Muharram Dishes List: इस्लाम में मुहर्रम के महीने को मज़हबी ऐतबार से काफी अहमियत दी गई है. मुस्लिम समुदाय के लोग खासकर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में, खास लजीज खाने बनाए जाते हैं. इन खानों को रिश्तेदारों और ज़रूरतमंदों को बांटा जाता है. आइये जानते हैं, वो कौन से खाने हैं और उनका इतिहास क्या है?
Ashura History in Islam: इस्लाम में 10 मुहर्रम यानी यौमे आशूरा को बेहद अहम दिन माना जाता है. मजहबी परंपराओं और इतिहासकारों के मुताबिक, इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई थीं. हजरत मूसा (अ.स.) की निजात से लेकर इमाम हुसैन की शहादत तक, कई वजहों से मुसलमान इस दिन खास इबादत करते हैं और रोजा रखते हैं. आइये जानते हैं वो इस्लामी घटनाक्रम?
Ashura Day Significance: मुहर्रम इस्लामी साल का पहला और बेहद मुकद्दस महीना माना जाता है. हदीसों में इसकी खास फजीलत बयान की गई है. रमजान के बाद मुहर्रम के रोजों को सबसे अफजल बताया गया है, जबकि यौमे आशूरा को रहमत, तौबा और इबादत का खास दिन माना जाता है. आइये कुरान और हदीस के नजरिये से समझते हैं कैसे?
Muharram and Youm-e-Ashura 2026: यौमे आशूरा यानी 10 मुहर्रम, इस्लाम के लिए बेहद अहम और पाक दिन माना जाता है. यह दिन हजरत मूसा अलैहिस्सलाम की नजात, इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत और रोजे की फजीलत से जुड़ा है. मुसलमान इसे इबादत, शुक्र, सब्र और इंसाफ के पैगाम के तौर पर याद करते हैं.
मई की भीषण गर्मी से तप रहे भारत में पश्चिम बंगाल के विवादित और भड़काऊ बयानों के लिए चर्चित नेता हुमायूं कबीर ने सियासत का तापमान और बढ़ा दिया है. उन्होंने ऐलान किया है कि आने वाली बकरा ईद पर मुसलमान सड़कों पर नमाज़ पढ़ेंगे.
Islamic Rules Regarding Qurbani Animals Skin: ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के बाद जानवरों की खाल मजहबी, सामाजिक और आर्थिक रूप से अहम मानी जाती है. उलेमा के मुताबिक खाल जरूरतमंदों और मदरसों को दी जा सकती है. इसको लेकर कुरान हदीस में साफ तौर जिक्र किया गया है.
Dhul Hijjah Dua: ज़ुल हिज्जा और बकरीद की इस्लाम में बहुत खास है. चांद नजर आते ही ज़ुल हिज्जा के पहले दस दिनों को बेहद मुबारक माना गया है. इन दिनों में "अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह और अलहम्दुलिल्लाह" पढ़ने की खास फजीलत बताई गई है. इस लेख में समझते हैं कि तकबीर, तहलील और तहमीद की फजीलत और कब तक अमल किया जाता है.
How Many Days Does Bakrid Qurbani Last: दुनिया जिंदगी की तरह ईद-उल-अजहा की कुर्बानी को लेकर भी इस्लाम में तय नियम मौजूद हैं. इससे मुसलमान में उहापोह की स्थिति नहीं होगी. कुर्बानी, ईदी की नमाज के बाद शुरू हो जाती है. उलेमा को लेकर कुर्बानी को लेकर अलग-अलग राय है, आइये समझते हैं कि कितने दिनों तक अल्लाह की रजा के लिए जानवर कुर्बाना कर सकते हैं?
Qurbani Meaning and History in Islam: ईद-उल-अजहा के मौके पर दुनिया भर के मुसलमान हज और कुर्बानी की रस्में अदा कर रहे हैं. यह पर्व हजरत इब्राहीम (अ.स.) और हजरत इस्माईल (अ.स.) की अल्लाह के प्रति आज्ञाकारिता, सब्र और समर्पण की याद दिलाता है, जहां असली अहमियत नीयत और परहेजगारी की होती है. अब सबकी निगाहें सरकार पर टिक हुई हैं
Namaz in Shift: सड़कों पर नमाज़ को लेकर भाजपा शासित राज्यों ने सख्ती कर दी है. ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतानवी दी जा रही है, और सड़कों पर नमाज़ के विकल्प के तौर पर मस्जिदों में शिफ्ट में नमाज़ अदा करने का सुझाव दिया जा रहा है. आइये जानते हैं कि क्या मस्जिदों में शिफ्ट में नमाज़ हो सकती है, और अगर हो सकती है, तो फिर इसमें टकराव के बिंदु क्या हैं?
Hajj Qurbani Sharing Rules: हज के दौरान आजमीन भी कुर्बानी की रस्म को अदा करते हैं. इस दौरान हर हाजी इस पाक रस्म में हिस्सा लेता है. इसको लेकर एक खास नियम तय किया गया है, जो जानवरों के किस्म पर आधारित होता है. इसका गोश्त पूरी दुनिया के गरीबों और जरुरतमंदों को पहुंचाया जाता है.
Arafat Day Significance in Hajj: मक्का में हज 2026 के दौरान लाखों हाजी वुकूफ-ए-अरफा के लिए मैदान-ए-अरफात में जमा हैं. यह हज का सबसे अहम रुक्न है, जो सब्र, बराबरी और इत्तेहाद का संदेश देता है. इसके बाद हाजी मुजदलिफा और मीना की ओर रवाना होंगे.
Makkah Qurbani Rules for Pilgrims and Meat Distribution: हर साल लाखों आजमीन दुनियाभर से हज के लिए मक्का पहुंचते हैं, इस दौरान हज की रस्में पूरी होने के बाद उनके नाम से एक जानवर की कुर्बानी दी जाती है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि लाखों जानवरों कुर्बानी, और उसका गोश्त क्या होता है? इस प्रक्रिया को कैसे पूरा किया जाता है, आइये जानते पूरा पैटर्न.
Prophet Muhammad Last Appeal to Muslims: 1400 साल पहले बकरीद के 9 ज़िलहज्ज, को सऊदी अरब के मक्का के अरफ़ात के मैदान में पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (स.) ने अपनी जिंदगी का आखिरी खुतबा (संबोधन) दिया था. इस खुतबे में पैगम्बर ने समानता, न्याय, समाजवाद, स्त्रीवाद समेत उन तमाम मुद्दों पर अपनी बात रखी थी, जो मुद्दे दुनिया में आज भी टकराव पैदा करते हैं. ये आखिरी खुतबा दुनिया के लिए एक manifesto था, जो हमेशा रिलेवेंट रहेगा, लेकिन अपने पैगम्बर की शिक्षाओं को खुद मुसलमानों ने ही भुला दिया.
Qurbani Kis Par Farz Hai: बकरीद की तैयारियां शुरू हो चुकी है. कई लोग कुर्बानी के जानवर खरीदने के लिए बाजारों का रूख कर रहे हैं. अक्सर लोग इस पसोपेश में हैं कि अगर एक घर में एक से ज्यादा लोग साहिबे-हैसियत हैं तो क्या सबका कुर्बानी करना जरुरी है. इस मसले को कुरान, हदीस और उलेमा की राय से समझते हैं.
Islamic Knowledge: इस्लाम के आखिरी पैगम्बर हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी ज़िन्दगी का आखिरी खुतबा(संबोधन) सऊदी अरब के आराफात के मैदान से दिया था, जहाँ दुनिया भर के मुसलमान हज करने जाते हैं. इस संबोधन में महिलाओं के लिए बराबरी, समाज से हर तरह के विभाजन और अत्याचार की बात कही गई थी, जिसे जानना हर मुसलमान और इंसान के लिए ज़रूरी है. आइये पढ़ते हैं.
Islamic Knowledge: रिज़्क में इज़ाफा हर कोई चाहता है. आखिर इस्लाम के हिसाब से वह कौनसे काम हैं जो आपके रिज्क में इजाफा करते है? आइये जानते हैं पूरी डिटेल
Islamic Knowledge: इस्लाम में तालीम हासिल करने को बहुत जरूरी बताया गया है. लेकिन जो शख्स इल्म हासिल करता है और उस इल्म पर अमल नहीं करता है वह बहुत घाटे में है.
Islamic Knowledge: इस्लाम हिदायत देता है कि अपने घर में हल्का-फुल्का और हंसी-खुशी का माहौल रखें. ऐसा न हो कि आपकी मौजूदगी से लोग डरने और चिढ़ने लगें.
Islamic Knowledge: इस्लाम में बताया गया है कि अगर आप शादी में इसलिए देर कर रहे हैं कि आपको बहुत खूबसूरत लड़की नहीं मिल रही है तो यह दुरुस्त नहीं है. जरूरी है कि आप नेक लड़की से शादी को तरजीह दें.
Islamic Knowledge: प्रोफेट मोहम्मद (स.) कुछ कामों से अल्लाह की पनाह मांगते थे. आज हम बताते हैं कि वह कौन से काम हैं, जिनसे अल्लाह के रसूर (स.) अल्लाह की पनाह मांगते थे.
Islamic Knowledge: किसी शख्स में कमियां ढूंढने वाले शख्स को इस्लाम में बहुत बुरा माना गया है. इस्लाम कहता है कि जब भी किसी की बुराई देखो उसे अकेले में जाकर बता दो ताकि वह उससे सीख ले.