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लोकसभा चुनाव 2019 बस्तर: आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में 6 बार से है बीजेपी का दबदबा

छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ यहां के आदिवासियों के कारण भी चर्चित है. लेकिन इस क्षेत्र को नक्सलियों के गढ़ के रूप में भी जाना जाता है

लोकसभा चुनाव 2019 बस्तर: आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में 6 बार से है बीजेपी का दबदबा

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ यहां के आदिवासियों के कारण भी चर्चित है. लेकिन इस क्षेत्र को नक्सलियों के गढ़ के रूप में भी जाना जाता है. इस बार बस्तर सीट पर सात उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है. जहां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीचे काफी कड़ी टक्कर है. 

इस सीट से बीजेपी ने बैदूराम कश्यप और कांग्रेस ने दीपक बैज को चुनावी मैदान में उतारा गया है. इनके अलावा इस सीट पर अम्बेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया, बसपा, सीपीआई, शिवसेना सहित अन्य दल चुनाव मैदान में अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं. यह सीट कांग्रेस के लिए चुनौती है क्योंकि पिछले छह चुनावों से बीजेपी जीत हासिल करती आ रही है.

इस सीट से बीजेपी के बैदूराम कश्यप, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के रामूराम मौर्य, इंडियन नेशनल कांग्रेस के दीपक बैज और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आयतु राम मंडावी समेत सात उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. छत्तीसगढ़ का बस्तर अपने अनूठे आदिवासी मूल निवासियों और संस्कृति के लिए जाना जाता है. यह बीजेपी का गढ़ रहा है. जहां से बीजेपी 1998 से 2014 तक लगातार पिछले 6 चुनाव जीतते आ रही है. 

छत्तीसगढ़ राज्य में 11 लोकसभा और 5 राज्‍यसभा सीटें आती हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में 10 सीटें और कांग्रेस के खाते में एक सीट आई थी. छत्‍तीसगढ़ क्षेत्रफल के हिसाब से देश का दसवां सबसे बड़ा राज्‍य है. फिलहाल राज्‍य की राजधानी रायपुर है, जिसे बदलकर नया रायपुर किया जाना प्रस्‍तावित है. 28 मिलियन से ज्‍यादा की जनसंख्‍या के साथ ये राज्‍य देश में 17वें स्‍थान पर आता है. सूबे में बीजेपी और कांग्रेस पार्टी का सबसे ज्यादा प्रभाव है.