चामराजनगर लोकसभा सीट: कांग्रेस की निगाहें हैट्र‍िक पर, BJP ने 'कांग्रेसी' ही उतारा मैदान में

चामराजनगर से इस बार कांग्रेस ने मौजूदा सांसद आर ध्रुवनारायण (R Dhruvanarayana) को अपना उम्‍मीदवार बनाया है. वह लगातार दो बार से यहां से जीत रहे हैं. बीजेपी ने अपना उम्‍मीदवार बदलते हुए श्रीनिवास प्रसाद को चुना है. आर ध्रुवनारायण यहां से लगातार तीसरी बार जीतकर हैट्र‍िक लगाना चाहेंगे.

चामराजनगर लोकसभा सीट: कांग्रेस की निगाहें हैट्र‍िक पर, BJP ने 'कांग्रेसी' ही उतारा मैदान में
कांग्रेस उम्‍मीदवार ध्रुवनारायण और बीजेपी उम्‍मीदवार श्रीनिवास प्रसाद.

चामराजनगर: कर्नाटक की चामराजनगर सीट उन सीटों में से है, जहां आज तक बीजेपी को कभी जीत नसीब नहीं हुई. इतना ही नहीं, ये कांग्रेस का ऐसा मजबूत किला है, जहां पर हुए कुल 16 में से 12 चुनाव कांग्रेस ने जीते हैं. दो बार जनता दल एक-एक बार जेडीएस और जेडीयू उम्‍मीदवारों के खाते में जीत आई है. चामराजनगर से इस बार कांग्रेस ने मौजूदा सांसद आर ध्रुवनारायण (R Dhruvanarayana) को अपना उम्‍मीदवार बनाया है. वह लगातार दो बार से यहां से जीत रहे हैं. बीजेपी ने अपना उम्‍मीदवार बदलते हुए श्रीनिवास प्रसाद को चुना है. आर ध्रुवनारायण यहां से लगातार तीसरी बार जीतकर हैट्र‍िक लगाना चाहेंगे.

2014 के चुनाव में चामराजनगर से आर ध्रुवनारायण ने बीजेपी के एआर कृष्‍णामूर्ति को 1.41 लाख वोट से हराया था. इससे पहले 2009 के चुनाव में भी उन्‍होंने कृष्‍णामूर्ति को मात दी थी. चामराजनगर में 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इमनें हनूर, कोलेगल, चामराजनगर, गुंडलुपेट, टी नरसीपुरा, नंजनगुड हेगडावेनकोट और वरुणा सीट आती हैं.

बीजेपी ने कांग्रेस के सबसे मजबूत उम्‍मीदवार को उतारा
भले इस सीट पर बीजेपी कभी जीत हासिल नहीं कर पाई. लेकिन इस बार के चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे श्रीनिवास प्रसाद को ही मैदान में उतार दिया है. श्रीनिवास प्रसाद कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से 1980 से जीत रहे हैं. वह चामराजनगर से कुल 5 बार सांसद रहे हैं. 1980 से 996 तक वह लगातार जीतते रहे. इसके बाद वह जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर 1999 में भी जीते. अब वह बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं.

श्रीनिवास‍ प्रसाद इसलिए बन सकते हैं डार्क होर्स
चुनाव विश्‍लेषक मानते हैं कि इस चुनाव में श्रीनिवास प्रसाद इस चुनाव में डार्क हॉर्स साबित हो सकते हैं. कहा जा रहा है कि वह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं. एक बार जेडीयू से जीत चुके हैं, ऐसे में वह कांग्रेस और जेडीएस के वोटर्स को अपनी ओर आकर्ष‍ित कर सकते हैं. हालांकि 2018 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्‍होंने चुनावी राजनीति से खुद को अलग कर लिया था, लेकिन अब वह फिर से चुनावी मैदान में हैं.