गिरिराज सिंह का बड़ा बयान,कहा- 'ऐसा लगा राहुल केरल नहीं रावलपिंडी में नॉमिनेशन कर रहे थे'

गिरिराज सिंह ने कहा है कि राहुल गांधी देश में पाकिस्तान का एजेंडा स्थापित कर रहे हैं. एक तरफ सिद्धु बाजवा से गले मिल रहे हैं. 

गिरिराज सिंह का बड़ा बयान,कहा- 'ऐसा लगा राहुल केरल नहीं रावलपिंडी में नॉमिनेशन कर रहे थे'
गिरिराज सिंह ने एक बार राहुल गांधी पर निशाना साधा है.(फाइल फोटो)

बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय में बीजेपी प्रत्याशी गिरिराज सिंह ने एक बार राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बड़ा बयान दिया है. गिरिराज सिंह ने कहा है कि राहुल गांधी देश में पाकिस्तान का एजेंडा स्थापित कर रहे हैं. एक तरफ सिद्धु बाजवा से गले मिल रहे हैं. 

गिरिराज सिंह ने साथ ही ये भी कहा कि राहुल गांधी सोची समझी रणनीति के तहत जब अमेठी से चुनाव हार जाते मानसिक रूप से तब केरल जाते. वहां मुस्लिम लिंक के साथ जो हुआ उसमें कांग्रेस के झंडे विलुप्त हो गए. उससे ऐसा लग रहा था जैसे राहुल गांधी केरल नहीं पाकिस्तान के रावलपिंडी में नामांकन कर रहे हैं.

 

उनके कहा कि मैं इसलिए मांग करता हूं कि ऐसा कोई भी झंडा दो दूसरे देश के झंडे से मिलता है उसपर चुनाव आयोग को रोक लगा देनी चाहिए. यह घृणा फैलाते हैं और वातावरण को दूषित करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये घृणा फैलाते हैं और पाकिस्तान में इस्तेमाल होने की धारणा बनाते हैं. अपने कट्टर विचारों के लिए जाने जाने वाले गिरिराज सिंह ने कहा कि इस संसदीय क्षेत्र से उनकी जंग उस ‘गिरोह’ के खिलाफ है जो भारत के ‘टुकड़े’ करने के लिए काम कर रहा है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एवं विकास के एजेंडा का प्रतिनिधित्व करते हैं.

गिरिराज सिंह ने कहा कि बीजेपी नीत एनडीए, बिहार (यहां लोकसभा की 40 सीटें हैं) में 2014 में जीती गई 31 सीटों के आंकड़ों को सुधारेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं प्रत्येक सीट पर गठबंधन के उम्मीदवार हैं तथा इसके सभी प्रत्याशी “उनके ही प्रतीक’’ हैं. 

बेगूसराय में त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है, जहां सिंह का सामना आरजेडी के तनवीर हसन और भाकपा के युवा नेता कन्हैया कुमार से है. उन्होंने 2014 में 1.4 लाख मतों के अंतर से बिहार की नवादा लोकसभा सीट से जीत हासिल की थी लेकिन इस बार उन्हें बेगूसराय से टिकट दिया गया है. 

इस सीट पर होने जा रही टक्कर इस बार के आम चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा में रही क्योंकि सिंह को बीजेपी के कट्टर हिंदुत्व चेहरा के तौर देखा जाता है , वहीं जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कुमार खुद को भगवा विचारधारा को चुनौती देने वाले निर्भीक उम्मीदवार के तौर पर पेश कर रहे हैं.