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17वीं लोकसभा में मुस्लिम प्रतिनिधियों की संख्या 22 से बढ़कर हुई 27

भाजपा के पास 303 सीटें हैं. इनमें सौमित्र खान भाजपा का एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं. ज्यादातर मुस्लिम सांसद हालांकि विपक्षी दलों के हैं.

17वीं लोकसभा में मुस्लिम प्रतिनिधियों की संख्या 22 से बढ़कर हुई 27
मुस्लिम प्रतिनिधियों की संख्या 27 हुई हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्लीः आम चुनाव के बाद 17वीं लोकसभा में मुस्लिम प्रतिनिधियों की संख्या 22 से बढ़कर 27 हो गई है. इनमें पश्चिम बंगाल से सांसद सौमित्र खान भाजपा का एक मुस्लिम चेहरा हैं. वह तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को हराकर संसद पहुंचे हैं. संसद के निचले सदन में देशभर से 542 सीटें हैं. इनमें भाजपा के पास 303 सीटें हैं. इनमें सौमित्र खान भाजपा का एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं. ज्यादातर मुस्लिम सांसद हालांकि विपक्षी दलों के हैं.

इस बार सौमित्र खान के अलावा सत्तापक्ष का एक और मुस्लिम चेहरा महबूब अली कैसर के रूप में संसद पहुंचा है. कैसर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की घटक लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के उम्मीदवार के रूप में बिहार के खगड़िया से जीते हैं.

पिछली बार यानी 16वीं लोकसभा में मुस्लिम प्रतिनिधि महज 22 थे. यह आंकड़ा लोकसभा के इतिहास में सबसे कम था. अगर 15वीं लोकसभा की बात की जाए तो मुस्लिम प्रतिनिधि 33 थे. लोकसभा में मुस्लिमों को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व सन् 1980 में मिला था. उस बार 49 मुस्लिम उम्मीदवार विजेता बन लोकसभा पहुंचे थे.

भाजपा ने इस बार छह मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. सौमित्र खान पहले तृणमूल कांग्रेस से सदस्य थे. ऐन चुनाव के वक्त भाजपा में शामिल हुए और पश्चिम बंगाल की विष्णुपुर सीट जीते. इस पूर्वी राज्य में भाजपा को 42 में से 18 सीटें मिली हैं.

खान ने तृणमूल कांग्रेस के श्यामलाल संत्रा को 78,047 मतों से हराया था. खान को 6,57,019 मत मिले.

भाजपा ने बंगाल में मफूजा खातून के रूप में एक और मुस्लिम चेहरा जंगीपुर सीट पर उतारा था, जहां मुस्लिमों की तादाद 61.79 फीसदी है. भाजपा का यह दांव यहां कामयाब नहीं हो पाया. इस सीट से तृणमूल के खलीलुर रहमान जीते. यह वही सीट है, जिसका प्रतिनिधित्व पहले कांग्रेस के अभिजीत मुखर्जी किया करते थे. अभिजीत पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेटे हैं. पूर्व राष्ट्रपति ने इस चुनाव में लोकतंत्र के आधार संस्थान निर्वाचन आयोग को अपनी गरिमा बचाने की नसीहत दी थी.

भाजपा ने बंगाल के ही मुर्शिदाबाद से हुमायूं कबीर को मैदान में उतारा था. पार्टी को पूरी उम्मीद थी कि लगभग 66 फीसदी मुस्लिम आबादी वाली यह सीट कबीर उसकी झोली में डाल ही देंगे, मगर हुमायूं महज 2,47,809 मत पाकर तीसरे पायदान पर चले गए.

हिंदुत्ववादी चेहरे से इतर भाजपा ने इस बार कुछ और मुस्लिम चेहरों पर दांव लगाया था, लेकिन कामयाबी नहीं मिली. पार्टी ने कश्मीर में तीन मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे- सोफी यूसुफ को अनंतनाग से, जिन्हें 10,225 मत मिले. बारामुला में मोहम्मद मकबूल ने भगवा ध्वज ढोया, मगर उनकी झोली में 7,894 वोट ही आए. राजधानी श्रीनगर में शेख खालिद जहांगीर भाजपा का चेहरा बने, लेकिन उन्हें महज 4,631 मतों से संतोष करना पड़ा.

इस बार नई लोकसभा में पहुंचे मुस्लिम चेहरों में कांग्रेस से 5, तृणमूल कांग्रेस से 5, समाजवादी पार्टी से 3, बहुजन समाज पार्टी से 3 और नेशनल कान्फ्रेंस से 3 हैं.

अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी वाले दो राज्य- उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने इस बार 6-6 मुस्लिम चेहरे लोकसभा में भेजे हैं. पिछली बार भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीती थीं, मगर इस बड़े प्रदेश से एक भी मुस्लिम चेहरा लोकसभा में नहीं पहुंचा था.