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डियर जिंदगी: गंभीरता और स्‍नेह!

बच्‍चों के हृदय को जितना संभव हो स्‍नेह, प्रेम, आत्‍मीयता से भरा जाए. यही प्रेम मूल को ‘सूद’ के साथ लौटाकर लाएगा.

Feb 22, 2019, 08:35 AM IST

डियर जिंदगी: दर्द के सहयात्री!

दर्द से उबरना भी एक उपचार है. अगर सही तरह से दुख से बाहर नहीं निकला जाए तो यह ताउम्र अमरबेल की तरह हमारी आत्‍मा पर सवार रहता है.

Feb 21, 2019, 08:06 AM IST

डियर जिंदगी: अनुभव की खाई में गिरे हौसले!

अनुभव, जिंदगी का ऐसा तत्‍व है, जिस पर हमारा न्यूनतम नियंत्रण है. लेकिन इसके बाद भी हमने फैसलों की फ्रेंचाइजी उसे दी हुई है. 

Feb 20, 2019, 08:34 AM IST

डियर जिंदगी: बच्‍चे को 'न' कहना!

बच्‍चे जितने प्रेम, स्‍नेह से न सुनेंगे. उसे ग्रहण करेंगे, जीवन में संघर्ष की धूप का सामना भी उतनी ही आसानी से कर पाएंगे.

Feb 19, 2019, 08:55 AM IST

Dear Zindagi: जिंदगी का फूल संघर्ष की धूप के बिना नहीं खिलता

असुविधा, दुख, परेशानी जीवन का हिस्‍सा हैं. इनसे भागना संभव नहीं. जीवन इनके साथ है. इनके बिना नहीं. इसलिए, इनका हिस्‍सा बनकर जीना है. जिंदगी का फूल संघर्ष की धूप के बिना नहीं खिलता, इसे हमें बहुत अच्‍छी तरह समझना, बच्‍चों को समझाना है. इसके तनाव, निराशा के भाव से सहजता से निपटा जा सकता है!

Feb 18, 2019, 06:45 PM IST

डियर जिंदगी: प्रेम दृष्टिकोण है…

हम अपने जीवन को सुखद, सरल, सरस बनाना चाहते हैं, तो प्रेम को अपना स्‍वभाव बनाना होगा. उसको दूसरों के नजरिए, स्‍वभाव के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता!

Feb 18, 2019, 08:50 AM IST

डियर जिंदगी: बच्‍चों के बिना घर!

बच्‍चों के पढ़ाई के लिए बाहर जाते ही माता-पिता में खालीपन देखा जा रहा है. जैसे किसी ने उनकी मुस्‍कान गिरवी रख दी हो कि खुश रहना मना है.

Feb 15, 2019, 08:52 AM IST

डियर जिंदगी: रास्‍ता बुनना!

जिंदगी के प्रति थोड़ी कंजूसी भी जरूरी है, जिससे इसे दूसरों से नफरत, असहमति के नाम पर खर्च होने से बचाया जा सके!

Feb 14, 2019, 11:37 AM IST

डियर जिंदगी: ‘ कड़वे ’ की याद!

हम अपनी बहुत ‘छोटी’ दुनिया के अनुभव को जब बहुत बड़ी धरती पर लागू करने की कोशिश करते हैं, तो इससे हमारा दृष्टिकोण बहुत बाधित होता जाता है.

Feb 13, 2019, 09:47 AM IST

डियर जिंदगी: दुख को संभालना सीखिए. जिंदा रहिए!

बेटियां पराया धन होती हैं! उनके कन्‍यादान से कर्तव्‍य पूरा हुआ जैसे वाक्‍य जब तक समाज के विमर्श में रहेंगे, लड़कियों, शादीशुदा महिलाओं की आत्‍महत्‍या की दर को कम कर पाना आसान नहीं होगा. युवकों को असल में शिक्षित, आधुनिक नारी के अनुकूल बनाने का काम जब तक पूरा नहीं होगा, आत्‍महत्‍या को रोकना संभव नहीं होगा!

Feb 12, 2019, 12:35 PM IST

डियर जिंदगी: अरे! कितने बदल गए...

बच्‍चे बहुत तेज़ी से सीखते, समझते और नई चीज़ के लिए तैयार होते हैं. विडंबना यह है कि बड़े होते ही हम अपना ही सबसे अनमोल गुण बिसरा देते हैं.

Feb 12, 2019, 08:05 AM IST

डियर जिंदगी: सबकुछ ठीक होना!

संदेह, प्रेम की कमी से हम रिक्‍त, रूखे और कठोर होते जाते हैं. धीरे-धीरे यह हमारा स्‍थाई बनता जाता है. चित्‍त में जो भाव ठहर जाए, वह आसानी से नहीं बदलता.

Feb 11, 2019, 08:54 AM IST

डियर जिंदगी: दुख को संभालना!

हमने बेटियों की शिक्षा की ओर तो कदम बढ़ा दिया, लेकिन लड़के हमारे वैसे ही रह गए. उनका रवैया, नजरिया, सोच अभी भी सामंती है. पुरातन है. उसमें नई हवा के झोंके बहुत कम हैं!

Feb 8, 2019, 08:45 AM IST

डियर जिंदगी: अपने लिए जीना!

जिंदगी चलती हुई 'पटरियों' पर चलने का नाम नहीं है. समय के साथ नई पटरियां बिछाने, उन पर चलने का हौसला भी करना जरूरी है! 

Feb 7, 2019, 10:00 AM IST

डियर जिंदगी: प्रेम कीजिए, खूब कीजिए. लेकिन अपनी कीमत पर नहीं

प्रेम सहज, स्‍वाभाविक भावना है! लेकिन अगर इसमें पाइथागोरस प्रमेय की तरह दिमाग लगाया जाए, तो जिंदगी सुनामी की चपेट में आ जाती है. खतरों से सावधान करने वाली चेतावनी सुनाई ही नहीं देती!

Feb 6, 2019, 10:35 PM IST

डियर जिंदगी: प्रेम का रोग होना!

मैंने बहुत सोचा कि 'डियर जिंदगी' में इस कहानी को लिखा जाए, छोड़ दिया जाए. फिर तय किया कि कहना चाहिए, क्‍योंकि इस पर तंज अधिक कसे जाते हैं, बात सबसे कम होती हैं!

Feb 6, 2019, 08:51 AM IST

डियर जिंदगी: परिवर्तन से प्रेम!

बाहरी नहीं, भीतरी चुनौती हमें अक्‍सर डराती है. यह अपनों से ही मिलती है. ऐसे में सबसे जरूरी इरादों पर डटे रहना, हार नहीं मानना है. सपनों, परिवर्तन के प्रति आस्‍था ही असली पूंजी है!

Feb 5, 2019, 08:24 AM IST

डियर जिंदगी : रिटायरमेंट और अकेलापन!

आगरा, उत्‍तरप्रदेश से ‘डियर जिंदगी’ के बुजुर्ग ने भावुक अनुभव साझा किया है. इस संदेश में सवाल, सरोकार, चिंता के साथ अकेलेपन की पीड़ा शामिल है. सुरेश कुलश्रेष्‍ठ का अनुरोध है कि इसे इनके नाम, परिचय के साथ प्रकाशित किया जाए. सुरेश जी चाहते हैं कि जो उनके साथ हुआ उनके किसी हमउम्र के साथ न हो!

Feb 4, 2019, 09:42 AM IST

डियर जिंदगी: फैसला कौन करेगा!

इस बात को गंभीरता से समझने की जरूरत है कि जीवन किसका है. इस पर किसका अधिकार है! सपने किसके हैं, दायित्व किसका है और अंततः जिम्मेदारी किसकी!

Feb 1, 2019, 08:11 AM IST

डियर जिंदगी: बच्‍चों के साथ 'जंगल' की तरह व्‍यवहार करना है, 'सर्कस' की तरह नहीं

बच्‍चों को अपने जैसा नहीं बनाना. बात अजीब लग सकती है! बेतुकी लग सकती है. लेकिन जब हम एक पटरी पर चलने के अभ्‍यस्‍त हो जाते हैं तो अक्‍सर ऐसा ही होता है. माता-पिता का सबसे बड़ा संकट बच्‍चों पर नियंत्रण को लेकर है. हम बच्‍चों को आसमां में उड़ाने की बात तो करते हैं लेकिन ऐसा करते हुए उनकी दिशा पर अपना अधिकार रखते हैं! हम भूल जाते हैं कि बच्‍चे हमसे हैं, लेकिन हमारे लिए नहीं हैं!

Jan 31, 2019, 05:10 PM IST

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