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अमेरिका-ईरान में तनातनी, मीटिंग में ट्रंप बोले- 'बताइए इन्हें कैसे सबक सिखाया जाए'

विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ईरान के खिलाफ कठोर नीतियों की वकालत की. हालांकि व्हाइट हाउस खुफिया समिति के अध्यक्ष एडम शिफ ने कहा, ‘राष्ट्रपति निश्चित रूप से बात सुन रहे थे "जब बैठक में कांग्रेस के नेताओं ने उनसे सतर्क रहने और पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और ना बढ़ाने का आग्रह किया.’

अमेरिका-ईरान में तनातनी, मीटिंग में ट्रंप बोले- 'बताइए इन्हें कैसे सबक सिखाया जाए'
ईरान से नाराज हैं डोनाल्ड ट्रंप.

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को ईरान के अमेरिकी निगरानी सैन्य ड्रोन को गिराने के बाद व्हाइट हाउस में शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की बैठक बुला सभी विकल्पों पर चर्चा की. ट्रम्प ने पहले इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था ‘ईरान ने एक बड़ी गलती कर दी है.’ इसपर पर जवाबी कार्रवाई क्या होगी के सवाल पर ट्रम्प ने कहा था, ‘आप को पता चल जाएगा.' ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा, ‘अगर आप सच जानना चाहते हैं, तो मुझे यह यकीन नहीं हो रहा कि यह इरादतन किया गया.’

नेताओं ने तनाव कम करने की अपील
कैपिटोल हिल में नेताओं ने तनाव को बढ़ाने से बचने की अपील की और कुछ सांसदों ने कहा कि व्हाइट हाउस को कोई भी कदम उठाने से पहले कांग्रेस से विचार-विमर्श करना चाहिए.

तनावपूर्ण हालात को और ना बढ़ाएं
विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ईरान के खिलाफ कठोर नीतियों की वकालत की. हालांकि व्हाइट हाउस खुफिया समिति के अध्यक्ष एडम शिफ ने कहा, ‘राष्ट्रपति निश्चित रूप से बात सुन रहे थे "जब बैठक में कांग्रेस के नेताओं ने उनसे सतर्क रहने और पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और ना बढ़ाने का आग्रह किया.’

'प्रशासन तयशुदा प्रक्रिया में जुटा है'
स्पीकर नैन्सी पैलोसी ने कहा कि एक घंटे से अधिक चली बैठक में अमेरिका की जवाबी कार्रवाई के लिए कोई उचित विकल्प नहीं निकल पाया.

सीनेट के प्रमुख नेता मिच मैककोनेल ने कहा, ‘मैं कहूंगा कि प्रशासन तयशुदा प्रक्रिया में जुटा है.’ विदेशी मामलों पर हाउस रिपब्लिकन, खुफिया और सशस्त्र सेवा समितियों ने भी इसी शब्द का इस्तेमाल करते हुए गुरुवार देर रात एक बयान में कहा, ‘इस कार्रवाई पर निर्धारित प्रतिक्रिया होनी चाहिए.’

गौरतलब है कि ईरान ने दावा किया है कि उसने उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन होने पर अमेरिकी सैन्य निगरानी ड्रोन को गिराया. वहीं अमेरिका का कहना है कि उसका ड्रोन अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में था. अमेरिका के ओमान की खाड़ी में टैंकरों पर हुए हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराने के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव जारी है.