अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुका पाकिस्तान, आतंकी संगठनों के खिलाफ लाया ये नया कानून

पाकिस्तान ने भारत के साथ तनाव घटाने के लिए जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर समेत आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है. 

अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुका पाकिस्तान, आतंकी संगठनों के खिलाफ लाया ये नया कानून
फाइल फोटो

इस्लामाबाद: पाक सरजमीं से अपनी गतिविधियां चला रहे आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने और उनके वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पड़ रहे दबाव के बीच पाकिस्तान ने व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को लागू करने के लिए सोमवार को एक कानून की उद्घोषणा की. यह कदम जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादी हमले के बाद भारत के साथ तनाव के बीच में उठाया गया है. पुलवामा में 14 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गये थे.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आतंकवादी घोषित किये गये व्यक्तियों एवं संगठनों पर कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ने के बीच भारत ने उसे जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कदम उठाने के लिए एक डोजियर सौंपा था. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार ने पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (धन-संपत्ति पर रोक और जब्ती) आदेश 2019 जारी किया.

बयान में कहा, ‘‘यूएनएसी (धन-संपत्ति पर रोक और जब्ती) आदेश, 2019 का उद्देश्य (आतंकवादी) घोषित व्यक्तियों और संगठनों के विरूद्ध सुरक्षा परिषद प्रतिबंधों को लागू करने की प्रक्रिया को सुचारू बनाना है.’’ रविवार को सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा था कि सरकार ने पहले भी जैश-ए-मोहम्मद समेत प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ कदम उठाये हैं और उनके खिलाफ कोई भी भावी कार्रवाई राष्ट्रीय कार्ययोजना तथा वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के संबंध में पाकिस्तान के वादों के आलोक में होगी.

हालांकि, एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने बताया कि पाकिस्तान ने भारत के साथ तनाव घटाने के लिए जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर समेत आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कार्रवाई शीघ्र ही किसी भी समय होने की संभावना है. डॉन अखबार ने भी सोमवार को खबर दी कि देश में चरमपंथी और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई आसन्न है. नये कानून से पाकिस्तान को प्रतिबंधित संगठनों और व्यक्तियों की संपत्तियों को जब्त कर और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

अमेरिका ने पिछले महीने पाकिस्तान से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा नामित आतंकवादी संगठनों एवं उनके नेताओं के पैसों और अन्य वित्तीय संपत्तियों पर अविलंब रोक लगाने को कहा था. पाकिस्तान पर पेरिस स्थित वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) भी आतंकवाद के वित्तपोषण को बंद करने के अपने वादो को पूरा करने का दबाव डाल रहा है. एफएटीएफ ने पिछले साल जून में पाकिस्तान को अपनी निगरानी सूची में डाल दिया था ताकि वह आतंकवपादी संगठनों को मदद देने बंद कर करे.

(इनपुट भाषा से)