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NDA का बजेगा डंका या विपक्ष बोलेगा हल्ला? रिजल्ट तय करेंगे राजनीति के इन 5 'युवा तुर्क' का भविष्य

यूं तो भारतीय राजनीति में 'युवा तुर्क' के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर विख्यात हैं. यह एक ऐसी उपाधि है जो शायद ही भारत की जनता किसी और को दे, लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha elections 2019) में अचानक से यह शब्द चर्चा में रहा. दरअसल, चुनाव में 'युवा तुर्क' शब्द उन नेताओं के बेटों के लिए प्रयोग किए जिनके दिशा-निर्देश में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा गया. इस बार का लोकसभा चुनाव का रिजल्ट (Lok sabha election results 2019) तय करेगा कि क्या इन नेताओं के बेटे वास्तव में पार्टी के 'युवा तुर्क' बने रहे पाएंगे या नहीं.

NDA का बजेगा डंका या विपक्ष बोलेगा हल्ला? रिजल्ट तय करेंगे राजनीति के इन 5 'युवा तुर्क' का भविष्य
Lok sabha election results 2019: इस बार के लोकसभा चुनाव में कई बड़े राजनेताओं के बेटों ने पार्टी की कमान संभाली है.

नई दिल्ली: यूं तो भारतीय राजनीति में 'युवा तुर्क' के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर विख्यात हैं. यह एक ऐसी उपाधि है जो शायद ही भारत की जनता किसी और को दे, लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha elections 2019) में अचानक से यह शब्द चर्चा में रहा. दरअसल, चुनाव में 'युवा तुर्क' शब्द उन नेताओं के बेटों के लिए प्रयोग किए जिनके दिशा-निर्देश में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा गया. इस बार का लोकसभा चुनाव का रिजल्ट (Lok sabha election results 2019) तय करेगा कि क्या इन नेताओं के बेटे वास्तव में पार्टी के 'युवा तुर्क' बने रहे पाएंगे या नहीं.

राहुल गांधी: 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लोकसभा चुनाव (Chunav) लड़ी थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में भी सोनिया गांधी ही पार्टी की मुखिया थीं. 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथों में है. अगर कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो इसका क्रेडिट कांग्रेस को मिलना तय है.

अखिलेश यादव: 2014 के लोकसभा चुनाव (Lok sabha chunav) में भले ही अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, लेकिन समाजवादी पार्टी ने मुलायम सिंह यादव के चेहरे को आगे करके लड़ी थी. बतौर पार्टी के अगुवा अखिलेश यादव पहला लोकसभा चुनाव (Lok sabha chunav 2019) लड़ रहे हैं. उन्होंने अपनी धुर विरोधी मायावती से गठबंधन किया है. देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश के नेतृत्व में पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहता है.

जयंत चौधरी: उत्तर प्रदेश में अजित सिंह एक क्षेत्र विशेष में राजनीति करते रहे हैं. अजित सिंह अभी भी राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के प्रमुख हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 (Chunav 2019) में पार्टी का चेहरा उनके बेटे जयंत चौधरी हैं. जयंत ने ही आगे बढ़कर अखिलेश और मायावती के साथ गठबंधन किया है. इसलिए आरएलडी का प्रदर्शन जयंत का राजनीतिक भविष्य तय करेगा.

तेजस्वी यादव: लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार में विपक्षी खेमे का सबसे बड़ा चेहरा आरजेडी नेता तेजस्वी यादव रहे. लालू प्रसाद यादव के जेल में होने के चलते तेजस्वी ने ही विपक्षी खेमे का नेतृत्व किया है. लालू की गैरमौजूदगी में अगर तेजस्वी के नेतृत्व में पार्टी अच्छा करती है तो उनका कद काफी बढ़ जाएगा.

स्टालिन : एम करुणानिधि का तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक सिक्का चला है. पिछले साल उनका देहांत हो जाने के बाद उनके छोटे बेटे एम.के.स्टालिन के हाथों में द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) की कमान है. स्टालिन के नेतृत्व में द्रमुक पहला लोकसभा चुनाव लड़ रही है. विपक्षी खेमे में स्टालिन एकलौते ऐसे नेता हैं जिन्होंने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवा माना है.

लोकसभा चुनाव 2019 का रिजल्ट (Chunav result 2019) तय करेगा कि इन पांच बड़े नेताओं के बेटे अपनी मां या पिता की विरासत को लोकतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा में कैसा प्रदर्शन कर पाते हैं.