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चुनाव के बाद इस राज्‍य में लग सकता है बीजेपी को झटका, सहयोगी दल छोड़ सकता है साथ

पहले ही आशंका जताई जा रही थी कि बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी एनपीएफ के बीच में अनबन है. ऐसे में उसके एनडीए में बने रहने पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे. शनिवार को एनपीएफ ने बयान जारी कर कहा कि वह चुनावों के बाद बीजेपी से अलग होने की घोषणा कर सकता है.

चुनाव के बाद इस राज्‍य में लग सकता है बीजेपी को झटका, सहयोगी दल छोड़ सकता है साथ

इंफाल: लोकसभा चुनाव 2019 के चुनावों का परिणाम 23 मई को आएगा, लेकिन उससे पहले ही बीजेपी को एक झटका लगा है. मणिपुर में बीजेपी की सहयोगी पार्टी एनपीएफ ने  कहा है कि वह 23 मई को आने वाले चुनाव परिणामों के बाद घोषणा करेगा कि वह बीजेपी के साथ नहीं रहेगा. हालांकि इससे संबंधि‍त खबरें पहले ही आ चुकी थीं कि दोनों दलों के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है. शनिवार को एनपीएफ ने एक बयान जारी कर कहा कि हमने इस बारे में एक लंबी मीट‍िंग की है.

बयान जारी करते हुए एनपीएफ (नगा पीपुल्‍स फ्रंट) की ओर से कहा गया, आज हमने कोहिमा में इस संबंध में मीट‍िंग की. इसमें हमने तय किया कि अब हमें अपने सिद्धांतों के आधार पर बीजेपी सरकार से समर्थन वापस ले लेना चाहि‍ए. लेकिन अभी हम समर्थन वापसी की घोषणा नहीं कर सकते, चुनाव के बाद इस पर अंतिम निर्णय लेंगे.

ये है मण‍िपुर विधानसभा की स्‍थ‍ित‍ि
60 सदस्‍यों वाली मण‍िपुर विधानसभा में बीजेपी के 31 विधायक हैं. सरकार बनाने के लिए बहुमत बीजेपी के पास है. इसके अलावा उसे अब तक एनपीएफ का समर्थन हास‍िल था. एनपीएफ के 4 विधायक हैं. इसके अलावा सरकार के पास दो और विधायकों का समर्थन हा‍स‍िल है.

कुछ दिन पहले आई थीं अनबन की खबरें
मणिपुर में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की सहयोगी पार्टी एनपीएफ के बीच अनबन की खबरें पहले ही आनी शुरू हो गई थीं. एनपीएफ का कहना था कि बीजेपी उसके विचारों और सुझावों को तवज्जो नहीं दे रही है. एनपीएफ ने शनिवार को इस बात पर फैसला करने के लिये अपने नेताओं की बैठक बुलाई थी कि उसे गठबंधन में बने रहना है या अपना समर्थन वापस लेना है. हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा ने कहा था कि उसने सरकार के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिये अपने सहयोगियों को हरसंभव सुविधाएं दी हैं.

एनपीएफ ने लगाए थे गंभीर आरोप
नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के प्रदेश इकाई के प्रमुख अवांगबू नेवमई ने दावा किया था कि भाजपा अपने गठबंधन सहयोगियों को तुच्छ समझती है. इस बारे में विस्तृत जानकारी दिये बिना उन्होंने कहा, ‘‘2016 में गठबंधन सरकार के गठन के बाद से भाजपा ने कभी गठबंधन की मूल भावना का सम्मान नहीं किया. ऐसे कई मौके आये जब उनके नेताओं ने हमारे सदस्यों को गठबंधन सहयोगी मानने से इनकार किया.’’

उन्‍होंने कहा कि 60 सदस्यीय विधानसभा में एनपीएफ के चार विधायक हैं. हमारे चारों विधायकों में से लोशी दिखो मंत्री हैं, जो माओ विधानसभा सीट से विधायक हैं. नेवमई ने यह भी कहा कि भगवा पार्टी ने अपने गठबंधन सहयोगियों को जो वादे किये थे उसे कभी पूरा नहीं किया. उन्होंने दावा किया, ‘‘एनपीएफ ने हमेशा भाजपा को अपने बड़े भाई की तरह समझा है लेकिन यह भगवा पार्टी को हमें झांसा देने से नहीं रोक पाया. हमें उचित सम्मान नहीं मिला.’’

नेवमई के दावों को गलत बताते हुए मणिपुर में भाजपा प्रवक्ता सीएच बिजॉय ने कहा कि एनपीएफ ने गठबंधन में शामिल होने के दौरान कहा था कि उसे मंत्री पद नहीं चाहिए लेकिन अब ऐसा लगता है कि पार्टी की कई मांगें हैं. उन्होंने कहा, ‘‘एनपीएफ की मांगें पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद हैं. सरकार के सुचारू कामकाज के लिये हमारे गठबंधन सहयोगियों को हरसंभव सुविधाएं दी गयी हैं.’’