ZEE Jankari: क्‍या पीएम मोदी बनारस में पिछली जीत का रिकॉर्ड तोड़ेंगे

90 के दशक से वाराणसी बीजेपी के लिये एक सुरक्षित सीट मानी जाती है लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बनारस की जनता से पिछले 5 वर्षों में किये गये कार्यों के आधार पर वोट मांगे हैं.

ZEE Jankari: क्‍या पीएम मोदी बनारस में पिछली जीत का रिकॉर्ड तोड़ेंगे

अब आपको अध्यात्म और संस्कृति के मुख्यालय..यानी बनारस लेकर चलते हैं. लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में बनारस.... सबसे हाई प्रोफाइल सीट है. यहां से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी..बीजेपी के उम्मीदवार है. अगले तीन दिन तक बनारस... देश की राजनीति का केंद्रबिंदु बना रहेगा. वैसे 90 के दशक से वाराणसी बीजेपी के लिये एक सुरक्षित सीट मानी जाती है लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बनारस की जनता से पिछले 5 वर्षों में किये गये कार्यों के आधार पर वोट मांगे हैं.

19 मई को होने वाले मतदान से ये बात तय हो जायेगी कि बनारस की जनता अपने सांसद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कितनी खुश है. वैसे इसकी एक छोटी सी झलक 25 अप्रैल को हुए नरेन्द्र मोदी के रोड शो में मिल चुकी है लेकिन बनारस के लोगों का ये दावा है कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ देंगे और उनकी जीत का अंतर बढ़ जाएगा.

वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाराणसी में 5 लाख 81 हज़ार वोट मिले थे. उन्होंने अरविंद केजरीवाल को 2 लाख 9 हजार वोटों से हराया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 5 वर्षों में 19 बार वाराणसी का दौरा किया है और अपने ज्यादातर दौरों में उन्होंने बनारस को कुछ ना कुछ दिया है. इस बार प्रधानमंत्री मोदी अपने सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर बहुत उत्साहित हैं.

इस ड्रीम प्रोजेक्ट का नाम है काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर. गंगा नदी पर स्थित मणिकर्णिका घाट को काशी विश्वनाथ मंदिर से जोड़ने वाला ये कॉरिडोर..बनारस में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक वरदान साबित होगा. आने वाले दिनों में काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको तंग गलियों की समस्याओं से मुक्ति मिल जायेगी.

ये बात सब जानते हैं कि बनारस गलियों का शहर है यहां के लोगों से लेकर स्वयं भगवान विश्वनाथ भी काशी की तंग और संकरी गलियों में बसे हुए हैं. भगवान के दर्शन करने के लिए लोगों को इन तंग गलियों से गुज़रना पड़ता है. मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर के बीच बने इस कॉरिडोर में करीब 40 प्राचीन मंदिर हैं, जो लोगों के घरों और अन्य संपत्तियों के अंदर मौजूद थे. इन मंदिरों को इनके मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए इस कॉरिडोर का निर्माण किया गया और इसके लिए कई पुरानी इमारतों को हटाया गया. ये एक मुश्किल फैसला था लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने शिवभक्ति के संकल्प के साथ ये Bold फैसला लिया. इस फैसले से कुछ लोग बहुत परेशान हैं और इस पर राजनीति भी कर रहे है.

इस कॉरिडोर का विरोध करने वाले लोग ये भ्रम फैला रहे हैं कि वहां मंदिर तोड़ने का प्रयास किया गया है. इस भ्रम को दूर करने के लिए हमारी टीम ने बनारस जाकर एक रिपोर्ट तैयार की है. इससे आपको झूठ और सच के बीच का अंतर पता चल जाएगा.