लोकसभा चुनाव : BJP-शिवसेना गठबंधन के बाद अब सबकी निगाहें कांग्रेस-NCP पर, बातचीत जारी

कांग्रेस और एनसीपी जहां मराठा वोटरों की अगुवाई करने की जुगत में है वहीं, 17 प्रतिशत दलित और 13 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में लाना चाह रही है.

लोकसभा चुनाव : BJP-शिवसेना गठबंधन के बाद अब सबकी निगाहें कांग्रेस-NCP पर, बातचीत जारी
कांग्रेस और एनसीपी में बातचीत जारी है. (तस्वीर- शरद पवार)

मुम्बई : लोकसभा चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी होने से पहले ही कई दलों ने अपने गठबंधन का एलान कर दिया है. लेकिन कई दल अब भी अपने साथी ही तलाश कर रहे हैं. सत्ता में रहकर भी बीजेपी की आलोचना करने वाली शिवसेना ने अपनी सहमति तो जता दी है. कांग्रेस, एनसीपी सहित कई छोटी पार्टियों को अपने साथ लाने के लिए कवायदें कर रही हैं. स्थानीय पार्टियां भी इस मौके को चूकना नहीं चाहती है. अपने महत्व को समझते हुए इस मौके का दोहन करना चाह रही हैं.

देश में कुल सात चरणों में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं. महाराष्ट्र में चार चरणों में चुनाव संपन्न होंगे. यहां कांग्रेस और एनसीपी जहां मराठा वोटरों की अगुवाई करने की जुगत में है वहीं, 17 प्रतिशत दलित और 13 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में लाना चाह रही है.

दलित वोटरों की अगुवाई करने वाले प्रकाश अंबेडकर कांग्रेस और एनसीपी दोनों से गठबंधन के पहले ही एमआईएम के साथ जाने की सहमति दिखा चुके हैं. साथ ही उन्होंने कांग्रेस और एनसीपी के साथ आने के लिए अपनी शर्त भी रखी है. भारतीय रिपब्लिकन पार्टी बहुजन महासंभ के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने साफ तौर पर कहा है कि, 'हम पहले से ही 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार को चुन चुके हैं. अब मैं उनको पीछे हटने के लिए नहीं कह सकता. कांग्रेस हमसे गठबंधन के लिए कोशिश कर रही है. लेकिन हमारी दो शर्तें होंगी. पहली कि जिन 22 सीटों पर हमने कैंडिडेट तय कर रखे हैं वह सभी चुनाव लड़ें और एआईएमआईएम का साथ नहीं छोड़ेंगे.

कांग्रेस और एनसीपी आपसी सहमति को पूरी तरह से मानते हैं, लेकिन सीटों की सहमति पर मौन ही रहते हैं. दोनों इस उम्मीद में हैं कि दलित वोटरों को अपनी तरफ झूका लेंगे. एनसीपी के नेता और राज्यसभा सांसद माजिद मेमन ने कहा है कि उनकी तैयारी पूरी है फिर भी इंतजार है. उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि कांग्रेस और एनसीपी तैयार नहीं है. हम पूरी तरह से तैयार हैं. हम बस इसीलिए रुके हुए हैं ताकि और भी पार्टी अगर हमारे साथ जुड़ना चाहे तो जुड़ सके. पूरे भारत का तो नहीं बता सकता, लेकिन हमें पूरा विश्वास है के एनसीपी और कांग्रेस का गठबंधन महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में अच्छी खासी सीटें लाएगी.'

वहीं, शिवसेना दोनों दलों पर कटाक्ष करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है. भले ही सत्ता में रहकर अपने ही सहयोगी बीजेपी की आलोचना करती रही हो, लेकिन आपसी गठबंधन पहले हो जाने से विरोधी दल पर मंद-मंद मुस्करा रही है. शिवसेना सांसद अरविंद सावंत के मुताबिक, हमारी रणनीति भले ही स्पष्ट हो गई हो लेकिन कांग्रेस और एनसीपी की नीति पर अभी कुछ बोला नही जा सकता है. जब तक उनके कैंडिडेट्स का खुलासा नहीं हो जाता है तब तक कुछ कमेंट करना ठीक नही होगा.

राजनीतिक विश्लेषकों के नजरिए से यह स्थिती अलग तौर पर जाहिर हो रही है. हालांकि बीजेपी और शिवसेना के बीच बनी सहमति उन्हें एक कदम आगे जरूर रखे हुए है, लेकिन विश्लेषकों की चिंता अंतिम समय में राजनीतिक उठापटक से अलग संभावना को भी नहीं नकार रही है. अनुराग त्रिपाठी का मानना है कि मौजूदा परिस्थिति देखते हुए यह तो साफ पता चलता है कि शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन अभी फिलहाल कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन से एक कदम आगे चल रहा है, लेकिन शरद पवार का इतिहास रहा है एन मौके पर वह कुछ ना कुछ अलग कर ही देते हैं.