की धूल पड़ जाती है और वो राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने अल्पज्ञान और एजेंडे की वजह से भ्रम फैलाने वाले गिरोह का हिस्सा बन जाते हैं .

दिल्ली में प्रदर्शन के नाम पर हो रही हिंसा पर बॉलीवुड के कई Film Stars ने अपनी अधूरी जानकारी के साथ प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है . महेश भट्ट, अनुराग कश्यप, राजकुमार राव, दिया मिर्जा और परिणिति चोपड़ा समेत कई फिल्मी सितारे ऐसे हैं जो सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं .

हम मानते हैं कि लोकतंत्र में सभी नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है . लेकिन जब कोई Celebrity अपनी बात रखती है तो उसका बड़ा असर पड़ता है . क्योंकि उनके लाखों-करोड़ों प्रशंसक होते हैं . जो उनकी बातों को पढ़ते हैं, सुनते हैं और उन्हें Follow करते हैं . इसलिए इन Celebrities की ये जिम्मेदारी बनती है कि किसी भी मुद्दे पर कुछ बोलने या लिखने से पहले उस विषय की पूरी जानकारी ले लें . ऐसे विषयों को अच्छी तरह से समझ लें . लेकिन इनमें से कई ऐसे हैं जो बड़े मुद्दों पर बिना पढ़े लिखे या बिना सोचे समझे...सही और गलत का फैसला कर देते हैं .

इन Celebrities को हमारी सलाह है कि देश में चल रहे घटनाक्रम पर अपनी राय रखने से पहले, सच और अफवाह में फर्क करना समझ लें . और अगर सही जानकारी ना हो तो खामोश रहना ही अच्छा है . हैरानी की बात ये भी है कि बॉलीवुड की ये हस्तियां उस वीडियो को Social Media पर Share नहीं करती..जिसमें भीड़ पुलिस पर हमला कर रही होती है .

इन लोगों को ये भी समझना चाहिए कि असल जिंदगी और फिल्मी जिंदगी में फर्क होता है..फिल्मों में संवाद कहानीकार लिखते हैं लेकिन असल जिंदगी में ऐसा नहीं होता है . फिल्मों में इन एक्टर्स को Retake के कई मौके मिलते हैं , कोई सीन अगर ठीक से नहीं होता तो ये एक्टर्स जितने चाहें Retakes ले सकते हैं . लेकिन असल जिंदगी में कोई Retake नहीं होता इसलिए असल जिंदगी में जो भी बोले सोच समझकर बोलें 

 गुंडागर्दी करने वालों, बसें जलाने वालों और रेल की पटरियां उखाड़ने वालों के तो मानव-अधिकार हैं लेकिन आम जनता और पुलिस वालों के मानव-अधिकार नहीं है .

छीन कर आज़ादी मांगने वालों पर हमारा ये विश्लेषण देखकर आप समझ गए होंगे कि कैसे हमारे देश में संविधान बचाने के नाम पर संविधान तोड़ने वालों को शाबाशी दी जाती है . हमें याद रखना रखना चाहिए कि लोकतंत्र में कोई भी चीज़ छीन कर नहीं ली जा सकती..यहां तक कि आज़ादी भी नहीं.

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