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इस विधानसभा के चुनाव से हुई थी EVM की पहचान, ऐसे होता है एक-एक वोट का हिसाब

भारत 2004 के आम चुनाव में देश के सभी मतदान केन्द्रों पर 10.75 लाख ईवीएम के इस्तेमाल के साथ ई-लोकतंत्र बना. 

इस विधानसभा के चुनाव से हुई थी EVM की पहचान, ऐसे होता है एक-एक वोट का हिसाब
इन लोकसभा चुनाव में पहली बार सभी ईवीएम को वीवीपैट मशीनों से जोड़ा गया है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019 Results) के परिणाम से पहले भले ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानि ईवीएम सबसे बड़े विवाद का मुद्दा बन गई हों, लेकिन ये मशीने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की पहचान बन चुकी हैं. केरल के एक विधानसभा क्षेत्र के चुनाव से ईवीएम की पहचान शुरू हुई. ईवीएम का सफर आज देश की 542 लोकसभा सीटों तक पहुंच चुका है. करीब 37 साल के ईवीएम के इतिहास में कई उतार चढ़ाव आए, कई आरोप-प्रत्यारोप भी लगे. 

पहली बार यहां हुआ था EVM से मतदान
ईवीएम का पहली बार इस्तेमाल केरल के परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 50 मतदान केन्द्रों पर मई, 1982 में हुआ था. इसके बाद उच्चतम न्यायालय का एक आदेश आया और ईवीएम को वैधानिक रूप देने तक इसका इस्तेमाल रोक दिया गया. समय बदला, कुछ साल बीते और दिसम्बर 1988 में संसद ने इस कानून में संशोधन किया और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में नई धारा-61ए जोड़ी गई. इसके बाद चुनाव आयोग को वोटिंग मशीन के इस्तेमाल का अधिकार दिया गया. यह संशोधन 15 मार्च 1989 से लागू हो सका.  

फिर बनी चुनाव सुधार समिति
फरवरी, 1990 में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधियों वाली चुनाव सुधार समिति बनाई गई. साथ ही एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया. इसमें प्रो.एस.सम्पत तत्कालीन अध्यक्ष आरएसी, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, प्रो.पीवी. इनदिरेशन (तब आईआईटी दिल्ली के साथ) और डॉ.सी. राव कसरवाड़ा, निदेशक इलेक्ट्रोनिक्स अनुसंधान तथा विकास केन्द्र, तिरूअनंतपुरम शामिल किए गए. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये मशीनें छेड़छाड़ मुक्त हैं. 24 मार्च 1992 को सरकार ने ईवीएम को लेकर संविधान के संशोधन की अधिसूचना जारी की गई. 

तकनीकी समिति का किया गठन 
इससे पहले कि इनका इस्तेमाल शुरू होता चुनाव आयोग ने मशीनों के मूल्यांकन के लिए एक और तकनीकी समिति का गठन किया. प्रो.पी.वी. इनदिरेशन, आईआईटी दिल्ली के प्रो.डी.टी. साहनी तथा प्रो.ए.के. अग्रवाल इसके सदस्य बने. यही समिति लगातार चुनाव आयोग को ईवीएम के विषय में परामर्श देती है.

1998 के बाद से देश बना ई-लोकतंत्र
नवंबर, 1998 के बाद से सभी चुनावों में प्रत्येक संसदीय तथा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है. भारत 2004 के आम चुनाव में देश के सभी मतदान केन्द्रों पर 10.75 लाख ईवीएम के इस्तेमाल के साथ ई-लोकतंत्र बना. 

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ऐसे होगी मतगणना
ईवीएम से मतगणना न सिर्फ पूरी तरह सुरक्षित है बल्कि तेज भी है. इन लोकसभा चुनाव में पहली बार सभी ईवीएम को वीवीपैट मशीनों से जोड़ा गया है. मतगणना के दौरान सबसे पहले ईवीएम के साथ जुड़ी कंट्रोल यूनिट (सीयू) से प्रत्येक पार्टी के मत गिने जाएंगे. सीयू ऑन होते ही एक-एक कर सभी उम्मीदवारों के मत दिखाएगी. अंत में कुल पड़े मतों की संख्या बताएगी. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हर विधानसभा में पांच बूथों पर वीवीपैट मशीनों और ईवीएम के मतों का मिलान किया जाएगा. पहले सीयू से प्रत्येक प्रत्याशी को मिले मतों की गणना होगी. इसके बाद वीवीपैट मशीनों से निकली पर्चियों को गिना जाएगा. इससे साफ हो जाएगा कि ईवीएम में गड़बड़ी नहीं हुई है.