मध्य प्रदेश में बढ़ी कांग्रेस की मुश्किलें, पार्टी विधायक ने ही चुनावी मैदान में उतारे दो उम्मीदवार
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मध्य प्रदेश में बढ़ी कांग्रेस की मुश्किलें, पार्टी विधायक ने ही चुनावी मैदान में उतारे दो उम्मीदवार

जयस के प्रदेश अध्यक्ष अंतिम मुजाल्दा ने बताया कि उनके संगठन की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में तय किया गया कि धार सीट से महेन्द्र कन्नौज और रतलाम सीट से कमलेश डोडियार को बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा जाएगा.

फाइल फोटो

इंदौर: मध्यप्रदेश में कांग्रेस के सहयोगी संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने राज्य में सत्तारूढ़ दल (कांग्रेस) को अपना बागी तेवर दिखाते हुए जनजातीय समुदाय के लिये आरक्षित दो लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम की रविवार को घोषणा की. उल्लेखनीय है कि ‘जयस’, प्रदेश में गत विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले सियासी गलियारों में चर्चा में आया था. उच्च शिक्षित आदिवासी युवाओं का खड़ा किया गया यह संगठन फिलहाल राजनीतिक दल के तौर पर चुनाव आयोग में पंजीकृत नहीं है.

जयस के प्रदेश अध्यक्ष अंतिम मुजाल्दा ने बताया कि उनके संगठन की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में तय किया गया कि धार सीट से महेन्द्र कन्नौज और रतलाम सीट से कमलेश डोडियार को बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा जाएगा. प्रदेश में कुल 29 लोकसभा सीटें हैं. इनमें शामिल छह सीटें - शहडोल, मंडला, रतलाम, धार, खरगोन और बैतूल - अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिये आरक्षित हैं. 

मुजाल्दा ने कहा, "कांग्रेस ने हमसे वादा किया था कि धार, रतलाम, खरगोन और बैतूल सीटों पर प्रत्याशी चयन के मामले में हमारी राय को तवज्जो दी जायेगी. लेकिन कांग्रेस ने यह वादा नहीं निभाया और चारों सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी." उन्होंने कहा, "हम खरगोन सीट से अपने उम्मीदवार की घोषणा जल्द करेंगे, जबकि बैतूल सीट पर हम एक प्रत्याशी को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं. अब कांग्रेस को हमारी चुनावी ताकत का अंदाजा हो जायेगा." 

गौरतलब है कि गत विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारी के लिये जयस ने कांग्रेस से पश्चिमी मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल की कम से कम 15 विधानसभा सीटें मांगी थीं. लेकिन पूरा जोर लगाने के बावजूद उसे धार जिले के मनावर की केवल एक सीट मिल सकी थी. जयस के राष्ट्रीय संरक्षक हीरालाल अलावा इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक चुने गये थे. लेकिन 15 साल बाद सूबे की सत्ता में आयी कांग्रेस ने अलावा को अपनी सरकार में शामिल नहीं किया.

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