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Sawan 2019: सावन में बाबा महाकाल के दर्शन से मिलता है महालाभ, जानें क्या है भस्मारती का महत्व

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भस्म आरती केवल पुरुष ही देखते हैं. जिन पुरुषों ने बिना सीला हुआ कपड़ा पहना हो वही भस्म आरती से पहले भगवान शिव को को जल चढ़ाकर छू कर दर्शन कर सकते हैं.

Sawan 2019: सावन में बाबा महाकाल के दर्शन से मिलता है महालाभ, जानें क्या है भस्मारती का महत्व
महाकाल मंदिर की अनादी काल से उत्तपत्ति मानी गई है. (फाइल फोटो)

उज्जैनः देशभर के बारह ज्योतिर्लिंगों में 'महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग' का अपना एक अलग महत्व है. महाकाल मंदिर दक्षिण मुखी होने से भी इस मंदिर का अधिक महत्व है. महाकाल मंदिर विश्व का एक मात्र ऐसा शिव मंदिर है जहां दक्षिणमुखी शिवलिंग प्रतिष्ठापित है. यह स्वयंभू शिवलिंग है. जो बहुत जाग्रत है. इसी कारण केवल यहां तड़के 4 बजे भस्म आरती करने का विधान है. यह प्रचलित मान्यता थी कि शमशान की ताजी चिता की भस्म से आरती की जाती थी, लेकिन वर्तमान में गाय के गोबर से बने कंडो की भस्म से आरती की जाती है. एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भस्म आरती केवल पुरुष ही देखते हैं. जिन पुरुषों ने बिना सिला हुआ कपड़ा पहना हो वही भस्म आरती से पहले भगवान शिव को को जल चढ़ाकर छू कर दर्शन कर सकते हैं.

महाकाल के बारे में कहा जाता है कि यह पृथ्वी का एक मात्र मान्य शिवलिंग है. महाकाल की महिमा का वर्णन इस प्रकार से भी किया गया है कि आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग और पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है. महाकाल मंदिर की अनादी काल से उत्तपत्ति मानी गई है. मान्यता है कि महाकाल मंदिर में शिव लिंग स्वयंभू हैं. महाकाल को कालों का काल भी कहा जाता है. मान्यता है की भगवान महाकाल काल को हर लेते हैं. महाकाल मंदिर में सामान्यतह चार आरती होती है, जिसमें से अल सुबह होने वाली भस्म आरती के लिए श्रद्धालु दूर दूर से उज्जैन पंहुचते हैं. 

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महाकाल मंदिर में सभी हिन्दू त्यौहार सबसे पहले बनाने की परम्परा है और भगवान शिव का त्यौहार महाशिवरात्रि तो 9 दिन पहले ही शुरू हो जाता है. जिसको शिवनवरात्रि कहा जाता है. जिस तरह माता की नवरात्रि होती है उसी तरह बाबा महाकाल को भी नौ दिन तक अलग-अलग श्रृंगार से सजाया जाता है और आखिर में महा शिवरात्रि के दिन बाबा महाकाल को दुल्हे की तरह सजाया जाता है. साल भर में एक बार दिन में होने वाली भस्म आरती भी महा शिवरात्रि के दूसरे दिन होती है. जिसमे बड़ी संख्या में श्रद्धालु  सम्मलित होते हैं.

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मान्यता है कि उज्जैन शहर में एक ही राजा हो सकता है और वो राजा हैं महाकाल. दरअसल, परंपरा के अनुसार उज्जैन में कोई भी राजा रात नहीं रुक सकता है, ये किवंद्तिया है की कोई राजा रात रुकेगा तो उसकी मौत हो जायेगी. इस के चलते उज्जैन में मुख्यमंत्री भी रात नहीं गुजारते हैं. हालांकि ये मान्यता भी है कि अगर रात गुजराना ही पड़े ते शहर से 15 किमी बाहर गुजार सकते हैं. वहीं महाकाल से जुड़ी एक और कहानी है कि बारह साल में एक बार लगने वाले सिंहस्थ में जो भी सरकार के कार्यकाल में होता है वो सरकार अगले चुनाव में हार जाती है.

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महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति लगातार नए-नए कार्य कर रही है, जिसे लेकर कई बड़े पुरस्कार भी मंदिर समिति को मिल चुके हैं. जिसमें अभी अभी मिला स्वच्छ आइकोनिक अवॉर्ड जो की केंद्र सरकार ने दिया है शामिल है. इसके आलावा महाकाल मंदिर में हर साल आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए कई काम किए जा रहे हैं. शुद्ध पानी और वाटर एटीएम भी लगाया गया है. इसके आलावा दूर दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त में भोजन भी रखा गया है. जो कि श्रद्धालू अपने-अपने समय अनुसार ले सकते हैं.