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ये मोदी है, जो केवल मक्खन पर ही नहीं बल्कि पत्थर पर भी लकीर खींचता है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने यहां एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि देश ने उसे 20वीं शताब्दी में एक अवसर दिया था किंतु उसने इसे एक परिवार को सौंप कर अवसर को गंवा दिया.

ये मोदी है, जो केवल मक्खन पर ही नहीं बल्कि पत्थर पर भी लकीर खींचता है: पीएम मोदी
पीएम मोदी के कटआउट के साथ सेल्‍फी लेते उनके समर्थक. फोटो: पीटीआई

मेंगलुरू: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री या किसी सरकार के चुनाव के लिए नहीं बल्कि 21वीं शताब्दी में ‘‘न्यू इंडिया (नया भारत)’’ कैसा हो, इसके लिए हैं. प्रधानमंत्री ने यहां एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि देश ने उसे 20वीं शताब्दी में एक अवसर दिया था किंतु उसने इसे एक परिवार को सौंप कर अवसर को गंवा दिया.

पीएम मोदी ने कहा, ये मोदी है, जो केवल मक्खन पर ही नहीं बल्कि पत्थर पर भी लकीर खींचता है. इस बार का चुनाव कौन सांसद बने, कौन प्रधानमंत्री बने, कौन मंत्री बने या सिर्फ सरकार चुनने का चुनाव नहीं है। बल्कि 21वीं सदी का नया भारत कैसा होगा, ये तय करने का है.

कर्नाटक की कांग्रेस-जदएस सरकार को आड़े हाथ लेते हुए मोदी ने कहा कि दोनों सत्तारूढ़ भागीदारों के लिए प्रेरणा ‘‘परिवारवाद’’ है जबकि भाजपा के लिए यह ‘‘राष्ट्रवाद’’ है. उन्होंने राज्य की कांग्रेस-जदएस सरकार को किसानों का ‘शत्रु’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र की किसानों के खाते में छह हजार रूपये प्रतिवर्ष डालने की योजना के लाभार्थियों की सूची सौंपने में राज्य सरकार विफल रही है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ‘महामिलावट’ संस्कृति से केवल परम्पराएं नष्ट हुई हैं बल्कि रक्षा एवं अर्थव्यवस्था भी कमजोर हुई है. कांग्रेस, JDS और उन जैसे अनेक दलों की प्रेरणा परिवारवाद है और हमारी राष्ट्रवाद है। वो अपने परिवार के आखिरी सदस्य तक को सत्ता का लाभ देते हैं. हम समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को आगे लाने के लिए मेहनत करते हैं.

उनका वंशोदय अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नजरअंदाज करता है. हमारा अंत्योदय एक चायवाले तक को प्रधानमंत्री बना देता है. उनका दर्शन वंशोदय है, हमारा दर्शन अंत्योदय है. उनके वंशोदय से भ्रष्टाचार और अन्याय पैदा होता है. हमारे अंत्योदय से पारदर्शिता और ईमानदारी की प्रतिष्ठा बढ़ती है.