Diwali 2025 Unique Tradition: क्या आपने कभी सुना है कि कहीं सब्जियों की भी शादी कराई जाती है. जी हां, भारत के ही एक राज्य में ये अनोखी परंपरा निभाई जाती है. चलिए समझते हैं क्या है इसके पीछे की कहानी.
Ghotul Unique Tradition-छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की बड़ी जनसंख्या निवास करती है. यहां आदिवासी समुदाय की कई तरह की परंपराएं हैं, इन्हीं में एक ऐसी परंपरा है जिसमें लड़के-लड़कियों को छूट होती है कि वह अपने पार्टनर यानी जीवनसाथी को चुन सकते हैं. इस अनोखी परंपरा का नाम घोटुल है. समय के साथ-साथ यह परंपरा कम हुई है, लेकिन अभी भी प्रचलित है. चलिए जानते हैं इस खास परंपरा के बारे में...
Raigarh News-रायगढ़ में मानकेश्वरी देवी मंदिर में 40 बकरों की बलि दी गई. मंदिर में बलि की यह परंपरा 500 सालों से चली आ रही है. वहीं बकरों की बलि देने के बाद बैगा ने खून पिया. बलि देने और खून पीने का वीडियो सामने आया है.
Bizarre Wedding Tradition: अभी तक आप शादियों में दहेज के नाम पर महंगे-महंगे तोहफे जैसे बाइक, फॉर्चूनर, ऑडी, कैश या सोने-चांदी के जेवरात देते हुए सुना या देखा होगा. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां के लोग दहेज में अपने दामाद को जहरीले सांप देते हैं. अगर लड़के के घर वाले इसे लेने से मना कर दे तो शादी टूट जाती है. आइए जानते हैं ये अजीबो-गरीब रिवाज आखिर होता कहां है.
surguja unique tradition-छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदायों कई परंपराएं देखने को मिलती हैं. इनमें से कई परंपराएं बड़ी ही अजब-गजब और दिलचस्प हैं. ऐसी ही एक परंपरा सरगुजा जिले में निभाई जाती है, जहां मांझी जनजाति के लोगों को बारातियों का स्वागत करने का अंदाज बड़ा निराला है. मांझी जनजाति के लोग सज-धज कर नहीं बल्कि कीचड़ में लोटकर करते हैं.
Holi 2024: अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार में बसा ऐसा गांव जहां होलिका दहन की ऐसी अनोखी और अटूट परंपरा चली आ रही है जिसे सुनकर आप यकीन ही नहीं कर पाएंगे , यहां के ग्रामीण होलिका दहन करने के बाद आग के शोलों पर चलते हैं. यह गांव दंतेवाड़ा और बस्तर ज़िले के शरहद में बसा एरपुंड गांव है जो अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार में बसा हुआ है इस कारण इस गांव को अबूझमाड़ का दक्षिण प्रवेश द्वार कहा जाता है. देखें वीडियो.
भारत विविधताओं का देश है यहां कई जाति और बोलियां बोली जाती है. सभी समाज की अपनी-अपनी अलग परंपरा है. इसी कड़ी में हम आपको आज छत्तीसगढ़ की कुछ ऐसी अनोखी परंपराओं (unique tradition) के बारे में बताने वाले हैं, जो शायद आपने कभी सुनी न होगी.
Hindu New Year 2023: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रतलाम (Ratlam) जिले में हिंदू नव वर्ष मनाने की अनूठी परंपरा है. यहां पर नए साल की शुरुआत नीम का शर्बत (Neem Sharbat) पिलाकर और तिलक लगाकर की जाती है. इस कड़वे शर्बत को लोग प्रसाद मानकर पीते हैं.
Udaipur News : राजस्थान में होली पर दीवाली मनाई जाती है. जी हां, आपने अब तक रंगों और पानी से होली का त्यौहार मनाते हुए लोगों को देखा, लेकिन क्या कभी बंदूको और तोप की गर्जना के बीच आतिशी के नजरों के साथ किसी को होली का त्यौहार मनाते नहीं देखा है तो, आइए हम आपको दिखाते हैं होली का एक ऐसा ही रंग जो उदयपुर के मेनार गांव में देखने को मिलता है. रियासत काल से चली आ रही या परंपरा आज भी मेनारिया ब्राह्मण समाज के लोग बदस्तूर निभा रहे हैं. यहां लोग होली पर रंग नहीं लगाते, बल्कि तोपों ओर बंदूकों से गोलियां चलाते हैं. लोग जमकर नाचते-गाते हैं. जश्न का यह सिलसिला सारी रात चलता है. देखिए ये वीडियो-
Unique Tradition: रतलाम से 30 किलोमीटर दूर एक कचलाना में स्थित भैरव मंदिर (Bhairav Mandir Kachalana Ratlam) में अनूठी परंपरा निभाई जाती है. यहां मन्नत पूरी होने के बाद लोग 25 के घंभे पर ऊपर उल्टा अनोखे तरीके से परिक्रमा (Parikrama By Hanging On Pillar) करते हैं. जानिए क्या है मान्यता
Bhinmal News: जालोर के भीनमाल में होली के दूसरे दिन यानि धुलंडी के दिन परंपरागत घोटा गैर खेल का आयोजन होता है. बता दें कि यहां बुधवार को धुलंडी मनाई गई.
Rajasthan Unique Holi: राजस्थान के इस गांव में तोप, तलवार, बारूद, बंदूक से होली खेली जाती है. यह परंपरा ये लोग पिछले 450 सालों पुरानी है. जानें क्यों मनाते हैं ये अनोखी धुलंडी.
Jaipur: होली के अपने-अपने रंग हैं, लेकिन जयपुर के चौमूं शहर की होली भी काफी खास होती है, इसे खास बनाती है 189 सालों से चल रही एक अनोखी परंपरा. आपको बता दें कि घास-फूस से बने पुतले को अर्थी पर सुलाकर शव यात्रा निकाली जाती है.मोरीजा रोड चौराहे पर घांस फूस से बने पुतले का अंतिम संस्कार किया जाता है.
Holi 2023: होली और होलिका दहन (Holika Dahan) को लेकर हमारे देश में कई मान्यताएं और परंपराएं है. ऐसी ही एक परंपरा (Unique Tradition) निभाई जाती है मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में आने वाले सिरोंज (Sironj Vidisha) में. जहां बंदूक की गोली से आग जलाकर होलिका दहन (List Holi With Gunshots) की जाती है.
Dungarpur Unique Holi : डूंगरपुर जिले में होली की अनूठी परम्पराए, कही दहकते अंगारो पर चलते है लोग तो वही खूनी की होली खेली जाती है. होली पर अलग-अलग परम्पराओं का निर्वहन सदियों से लोग करते आ रहे है. गाँव मे मान्यता है कि होलिका दहन से बाद दहकते अंगारों पर चहलकदमी करने से गाँव पर कोई विपदा नहीं आती और गांववासियों का स्वस्थ्य भी ठीक रहता है. देशभर में यही एकमात्र क्षेत्र है जहां बरसाने की लट्ठमार होली से भी खतरनाक पत्थरमार होली खेली जाती है. होली पर्व पर रंगों के स्थान पर पत्थर बरसा कर खून बहाने को भी शगुन मानने का अनोखा आयोजन होता है,
Dungarpur Unique Holi : डूंगरपुर जिले में होली की अनूठी परम्पराए, कही दहकते अंगारो पर चलते है लोग तो वही खूनी की होली खेली जाती है. होली पर अलग-अलग परम्पराओं का निर्वहन सदियों से लोग करते आ रहे है. गाँव मे मान्यता है कि होलिका दहन से बाद दहकते अंगारों पर चहलकदमी करने से गाँव पर कोई विपदा नहीं आती और गांववासियों का स्वस्थ्य भी ठीक रहता है .
Unique Wedding Tradition: आपने बारातियों के स्वागत (welcome processions) के कई तरीके देखे और सुने होंगे. शादियों में लोग अपनी हैसियत के अनुसार, पैसे खर्च कर आयोजन का सबसे बेस्ट पार्ट इसी को बनाते हैं. लेकिन, क्या आपको पता है छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) में एक ऐसी जगह हैं जहां लड़की के भाई कीचड़ में लेटकर (buffalo mud dance) बारातियों का स्वागत करते हैं. आइए जानते हैं कौन सी है वो जगह और क्या है मांझी सामाज (manjhi tribe) की ये परंपरा...
Unique tradition: भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां सदियों से कई अनोखी परंपराओं का निर्वहन होता आ रहा है. आज हम आपको एक ऐसी ही परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं जो चाहल गोत्र के लोग लंबे समय से निभाते आ रहे हैं. चाहल गोत्र जाट समाज से आता है.
Unique Tradition ofi New Year Celebration: कहते हैं वक्त किसी के लिए रुकता नहीं है, पूरी दुनिया साल 2022 को अलविदा कह नए साल का स्वागत कर चुकी है. हर कोई नई उमंग और उत्साह के साथ नए साल का स्वागत करना चाहता है. मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के कई देश ऐसे भी हैं जहां नया साल मनाने के अपने-अपने अजीबोगरीब तरीके हैं.
Bundi: घास भैरू की सवारी दीपावली के बाद निकाली जाती है. इस पुरानी परंपरा के अनुसार बूंदी जिले के देई, बड़ोदिया, ठीकरदा, नैनवा कस्बे में सामाजिक एकता का प्रतीक घास भैरू महोत्सव मनाया गया.
डूंगरपुर के बिछीवाडा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत छापी में गांव में गोवर्धन पूजा के दिन अनूठी परम्परा का निर्वहन किया गया.
उज्जैन से करीब 60 से 70 किलामीटर की दूरी पर स्थित बड़नगर तहसील के ग्राम भिडावद में गोवर्धन पूजन पर्व पर अनूठी आस्था देखने को मिली. गांव में सुबह गायों का पूजन किया गया, पूजन के बाद लोग जमीन पर लेट गए और उनके ऊपर से गाय दौड़ाई गईं. मान्यता है की ऐसा करने से मन्नतें पूरी होती है. यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है.