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'भारतीय कार्यक्रम हमारी संस्कृति को पहुंचाते हैं नुकसान, इनको दिखाने की इजाजत नहीं देंगे'- PAK के चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस निसार ने पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर भारतीय कार्यक्रमों के प्रसारण पर पाबंदी के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान इलेक्ट्रानिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पेमरा) की अपील पर सुनवाई करते वक्त ये टिप्पणियां कीं.

'भारतीय कार्यक्रम हमारी संस्कृति को पहुंचाते हैं नुकसान, इनको दिखाने की इजाजत नहीं देंगे'- PAK के चीफ जस्टिस
2016 में पेमरा ने स्थानीय टेलीविजन और एफएम रेडियो चैनलों पर भारतीय सामग्री को प्रसारित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था.

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के चीफ जस्टिस साकिब निसार ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर भारतीय कार्यक्रम दिखाने की अनुमति नहीं देगा क्योंकि यह ‘‘हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचाते हैं.’’ 

हाईकोर्ट के फैसले को पलटा!
"डॉन" की खबर के अनुसार चीफ जस्टिस निसार ने पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर भारतीय कार्यक्रमों के प्रसारण पर पाबंदी के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान इलेक्ट्रानिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पेमरा) की अपील पर सुनवाई करते वक्त ये टिप्पणियां कीं. अखबार के अनुसार, प्राधिकरण के प्रमुख सलीम बेग ने अदालत से कहा कि ‘फिल्माजिया चैनल’ पर दिखाए जाने वाले 65 प्रतिशत कार्यक्रम विदेशी हैं और कई बार यह आंकड़ा 80 प्रतिशत तक चला जाता है.

चैनलों से नहीं हो कोई दुष्प्रचार- वकील
इस पर, प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम (पाकिस्तानी) चैनलों पर भारतीय कार्यक्रमों के प्रसारण की अनुमति नहीं देंगे.’’ प्राधिकरण के वकील ने प्रधान न्यायाधीश से कहा, ‘‘फिल्माजिया कोई समाचार चैनल नहीं बल्कि मनोरंजन चैनल है, यह कोई दुष्प्रचार नहीं करता है.’’ प्रधान न्यायाधीश ने जवाब दिया, ‘‘हालांकि यह हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचा रहा है.’’ 

मामले के सभी पहलूओं पर विचार करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने इस केस की सुनवाई को फरवरी तक के लिए टाल दिया है. न्यायाधीश की इस टिप्पणी के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान में जल्द ही भारतीय चैनलों पर बैन लग सकता है.

2016 में लगाया गया था इस तरह का प्रतिबंध
इससे पहले 2016 में पेमरा ने स्थानीय टेलीविजन और एफएम रेडियो चैनलों पर भारतीय सामग्री को प्रसारित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था. इस फैसले को काफी हद तक भारत में कुछ चैनलों और मनोरंजन उद्योग द्वारा समान सामग्री और कलाकारों के खिलाफ उठाए गए कदमों के बाद 'जैसे को तैसा' कदम के रूप में देखा गया था.

(इनपुट-भाषा)