लोकसभा चुनाव 2019: एटा में 39 साल बाद क्या कांग्रेस कर सकेगी वापसी!

साल 2014 में हुए चुनाव में यहां से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे. 

लोकसभा चुनाव 2019: एटा में 39 साल बाद क्या कांग्रेस कर सकेगी वापसी!
एटा लोकसभा क्षेत्र अलीगढ़ डिवीजन का भाग है.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश का एटा लोकसभा क्षेत्र अलीगढ़ डिवीजन का भाग है. एटा में उर्दू के मशहूर कवि अमीर खुसरो का जन्म हुआ था. हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार यहां भगवान विष्णु के तीसरा रूप यानी कि 'वराह अवतार' अवतीर्ण हुआ था. साल 2014 में हुए चुनाव में यहां से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे. 1980 के बाद कांग्रेस इस सीट पर फतह हासिल नहीं कर पाई है.  सपा-बसपा गठबंधन में सीटों के बंटवारे हुए, एटा लोकसभा सीट सपा के पाले में है. 

2014 का समीकरण
साल 2014 में ये सीट सपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह यादव को बड़े अंतर से पराजित कर जीती थी. बीजेपी के राजवीर सिंह को जनता ने 4,74,978 रिकार्ड मत मिले थे. जबकि सपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह यादव को 2,73,977 मत मिले थे. साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट पर समाजवादी पार्टी दूसरे नंबर पर, बीएसपी तीसरे नंबर पर रही थी.

 

ये है राजनीतिक इतिहास
एटा में पहला चुनाव कांग्रेस ने जीता था. लेकिन उसके बाद यहां से हिंदू महासभा साल 1957 और 1962 में जीत दर्ज की थी. हालांकि, उसके बाद साल 1967 और 1971 का चुनाव जीत कांग्रेस ने यहां से वापसी की. लेकिन 1977 में चली कांग्रेस विरोधी लहर में चौधरी चरण सिंह की भारतीय लोकदल ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. 1980 के हुए चुनाव में यहां से आखिरी बार कांग्रेस जीत पाई थी. 1984 में लोक दल के जीत दर्ज करने के बाद ये सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई. 1989, 1991, 1996 और 1998 में यहां बीजेपी के महकदीप सिंह शाक्य ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. 1999 और 2004 एटा से लगातार दो बार समाजवादी पार्टी का परचम लहराया. 2009 के लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने बीजेपी से अलग हो अपनी पार्टी बना यहां से चुनाव लड़ा और जीता.