क्या नादंयाल सीट पर बरकरार रहेगा वाईएसआर कांग्रेस का कब्जा, टीडीपी से टक्कर

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए नादंयाल सीट पर पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान हुआ. नादंयाल में त्रिकोणीय मुकाबला बताया जा रहा है लेकिन मुख्य मुकाबला टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच ही है. नांदयाल सीट से उपचुनाव जीतकर नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने थे.

क्या नादंयाल सीट पर बरकरार रहेगा वाईएसआर कांग्रेस का कब्जा, टीडीपी से टक्कर

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए नादंयाल सीट पर पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान हुआ. नादंयाल में त्रिकोणीय मुकाबला बताया जा रहा है लेकिन मुख्य मुकाबला टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच ही है. नांदयाल सीट से उपचुनाव जीतकर नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने थे. वह दो बार 1991 और 1996 में यहां से सांसद रहे. फिलहाल इस सीट पर वाईएसआर कांग्रेस का कब्जा है. एसपीवाई रेड्डी यहां से चुनाव जीते. अब वह वाईएसआर कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं और जनसेना पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. वाईएसआर कांग्रेस ने इस बार ब्रह्मनंद रेड्डी को मैदान में उतारा है. टीडीपी ने मंद्रा सिवानंद रेड्डी पर दांव लगाया है. बीजेपी ने आदिनारायण को भगवा लहराने की जिम्मेदारी दी है. कांग्रेस ने जे लक्ष्मी नरसिम्हा यादव को मैदान में उतारा है.

एसपीआई रेड्डी चौथी बार सांसद बनने के लिए दौड़ में
राजनीति के मंझे खिलाड़ी एसपीआई रेड्डी चौथी बार सांसद बनने के लिए मैदान में हैं. वह यहां से तीन से सांसद हैं. दो बार कांग्रेस से और पिछली बार वाईएसआर कांग्रेस से. 2004 में वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और सांसद बने. 2009 में भी वह कांग्रेस के टिकट पर एक बार फिर से सांसद चुने गए. 2014 में उन्होंने सियासी रुख को भांपकर पाला बदल लिया और वाईएसआर कांग्रेस के टिकट पर दिल्ली पहुंच गए.   

निर्दलीय ने जीता था पहला लोकसभा चुनाव 
नादंयाल में 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई. 1957 में यह क्षेत्र कांग्रेस के गढ़ में तब्दील होने लगा. कांग्रेस यहां से लगातार चार बार जीती. आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में कांग्रेस को यहां से मुंह की खानी पड़ी. जनता पार्टी की ओर से नीलम संजीव रेड्डी चुनाव जीते जो कि बाद में देश के राष्ट्रपति भी बने. 

 

1984 में टीडीपी ने खोला खाता
नादंयाल सीट पर टीडीपी ने 1984 में आई लहर में खाता खोला. हालांकि 1989 में फिर से कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा जमा लिया. 1991 में यह सीट सीट नरसिम्हा राव के लिए खाली की गई. उपचुनाव में नरसिम्हा राव जीते. वह दोबारा भी यहां से सांसद बने. हालांकि 1996 के उपचुनाव में टीडीपी ने फिर से इस पर कब्जा जमा लिया और टीडीपी ने जीत की हैट्रिक लगाई.  

2014 पहली बार जीती वाईएसआर कांग्रेस
2014 के चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस ने यहां से अपना खाता खोला. वाईएसआर कांग्रेस के एस.पी.वाय रेड्डी ने 1 लाख 05 हजार 766 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी. दूसरे स्थान पर टीडीपी के एनएम, फारूक रहे थे जिन्होंने 5 लाख 16 हजार 645 वोट मिले. कांग्रेस पार्टी के बी.वाई रामाय को महज 16 हजार 378 वोट पर संतोष करना पड़ा.