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चुनावनामा 1977: जनता पार्टी की रैली रोकने के लिए टीवी में किया गया बॉबी फिल्‍म का प्रसारण

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha elections 2019) में प्रचार के लिए राजनैतिक दल फिल्‍म, टीवी सीरियल, बेब सिरीज, वेबसाइट सहित अन्‍य माध्‍यमों का जमकर इस्‍तेमाल कर रहे हैं. ऐसा नहीं है कि राजनैतिक दलों के लिए यह हथकंड़े नए हैं. 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इसी तरह जेपी की रैली को नाकाम करने के लिए बॉबी फिल्‍म का प्रसारण करवाया था.

चुनावनामा 1977: जनता पार्टी की रैली रोकने के लिए टीवी में किया गया बॉबी फिल्‍म का प्रसारण

नई दिल्‍ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha elections 2019) में अपनी बात मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए टीवी चैनल, फिल्‍म और दूसरे इलेक्‍ट्रानिक साधनों का इस्‍तेमाल किया जा रहा है. हाल में ही कांग्रेस ने एक बायोपिक को लेकर चुनाव आयोग को शिकायत दी थी. जिस पर कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने इस बायोपिक की रिलीज पर रोक लगा दी थी. आज कांग्रेस जिन चुनावी हथकंडो के इस्‍तेमाल को लेकर ऐतराज जाहिर कर रही है, सत्‍ता में रहते हुए कांग्रेस भी उन्‍हीं हथकंडो का इस्‍तेमाल विरोधी दलों को प्रभावित करने के लिए करती रही है. फिल्‍मों के जरिए मतदाताओं को विरोधी दल के पास जाने से रोकने का एक मामला 1977 के लोकसभा चुनाव का भी है. चुनावनामा में आज हम आपको बताते हैं कि किस तरह कांग्रेस के तत्‍कालीन सूचना प्रसारण मंत्री ने लोगों को एक रैली में जाने से रोकने के लिए एक सुपरहिट फिल्‍म का प्रसारण टीवी में करवाया था.

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इंदिरा को मात देने के लिए जेपी ने किया जनता पार्टी का गठन
यह बात 1977 की है. इंदिरा गांधी ने देश के छठवें लोकसभा चुनाव के लिए ऐलान कर दिया था. ऐलान के अगले दिन भारतीय लोक दल के चौधरी चरण सिंह और कांग्रेस (ओ) के मोरारजी देसाई ने विपक्ष को एक मंच पर लाने का प्रयास शुरू कर दिया था. 23 जनवरी को जय प्रकाश नारायण की अगुवाई में जनता पार्टी के गठन का ऐलान कर दिया गया. इसी बीच, बिहार के दलित समाज में गहरी पैठ रखने वाले बाबू जगजीवन राम ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया और जनता पार्टी में शामिल हो गए. लगभग सभी विपक्षी दलों को एक मंच में इकट्ठा करने के बाद जनता पार्टी ने दिल्‍ली के रामलीला मैदान में एक रैली करने का फैसला किया. इसी रैली से लोकसभा चुनाव 1977 के लिए विगुल फूंकने की योजना थी. योजना के तहत सभी विपक्षी दलों ने अपने कार्यकर्ताओं से रामलीला मैदान कूच करने को कह दिया.

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जेपी की रैली में जाने से रोकने के लिए बॉबी का इस्‍तेमाल
जेपी की रामलीला मैदान में होने वाली रैली की भनक कांग्रेस आलाकमान तक पहुंच चुकी थी. इंदिरा नहीं चाहती थी कि बाबू जगजीवन राम की मौजूदगी में जनता पार्टी की रैली आयोजित हो. इंदिरा को इस बात का डर भी था कि बाबू जगजीवन राम के चलते दलित कहीं कांग्रेस से अपना मुंह न मोड़ ले. लिहाजा, रैली को रोकने के लिए कई तरह के प्रयास शुरू हो गए. चूंकि देश से अभी अभी आपातकाल खत्‍म हुआ था, लिहाजा इंदिरा किसी तरह की जोर जबरदस्‍ती करने के मूड में नहीं थी. वह एक ऐसा तरीका चाहती थीं, जिससे सांप में मर जाए और लाठी भी न टूटे. एक ऐसा ही तरीका तत्‍कालीन सूचना प्रसारण मंत्री विद्या चरण शुक्‍ल ने निकाला. विद्याचरण शुक्‍ल की योजना के तहत टीवी पर उस दौर की सुपरहिट फिल्‍म बॉबी का प्रसारण कराया गया. जिससे लोगों को रैली में जाने से रोका जा सके. रैली के दिन सरकार की सारी कोशिशें धरी की धरी रह गई और लोग बॉबी का मोह छोड़ रामलीला मैदान की रैली में पहुंच गए. कहा जाता है कि इससे पहले रामलीला मैदान में इतना बड़ा जन सैलाब कभी नहीं उमड़ा था.

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नसबंदी को लेकर कांग्रेसी नेताओं पर कसे जाते थे तंज
आपातकाल के दौरान, आम जनता को सबसे ज्‍यादा त्रस्‍त संजय गांधी के नसबंदी अभियान ने किया. 1977 के लोकसभा चुनाव के दौरान लोग इसी नसबंदी अभियान को लेकर कांग्रेस के नेताओं से मस्‍ती करते थे. चुनाव प्रचार के लिए निकले कांग्रेसी नेताओं से लोग पूछते कि उनकी नसबंदी हुई या नहीं. जवाब हां में आता तो लोग सर्टिफिकेट दिखाने के लिए कहते थे. वहीं, विपक्षी दल लोगों को यह कहकर डराते हुए भी नजर आते थे कि अगर गलती से भी कांग्रेस सत्‍ता में वापस आ गई तो नसबंदी अभियान को एक फिर शुरू कर दिया जाएगा. आपातकाल और नसबंदी के डर का असर था कि बड़ी संख्‍या में लोग इंदिरा के विरोध में आ खड़े हुए. जिसका सीधा फायदा जनता पार्टी के मतदाताओं को मिला.