लोकसभा चुनाव 2019: MP की इन 5 सीटों पर 1989 से आज तक नहीं जीत पाई कांग्रेस

मध्य प्रदेश बीजेपी का गढ़ है, पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 29 में से 27 सीटों पर परचम फहराया था. कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें छिंदवाड़ा और गुना सीट मिली थी. इस बार कांग्रेस सेंधमारी के लिए पूरा जोर लगा रही है.

लोकसभा चुनाव 2019: MP की इन 5 सीटों पर 1989 से आज तक नहीं जीत पाई कांग्रेस
इस बार कांग्रेस सेंधमारी के लिए पूरा जोर लगा रही है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए  पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होगा. पहले चरण के मतदान के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन था. बीजेपी पीएम नरेेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है तो कांग्रेस राहुल-प्रियंका के सहारे मोदी सरकार को हराने के लिए प्रयासरत है. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 48 सीटों पर सिमट गई थी. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में वापसी करके कांग्रेस के खेमे में थोड़ा उत्साह है. मध्य प्रदेश बीजेपी का गढ़ है. पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 29 में से 27 सीटों पर परचम फहराया था. कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें छिंदवाड़ा और गुना सीट मिली थी. इस बार कांग्रेस सेंधमारी के लिए पूरा जोर लगा रही है. आइए ऐसी ही पांच सीटों पर नजर डालते हैं जहां से कांग्रेस को 1989 से जीत का इंतजार है. 

भोपाल लोकसभा  सीट: भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है. भोपाल लोकसभा सीट बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है और इस सीट पर वर्ष 1989 से बीजेपी का कब्जा है. भोपाल के मौजूदा सांसद आलोक संजर हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने 3.70 लाख से अधिक वोटों से जीत पाई थी. कांग्रेस ने 1984 के चुनाव में भोपाल से जीत पाई थी. कांग्रेस नेता केएन प्रधान ने यह चुनाव जीता था. तब से कांग्रेस इस सीट पर जीत के लिए तरस रही है. देखना होगा कि इस बार क्या दिग्विजय सिंह इस सूखे को खत्म कर पाते हैं या नहीं. 

इंदौर लोकसभा सीट: इंदौर सीट भी बीजेपी का मजबूत किला है. 1989 से बीजेपी यहां से जीत रही है. लोकसभा अध्यक्ष आठ बार से इस सीट से सांसद हैं. हालांकि इस बार उनका टिकट तय नहीं माना जा रहा. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही इस बार अपने प्रत्याशी फाइनल नहीं किए हैं. कांग्रेस इस बार मजबूत प्रत्याशी उतारना चाहती है. कांग्रेस ने इस सीट पर अंतिम बार 1984 में लोकसभा चुनाव जीता था. प्रकाश चंद्र सेठी के सिर पर जीत का सेहरा सजा था.  

 

विदिशा लोकसभा सीट: विदिशा सीट बीजेपी का गढ़ है. कांग्रेस इस किले को 1989 से नहीं भेद पाई है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस सीट से पांच बार सांसद रह चुके हैं. मध्य प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री राघव जी ने सबसे पहले 1989 के चुनाव में कांग्रेस को हराया. फिर इसके बाद से कांग्रेस को इस सीट से जीत नसीब नहीं हुई. 1991 के लोकसभा चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी इस सीट से जीत हासिल कर संसद पहुंचे. 1991 से लेकर 2004 तक शिवराज सिंह चौहान का इस सीट पर कब्जा रहा. 2004 में इस सीट पर उपचुनाव हुए जिसमें बीजेपी के रामपाल सिंह ने जीत हासिल की. पिछले दो लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से सुषमा स्वराज इस सीट से सांसद है. विदिशा सीट से फिलहाल दोनों दलों ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. 

भिंड-दतिया लोकसभा सीट:  भिंड दतिया लोकसभा सीट बीजेपी के खासी महत्वपूर्ण सीट है. इस सीट पर भी बीजेपी का वर्ष 1989 से कब्जा बरकरार है. बीजेपी ने अपने वर्तमान सांसद डॉ. भागीरथ प्रसाद का टिकट काटकर दिमनी की पूर्व विधायक संध्या राय को मैदान में उतारा है. बीजेपी ने 35 साल बाद इस सीट पर किसी महिला प्रत्याशी को उम्मीदवार बनाया है. इससे पहले, 1984 में भिंड दतिया लोकसभा क्षेत्र से वसुंधरा राजे सिंधिया को महिला प्रत्याशी के रूप में उतारा था. उस चुनाव में, कांग्रेस के कृष्ण सिंह जूदेव ने उन्हें 87 हजार 403 वोट से हरा दिया था. कांग्रेस ने अभी तक अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है.  

दमोह लोकसभा सीट: मध्य प्रदेश की दमोह लोकसभा सीट बीजेपी का मजबूत दुर्ग है जहां बीजेपी 1989 से काबिज है. चुनाव आए और गए लेकिन जीत बीजेपी की ही हुई. बीजेपी इस सीट पर नौंवी बार जीत दर्ज करना चाहती है, वहीं कांग्रेस इस बार हार का सिलसिला तोड़ना चाहेगी. बीजेपी की ओर से 1989 में लोकेंद्र सिंह पहली बार यहां से चुनाव जीते. दमोह के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं. देवरी, मल्हारा, जबेरा, रहली, पाथरिया, हट्टा, बंडा, दमोह सीटें यहां पर आती हैं. इन 8 सीटों में से 4 पर कांग्रेस का कब्जा है, 3 पर बीजेपी और 1 सीट पर बीएसपी का कब्जा है. बीजेपी ने इस बार प्रहलाद पटेल पर भरोसा जताया है. वहीं कांग्रेस ने अभी तक कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया.