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श्रीलंका: ईस्टर पर हुए बम विस्फोटों के बाद सरकार में लौटे दो मुस्लिम मंत्री

नौ मंत्रियों के साथ, अल्पसंख्यक समुदाय के दो प्रांतीय गवर्नरों ने भी तीन जून को इस्तीफा दे दिया था.

श्रीलंका: ईस्टर पर हुए बम विस्फोटों के बाद सरकार में लौटे दो मुस्लिम मंत्री
देश की 2.1 करोड़ आबादी में नौ प्रतिशत मुस्लिम हैं.

नई दिल्ली: श्रीलंका में ईस्टर पर हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के बाद देश में बढ़ती अल्पसंख्यक विरोधी भावनाओं के मद्देनजर इस्तीफा देने वाले नौ मुस्लिम मंत्रियों में से दो बुधवार को सरकार में लौट आए. देश में बौद्ध धर्म के प्रमुख धर्मगुरु ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की गुजारिश की थी.

कबीर हाशिम और एएचएम हलीम को राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने मंत्री पद की शपथ दिलाई. इससे एक दिन पहले अपने रूख पर फिर से विचार करने के लिए मुस्लिम मंत्रियों की बैठक बिना किसी नतीजे पर पहुंचे खत्म हो गई थी. हाशिम और हलीम, दोनों, प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे की यूनाइटिड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के हैं. बहरहाल, अभी यह साफ नहीं है कि क्या मुख्य मुस्लिम पार्टी, श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस के मंत्री सरकार में लौटेंगे? 

नौ मंत्रियों के साथ, अल्पसंख्यक समुदाय के दो प्रांतीय गवर्नरों ने भी तीन जून को इस्तीफा दे दिया था. यह इस्तीफा इसलिए दिए गए थे ताकि श्रीलंका की सरकार एक इस्लामी चरमपंथी समूह के साथ उनमें से कुछ के संबंधों के आरोपों की जांच कर सके. इस समूह को ईस्टर के मौके पर आतंकी हमले करने के लिए दोषी ठहराया जा रहा है. इस हमले में 11 भारतीयों में समेत 258 लोगों की मौत हो गई थी और करीब500 अन्य जख्मी हो गए थे.

उन्होंने अपने समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार की अक्षमता का भी विरोध किया था. देश की 2.1 करोड़ आबादी में नौ प्रतिशत मुस्लिम हैं. मुसलमानों की मिल्कियत वाली संपत्तियों और कारोबारों पर भीड़ ने हमले किए जबकि मुस्लिम मंत्रियों ने आरोप लगाया कि कई मौकों पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग मनमानी गिरफ्तारियों का सामना करते हैं.

एक कैबिनेट मंत्री और दो प्रांतीय गवर्नरों पर नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) के प्रायोजन करने का आरोप है. इसी संगठन को हमले के लिए दोषी ठहराया जाता है. इस बीच, संसदीय जांच समिति को पूर्वी कतनकुडी इलाके के मुस्लिम उलेमा (धर्मगुरु) ने बताया कि उन्होंने 2017 में राजनीतिक नेतृत्व को कट्टरपंथी इस्लाम के बारे में चेताया था.

मौलवी सहलान ने संसदीय प्रवर समिति (पीएससी) को बताया कि कतनकुडी के सूफी इस्लामी नेताओं ने राष्ट्रपति दफ्तर, प्रधानमंत्री कार्यालय, ऑटॉर्नी जनरल विभाग तथा पुलिस प्रमुख को बढ़ती कट्टरता के बारे में सूचित किया था. उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित एनटीजे के सरगना जहरान हाशिम ने उनसे 2016 में क्रिसमस नहीं मनाने के लिए कहा था.