चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नाम खुला पत्र

महामारी काफी बुरी थी और थोड़ी देर के लिए, कम से कम शुरुआत में तो दुनिया ने ये मान लिया था कि इसमें पूरी तरह से आपकी गलती नहीं थी.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नाम खुला पत्र

प्रिय राष्ट्रपति शी,

उम्मीद है कि आपकी तरफ से हमें उपहार में मिले जिस वायरस ने तबाही मचाई है, उससे आप सुरक्षित होंगे. आप इस बात की सराहना करेंगे कि इसके लिए धन्यवाद कहना कतई सही नहीं है और इसकी पेशकश भी नहीं की जाएगी. कहने के लिए काफी है कि जिस तरह की परेशानी में हम घिरे हैं, उससे निपटने के लिए हम अपनी तरफ से पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. ये सदी की सबसे भयानक स्थिति है और मैं ये बात भी जोड़ सकती हूं कि आपका रवैया इसमें बिल्कुल भी मदद नहीं कर रहा है.

महामारी काफी बुरी थी और थोड़ी देर के लिए, कम से कम शुरुआत में तो दुनिया ने ये मान लिया था कि इसमें पूरी तरह से आपकी गलती नहीं थी. लेकिन आपने इस खेल में ईमानदारी नहीं दिखाई. आप जानते हैं कि मेरा क्या मतलब है, और अब आप खुद खराब स्थिति में हैं. डियर सर, आपसे गुजारिश है कि अब समझदारी से खेलिए, वर्ना आप आउट हो जाएंगे.

अगर मैं ये सुझाव देने की गुस्ताखी कर सकूं तो आप पहला काम ये जरूर करें कि अपने सलाहकारों को हटने का आदेश दें. जाहिर है कि ये आदेश किसी बॉर्डर टाउन की तरफ जाने के लिए नहीं हो, जैसा कि आप पहले ही समझ चुके होंगे कि बदनीयती से उठाए गए कदमों का क्या हश्र होता है. आपके दरबारी आपको सच नहीं बता रहे हैं, इसका बारीकी से अनुमान भी नहीं लगा रहे हैं. वास्तव में इसका बिल्कुल उलटा हो रहा है. उन्होंने आपको ये यकीन दिला दिया है कि चीन, दुनिया के केंद्र में है और आपकी ख्वाहिश दुनिया की कमान अपने हाथ में रखने की है. मुझे डर है कि ऐसा न हो और पूरी शिद्दत से उम्मीद करूंगी कि ऐसा कभी न हो.

अपने पड़ोसी कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए WION में हमने फैसला किया कि आपको आपकी प्रोपैगेंडा दीवारों में आ रही दरारों के बारे में जानकारी दी जाए और झूठ-कपट के साथ टपक रही आपकी छत के बारे में आपको खबरदार किया जाए. पर लगता है कि हमारी सच्चाई और खरापन आपकी टीम को रास नहीं आया इसलिए उन्होंने अब हमें ब्लॉक कर दिया है. जब हमने हमारी सीमाओं में, हमारे फोन में, हमारे घरों में, यहां तक कि पड़ोसी सहनशीलता की भावना में दिवाली की सजावट में भी आपकी घुसपैठ का सामना किया, ऐसे में हमारे चैनल को आपके यहां ब्लॉक करना (रोकना) सबसे ज्यादा अशोभनीय और निर्लज्ज बात है. बहरहाल, सब खत्म नहीं हुआ है और आप भाग्यशाली हैं कि आप बुद्ध की भूमि के साथ कारोबार कर रहे हैं जहां लोगों को अपार धैर्य का आशीर्वाद मिला हुआ है.

फ्री स्पीच यानी बोलने की आजादी का मतलब
तो सबसे पहले मैं आपको फ्री स्पीच यानी बोलने की आजादी का मतलब समझाती हूं. झल्लाहट मत दिखाइए, ये आपके लिए नई बात हो सकती है और इसे समझने में कुछ समय लग सकता है, लेकिन एक बार जब आप ऐसा कर लेते हैं तो आपको खुद ही इसमें मजा आने लगेगा. बोलने की आजादी का सिद्धांत ये है कि हर इंसान, चाहे वो कम्युनिस्ट हो या कोई और, हान चाइनीज हो या उइगर चाइनीज, सबको ये कहने का अधिकार है कि वो क्या राय रखता है. ये अक्सर वो विचार हैं जिनसे आप बहुत ज्यादा वाकिफ नहीं होंगे या फिर आपके मामले में बहुत मुमकिन है कि आप इन विचारों के किसी भी निशान को मिटाना चाहेंगे. फ्री स्पीच के अपने फायदे हैं, जैसे हॉन्ग कॉन्ग में पानी की बौछार करना और सुरक्षा कानून बनाना बेकार है. और भी संभावनाओं की कल्पना कीजिए!

फ्री स्पीच की अवधारणा पर ही फ्री प्रेस काम करता है. ये आपको तथ्यों के आधार पर जानकारियां देता है, जो कि आपके सलाहकार नहीं बताएंगे. इसे रोकने से आपका और आपकी जनता का नुकसान है. आपने खुद को हां में हां मिलाने वाले लोगों के साथ एक कमरे में बंद कर लिया है. मैं सोचती हूं कि ऐसा अस्तित्व जिसमें उत्साह, भावना और तमाम विचार नहीं हैं, उसमें काफी निराशा हो सकती है. आपके झगड़ालूपन से ये निराशा साफ पता चलती है. तो इसमें सुधार करने का पहला संकेत ये है, जो कि हमारी आपसे लगातार उम्मीद भी है कि आपको WION को अनब्लॉक करना चाहिए.

राष्ट्रपति महोदय, आप दुनिया को ये दिखाना पसंद करते हैं कि आप प्राचीन ग्रंथों को पढ़ने के शौकीन हैं। क्योंकि आप ग्रीक, फ्रेंच, जर्मन और रूसी लेखकों की किताबें शेयर करते हैं, जिन्हें चीन में लोग कर्तव्यनिष्ठा से पसंद करते हैं! उत्तरी शांग्शी की पीली रेत वाली अनुपजाऊ जमीन पर काम करने वाले किशोर के रूप में, आप कथित तौर पर शेक्सपियर के सवाल 'हो, या नहीं हो' से प्रभावित थे. मैं आपसे गुजारिश करती हूं कि आप अपने आप से वो सवाल फिर से पूछें और इतिहास में दर्ज होने वाला ऐसा नेता नहीं बनने का संकल्प लें जिसने अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने और सत्ता और जमीन की भूख मिटाने के लिए अपने देश को बर्बाद कर दिया. मैं आपको भगवद्गीता पढ़ने की नसीहत देती हूं ताकि आपकी उस चीज को पाने की लालसा मिट सके जो आपकी है ही नहीं. आपको दुनिया के सबसे बड़े देश का नेतृत्व करने का जीवन में एक बार मिलने वाला मौका मिला था, लेकिन आपका लालच इसे छीन रहा है. 

मैं आपसे उम्मीद नहीं कर रही हूं कि आपको मेरी बात समझ आएगी, लेकिन आपको ये समझाने से मेरा कुछ बिगड़ेगा भी नहीं.

शुभचिंतक
पलकी शर्मा 
एग्जिक्यूटिव एडिटर 
WION (वर्ल्ड इज वन)

(डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखिका के निजी विचार हैं.)