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चीन ने बनाया हाइपरसोनिक इंजन, केरोसीन से चलेगा, 6 मिनट में दिल्ली से पहुंच जाएंगे मुंबई

China Test Hypersonic Engine: दुनियाभर में अभी तक ऐसा हाइपरसोनिक इंजन नहीं बना था. चीन द्वारा तैयार किए गए इस इंजन का नाम केरोसीन आधारित डेटोनेशन इंजन है.

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चीन लगातार हाइपरसोनिक इंजन के डेवलपमेंट पर काम कर रहा है. अब उसने एक ऐसे इंजन की टेस्टिंग की है जिसकी रफ्तार 11,113 किलोमीटर प्रतिघंटा है. ये रफ्तार इतनी तेज है कि आप सिर्फ 6 मिनट के अंदर दिल्ली से मुंबई पहुंच सकते हैं और घंटे में दिल्ली से मुंबई के 5 चक्कर लगा सकते हैं. चीन द्वारा टेस्ट किए गए इस हाइपरसोनिक इंजन की सबसे खास बात इसकी कम आवाज है. चीन का ये हाइपरसोनिक इंजन हाइड्रोजन फ्यूल पर नहीं बल्कि एविएशन केरोसीन पर चलता है. यही कारण है कि इसकी आवाज काफी कम हो जाती है और इससे इसकी गति को बढ़ाने में मदद मिलती है.

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दुनियाभर में अभी तक ऐसा हाइपरसोनिक इंजन नहीं बना था. चीन द्वारा तैयार किए गए इस इंजन का नाम केरोसीन आधारित डेटोनेशन इंजन है. इसके अलावा, वर्तमान में मौजूद टेक्नोलॉजी की मदद से अगर कोई भी फाइटर जेट को इस रफ्तार से उड़ाता तो वो ब्लास्ट कर जाता.

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अब सवाल उठता है ये इंजन किस प्रकार इतनी तेज स्पीड प्राप्त कर लेता है, तो इसका जवाब है कि ये विमान को तेजी से धक्का देने के लिए शॉकवेव्स की श्रृंखला तैयार करता है. फ्यूल के तेजी से बहने की वजह से ये सीरीज तैयार होती है और एक-एक कर विमान को आगे की ओर धक्का देती है. ये प्रक्रिया तेजी से चलती रहती है और स्पीड बढ़ती रहती है.

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चीन के इस हाइपरसोनिक इंजन को अमेरिकी स्क्रैमजेट इंजन का भी गुरु बताया जा रहा है. दरअसल, अमेरिका इस समय स्क्रैमजेट इंजन की तैयारी में लगा है जिसकी रफ्तार काफी ज्यादा हो सकती है लेकिन फिर भी वो चीन के इस हाइपरसोनिक रफ्तार से कम ही होगी.

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अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि चीन इस इंजन का इस्तेमाल कहां करेगा. हालांकि, एविएशन केरोसीन पर चलने वाले इस इंजन को फाइटर जेट में लगाना सही नहीं होगा. ऐसे में वो ब्लास्ट कर सकता है. अब चीन को तय करना है कि वो इसे रॉकेट के लिए इस्तेमाल करता है या मिसाइल सिस्टम के लिए या फिर किसी और प्रोजेक्ट के लिए.

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चीन ने दुनिया की सबसे बड़ी शॉक टनल में अपने इस हाइपरसोनिक इंजन की टेस्टिंग की है. इस टेस्टिंग के दौरान इंजन की अधिकतम रफ्तार 11,113 किलोमीटर प्रतिघंटा दर्ज की गई.

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