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बिहार छोड़ झारखंड चले कीर्ति आजाद, धनबाद में कायम रख पाएंगे जीत का सिलसिला!

कीर्ति आजाद के पिता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद आजीवन कांग्रेसी थे और कांग्रेस और हमेशा कांग्रेस से उनके अच्छे संबंध रहे.

बिहार छोड़ झारखंड चले कीर्ति आजाद, धनबाद में कायम रख पाएंगे जीत का सिलसिला!
कीर्ति आजाद की पहली पसंद दरभंगा थी जो आरजेडी के कोटे में चली गई थी.(फाइल फोटो)

धनबाद: कीर्ति झा आजाद ने 18 फरवरी को कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की और तब से लेकर आज तक यही कयास लगाए जा रहे थे कि आखिर कीर्ति आजाद कहां से चुनाव लड़ेंगे. कीर्ति आजाद की पहली पसंद दरभंगा थी जो आरजेडी के कोटे में चली गई थी.

लेकिन कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को छोड़कर शायद ही किसी को इस बात का अंदाजा था कि तीन बार के सांसद रहे कीर्ति आजाद इस बार बिहार नहीं बल्कि झारखंड के धनबाद से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. आपको बता दें कि कीर्ति आजाद लगभग दो सालों से बीजेपी से निष्कासित हैं और कई बार बीजेपी के खिलाफ बयानबाजी करते हुए नजर आए हैं.

 

कीर्ति आजाद के पिता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद आजीवन कांग्रेसी थे और उनके हमेशा कांग्रेस से अच्छे संबंध रहे. कीर्ति आजाद बीजेपी की विचारधारा से प्रभावित हुए और क्रिकेट जीवन के बाद बीजेपी से ही पहली बार विधायक चुने गए और दरभंगा से तीन बार सांसद रहे. 

2014 के बाद कीर्ति आजाद अरुण जेटली के खिलाफ बगावती तेवर अपनाया और सीधे तौर पर दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन में घोटाले के लिए अरुण जेटली को जिम्मेदार बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री और BJP अध्यक्ष से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी करने लगे. इससे पार्टी असहज हुई और उन्हें कई बार समझाने की भी कोशिश की. कीर्ति आजाद ने बार-बार यही कहा कि मैं क्रिकेटर हूं और पहले खिलाड़ी धर्म पूरा कर रहा हूं. इसलिए वो बार-बार घोटाले की जांच की मांग करने लगे और अरुण जेटली को जिम्मेदार ठहराने लगे. 

बार-बार समझाने के बावजूद नहीं मानने पर बीजेपी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. कीर्ति आजाद ने दो सालों तक कोई पार्टी नहीं ज्वाइन की. हाल में तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मजबूत स्थिति को देखकर कीर्ति आजाद ने कांग्रेस का हाथ थामा. कीर्ति आजाद ने कहा था कि वो घर वापसी कर रहे हैं क्योंकि उनके पिता भी आजीवन कांग्रेस में रहे. 

बहरहाल, कीर्ति आजाद को कांग्रेस ने धनबाद से टिकट दिया है. अब देखने वाली बात ये होगी कि धनबाद की जनता अपना क्या फैसला सुनाती है.