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लोकसभा चुनाव: राहुल गांधी ने क्यूं चुनी वायनाड सीट? समझें इसके 5 मायने

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha election 2019) में उत्तर प्रदेश के अमेठी के साथ केरल के वायनाड लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगे. ऐसे में सोशल मीडिया से लेकर आम बातचीत में ये चर्चा शुरू हो चुकी है कि आखिर राहुल गांधी ने अमेठी के साथ वायनाड सीट से चुनाव लड़ने का फैसला क्यों लिया है.

लोकसभा चुनाव: राहुल गांधी ने क्यूं चुनी वायनाड सीट? समझें इसके 5 मायने
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केरल के वायनाड से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे.

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha election 2019) में उत्तर प्रदेश के अमेठी के साथ केरल के वायनाड लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगे. ऐसे में सोशल मीडिया से लेकर आम बातचीत में ये चर्चा शुरू हो चुकी है कि आखिर राहुल गांधी ने अमेठी के साथ वायनाड सीट से चुनाव लड़ने का फैसला क्यों लिया है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता कह रहे हैं कि राहुल गांधी को डर है कि वह अमेठी लोकसभा सीट पर स्मृति ईरानी से डर गए हैं, इसलिए उन्होंने केरल से भी चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. ऐसे में हम समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी को दो सीटों से क्यों चुनाव लड़ाने का फैसला लिया है.

कांग्रेस के लिहाज से सुरक्षित है वायनाड
1 नवंबर 1980 को केरल में वायनाड को जिला की मान्यता मिली. वहीं यह सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. पहले वायनाड के हिस्से कोझिकोड और कन्नूकर में आते थे. अंग्रेजों के आक्रमण के वक्त टीपू सुल्तान यहां के राजा थे. इस जिले में व्यगथरी जैन मंदिर काफी चर्चित है. यह सीट कांग्रेस के लिहाज से सुरक्षित माना जाता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में केरल प्रदेश कांग्रेस के महासचिव एमआई शाहनवाज वायनाड से जीते थे. उन्हें 3,77,035 वोट मिले थे तो दूसरे नंबर पर CPI के प्रत्याशी पीआर सत्यन मुकरी रहे थे. शाहनवाज 2009 से वायनाड से सांसद हैं.

दक्षिण में BJP को मौका नहीं देना चाहती है कांग्रेस
बीजेपी उत्तर भारत की पार्टी मानी जाती है. दक्षिण के एक मात्र राज्य कर्नाटक में बीजेपी अकेले दम पर सरकार बना चुकी है. मौजूदा समय में भी बीजेपी कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुल्लापल्ली रामचंद्रन के हालिया बयान पर नजर डालें तो पता चलता है कि पार्टी देश के इस हिस्से में बीजेपी को किसी भी सूरत में बढ़ने नहीं देना चाहती है. माना जा रहा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी ने वाराणसी को चुनाव लड़ने के लिए चुना था. इस वजह से वह उत्तर प्रदेश और बिहार के पूर्वांचल हिस्से में पड़ने वाली सीटों पर बीजेपी का पताका फहराने में काफी कारगर साबित हुए थे. इसी तर्ज पर कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में दक्षिण भारत के बूते दिल्ली की गद्दी पर अपनी दावेदारी मजबूत करना चाह रही है.

कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल को मिलाकर लोकसभा की 84 सीटें हैं. कर्नाटक कांग्रेस+जेडीएस, तमिलनाडु में AIDMK और केरल में वामदलों की सरकार है. ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि वह इन 84 सीटों में कम से कम बीजेपी के खाते में जाने दे. कांग्रेस के केंद्रीय थिंकटैंक का मानना है कि सबसे अधिक 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और रालोद के गठबंधन से बीजेपी को नुकसान होना तय है. ऐसे में अगर दक्षिण के राज्यों में भी बीजेपी की हालत खराब रहती है तो केंद्र में उसे सरकार बनाने में मुश्किलें आएंगी.

तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में राहुल की मौजूदगी दिखाने की कोशिश
वायनाड एक ऐसी लोकसभा सीट है जो सीमावर्ती है. केरल की इस सीट का काफी हिस्सा कर्नाटक और तमिलनाडु से सटा है. इस वजह से यहां के राजनीतिक हालात में भी काफी समानताएं हैं. कांग्रेस पार्टी का मानना है कि वायनाड में राहुल की मौजूदगी से तीनों राज्यों की कई सीटों पर कांग्रेस को थोड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा, 'यह दक्षिण भारत की आकांक्षाओं के समर्थन की लड़ाई है। वायनाड सीट तीन दक्षिणी राज्यों का त्रिकोणीय जंक्शन है. यह उन ताकतों को करारा जवाब देने की लड़ाई है जो संस्कृतियों, भाषाओं एवं जीवनशैली के साथ ही उत्तर एवं दक्षिण भारत के बीच गहरे संपर्क पर हमला करते हैं।'

वायनाड का ज्यादातर हिस्सा है गांव
शहर के लोग जहां बीजेपी के पारंपरिक वोटर माने जाते हैं, वहीं ग्रामीण भारत में कांग्रेस को समर्थन मिलने का पैटर्न रहा है. वायनाड की 93.15 फीसदी आबादी ग्रामीण है और महज 6.85 फीसदी लोग शहरों में रहते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस इलाके के 73 फीसदी लोगों ने वोट डाले थे. कांग्रेस ने इस बार दावा किया है कि अगर वे सत्ता में आए तो गरीब लोगों के बैंक खाते में सालाना 72 हजार रुपए नकद जमा कराएगी. ऐसे में ज्यादातर ग्रामीण आबादी वाले इस सीट पर राहुल और कांग्रेस ज्यादा मजबूती से अपने इस वादे को समझा पाएगी. इस लिहाज से किसी भी कांग्रेस प्रत्याशी के लिए वायनाड एक सुरक्षित सीट मानी जा सकती है.

वायनाड के चलते देश के दूसरे हिस्सों में समय दे पाएंगे राहुल
अक्सर बड़े राजनेता जीत की लगभग सुनिश्चित सीट से चुनाव लड़ते हैं. इसकी खास वजह यह है कि अगर बड़े राजनेता को अपना ही चुनाव जीतने में ज्यादा जोर लगाना पड़ जाए तो वह देश के बाकी हिस्सों में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगने में ज्यादा समय नहीं दे पाएंगे. ऐसे में राहुल गांधी जब वायनाड जैसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ेंगे तो उन्हें देश यहां ज्यादा समय नहीं देना होगा.