लोकसभा चुनाव 2019: फूलपुर जहां पंडित जवाहर लाल नेहरू से अतीक अहमद तक रहे सांसद

साल 2014 में पहली बार इस सीट पर मोदी लहर में कमल खिला, लेकिन डिप्टी सीएम बनने के बाद साल 2017 में उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया और 2018 में हुए उपचुनाव में सपा इस सीट से जीत दर्ज की. 

लोकसभा चुनाव 2019: फूलपुर जहां पंडित जवाहर लाल नेहरू से अतीक अहमद तक रहे सांसद
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आजादी के बाद पहली बार साल 1952 में हुए लोकसभा चुनाव में फूलपुर संसदीय सीट लड़ा.

नई दिल्ली: फूलपुर उत्तर प्रदेश की 51वीं लोकसभा सीट है. फूलपुर लोकसभा सीट का नाम यूपी की हाई प्रोफाइल सीट में गिना जाता है. ये इलाहाबाद जिले में स्थित है. इस सीट पर तीन बार उपचुनाव हो चुका है. फूलपुर सीट से कभी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने चुनाव लड़ा. साल 2014 में पहली बार इस सीट पर मोदी लहर में कमल खिला और केशव प्रसाद मौर्य सांसद चुने गए, लेकिन डिप्टी सीएम बनने के बाद साल 2017 में उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया. केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली पड़ी इस सीट पर उपचुनाव हुआ और फिर सपा के नागेंद्र पटेल संसद पहुंचे. 

2014 में ये था आंकड़ा
साल 2014 में मोदी लहर में बीजेपी ने पहली बार इस सीट पर कमल खिला दिया. साल 2014 में बीजेपी के केशव मौर्य ने इस सीट से जीत दर्ज की थी. उन्हें जनता ने 5,03,564 के रिकॉर्ड वोट से जी दर्ज की थी. सपा के धर्मराज सिंह पटेल दूसरे, बीएसपी के कपिलमुनि करवरिया तीसरे और कांग्रेस के मो. कैफ तीसरे स्थान पर रहे थे. 

 

2018 में हुआ उपचुनाव
केशव प्रसाद मौर्य के डिप्टी सीएम बनने के बाद उन्होंने फूलपुर लोकसभा से इस्तीफा दिया. सीट के खाली होने के बाद साल 2018 में बीजेपी 2014 की जीत को दोहरा नहीं सकी. सपा के नागेंद्र पटेल ने बीजेपी कौशलेंद्र पटेल को मात दी थी. उपचुनाव में बसपा-सपा और कांग्रेस ने गठबंधन किया था. इसलिए इस सीट से कांग्रेस और बसपा ने अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था. सपा के नागेंद्र पटेल को 3,42,922, बीजेपी के कौशलेंद्र पटेल 2,83,462 औऱ निर्दलीय उम्मीदवार अतीक अहमद को 48,094 वोट मिले थे. 

फूलपुर का राजनीतिक इतिहास
फूलपुर लोकसभा सीट यूपी की वह लोकसभा सीट है, जिसका वर्तमान और अतीत दोनों काफी दिलचस्प है. देश में 1951-52 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए. तब इलादाबाद और जौनपुर जिले को मिलाकर लोकसभा के कुल 4 सांसद चुने जाते थे. ये सीटें- जौनपुर पूर्व, इलाहाबाद पूर्व, जौनपुर पश्चिम, इलाहाबाद पश्चिम थीं. इलाहाबाद पूर्व और जौनपुर पश्चिम से दो सांसद चुने जाते थे. 

देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आजादी के बाद पहली बार साल 1952 में हुए लोकसभा चुनाव में फूलपुर संसदीय सीट लड़ा. साल 1957 में इलाहाबाद पूर्व और जौनपुर पश्चिम लोकसभा सीट का नाम बदलकर फूलपुर कर दिया गया. साल 1957 में फिर मैदान फतह करने के बाद के बाद साल 1962 में 
जवाहरलाल नेहरू की टक्कर समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया से हुई, लेकिन नेहरू के आगे वो चुनावी मैदान में पस्त हो गए. 27 मई 1964 को जवाहर लाल नेहरू का निधन हो गया. 1964 में हुए उपचुनाव में जवाहर लाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनीं. विजयलक्ष्मी पंडित ने सोशलिस्ट पार्टी के जनेश्वर मिश्र को हराया. 1967 के चुनाव में कांग्रेस की विजयलक्ष्मी पंडित ने फिर से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के जनेश्वर मिश्र को हराया और दूसरी बार सांसद बनीं.

साल 1969 में विजयलक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि चुनी गईं जिसकी वजह से ये सीट खाली हो गई, जिसके बाद में उपचुनाव हुआ जिसमें कांग्रेस ने केशव देव मालवीय को उम्मीदवार बनाया. लेकिन समाजवादी के जनेश्वर मिश्र ने उन्हें इस चुनाव में हरा दिया. साल 1971 में फिर से कांग्रेस ने वापसी की और कांग्रेस के विश्वनाथ प्रताप सिंह इस सीट से चुनाव जीते. साल 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस से भारतीय लोकदल में आई कमला बहुगुणा चुनाव जीतीं. साल 1980 में जनता पार्टी सेक्यूलर के बीडी सिंह ने चुनाव जीता. साल 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर से वापसी की. कांग्रेस के राम पूजन पटेल ने ये चुनाव जीता. 

साल 1989 के लोकसभा चुनाव से पहले राम पूजन जनता दल में चले गए. जनता दल पर सवार होकर पटेल कांग्रेस विरोधी लहर में चुनाव जीते. साल 1991 की जनता दल के राम पूजन पटेल लगातार तीसरी बार सांसद बने. साल 1996 और 1998 में सपा के जंग बहादुर पटेल लगातार 2 बार सांसद चुने गए. साल 1999 में सपा ने धर्मराज पटेल को टिकट दिया और उन्होंने सपा के विश्वास को संसद पहुंचे. साल 2004 में सपा ने अतीक अहमद ने विश्वास जताकर टिकट दिया. फूलपुर की जनता ने अतीक अहमद को जीत दिलाई. साल 2009 के चुनाव में बीएसपी पहली बार इस सीट को जीतने में कामयाब रही और पंडित कपिल मुनि करवरिया यहां से सांसद चुने गए. साल 2014 में मोदी लहर का करिश्मा इस सीट पर दिखा और बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्य सांसद बने, लेकिन 2018 में हुए उपचुनाव में सपा ने एक बार कब्जा जमा लिया.