BJP का मंदिर मार्ग, दीदी को राम- राम

बंगाल में जिस तुष्टिकरण की सियासी फसल 30 साल तक कांग्रेस ने काटी ...फिर वामपंथियों ने 34 साल तक राष्ट्रवाद के विचार पर मट्ठा डाला और आखिर के 10 साल तक ममता बनर्जी भी मां, माटी, मानुष का लेक्चर देती रहीं लेकिन काम घनघोर तुष्टिकरण का ही करती रहीं .

Written by - Rajendra Kumar | Last Updated : Dec 21, 2020, 08:09 AM IST
  • मंदिर मार्ग से बीजेपी लाएगी परिवर्तन
  • बंगाल में तुष्टीकरण की राजनीति खत्म होगी
  • बीजेपी का राष्ट्रवाद बंगाल में ‘सुपरहिट’
BJP का मंदिर मार्ग, दीदी को राम- राम

कोलकाता: बंगाल में अगले साल की शुरूआत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bengal Election) में दीदी का किला ढहाने के लिए बीजेपी ने मंदिर मार्ग अपनाया है। बंगाल के दौरे में अमित शाह (Amit Shah) ने कोलकाता (Kolkata) से बोलपुर तक मंदिर दर्शन किए. बीजेपी बंगाल में तुष्टीकरण की राजनीति का जवाब मंदिर मार्ग से देना चाहती है.

शाह ने मेदिनीपुर और बोलपुर में जो ट्रेलर दिखाया उसकी पिक्चर का अनुमान लगाकर ही तृणमूल के होश फाख्ता हैं. दो दिन में शाह के दो रोड शो में जो जनसैलाब दिखा वो इशारा करता है कि दीदी के लिए अगला चुनाव बेहद कठिन और मुश्किल भरा हो सकता है.

बंगाल में जिस तुष्टिकरण की सियासी फसल 30 साल तक कांग्रेस (Congress Party) ने काटी ...फिर वामपंथियों ने 34 साल तक राष्ट्रवाद (Nationalism) के विचार पर मट्ठा डाला और आखिर के 10 साल तक ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) भी मां, माटी, मानुष का लेक्चर देती रहीं लेकिन काम घनघोर तुष्टिकरण का ही करती रहीं .  बीजेपी ने तुष्टिकरण की इसी राजनीति पर सीधा हल्ला बोला है सवाल ये है कि क्या तुष्टिकरण की राजनीति से देश का भला होने वाला है?

क्या एक खास तबके को वोटबैंक की राजनीति के लिए साधना दूसरे के साथ घनघोर अन्याय नहीं है...

बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति के दिन लद गए-

बीजेपी ने बंगाली मानुष से वादा किया है कि अब ये अत्याचार खत्म होगा और बंगाल में तुष्टीकरण की राजनीति पर भी ताला लगेगा. राजनीति के लिए बंग को भंग करने वालों का 2021 में घमंड टूटेगा और मोदी-शाह की अगुवाई में जिन्ना वाली सोच को बंगाल से उखाड़ फेंका जाएगा. अब बंगाल में राष्ट्रवाद फिर आबाद होगा क्योंकि मोदी और शाह के मिशन बंगाल की बुनियाद ही प्रखर राष्ट्रवाद की पुनरस्थापना है. बीजेपी बंगाल में अपनी सियासी जमीन राष्ट्रवाद के उन्हीं चेहरों के इर्द गिर्द खड़ी कर रही है जिन्हें सियासी नफा नुकसान के चक्कर में भुला दिया गया था

बंगाल में शाह की हुंकार, गली- गली में जय श्रीराम 

मेदिनीपुर में जब शाह ने जय श्रीराम (Jai shri Ram) का नारा लगाया तो चारों ओर जय श्री राम गूंजने लगा . 34 साल तक कम्युनिस्टों का गढ़ रहे मेदिनीपुर में जय श्री राम का उद्घोष सुनकर बीजेपी के हौसले सातवें आसमान पर हैं. बोलपुर की गलियों में भी नजारा कुछ ऐसा ही था. शाह के रोड शो से उत्साहित भीड़ जय श्रीराम के नारे लगा रही थी. जिस गढ़ में तीन साल पहले तक भगवा झंडा लगाने की कोई सोच नहीं सकता था आज वो पूरा इलाका भगवा के रंग में रंगा दिखा. अपने गढ़ में भगवा झंडे देखकर दीदी गुस्से से लाल हैं और लाल सलाम ठोंकने वाले तो ऐसे गायब हो गए हैं जैसे गधे के सिर से सींग.

टीएमसी की तुष्टीकरण वाली राजनीति पर शाह का हल्लाबोल इतना तगड़ा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही उनकी सरकार की चूलें हिल गई हैं.

बंगाल में फिर जागेगा राष्ट्रवाद

बीजेपी बंगाल में राष्ट्रवाद की अलख जगाकर बंगाली वोटर को अपने पाले में करने की पुरजोर कोशिश कर रही है. अमित शाह ने अपने दो दिन के दौरे पर पूरा जोर इसी बात पर लगाया कि कैसे बंगाली समुदाय को उसकी अस्मिता की याद दिलाई जाए और उसे ये बताया जाए कि बंगाली अस्मिता को अगर कोई पार्टी सबसे बेहतर तरीके से स्थापित कर सकती है वो सिर्फ और सिर्फ बीजेपी है. बंगाल में ‘अबकी बार 200 पार’ का मिशन राष्ट्रवाद के जरिए बीजेपी पूरा करना चाहती है.

अमित शाह ने अपने दो दिन के दौरे में बंगाल के उन महान विभूतियों को नमन किया जिन्होंने देश में राष्ट्रवाद की अलख जगाई थी. उन्होंने शांति निकेतन के विश्वभारती विश्वविद्यालय में गुरूदेव रवींद्र नाथ टैगोर को नमन किया. मिदनापुर में क्रांतिकारी खुदीराम बोस की जन्मस्थली में गए . 

बेलुर मठ में स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand) को याद किया .रामकृष्ण मिशन में महान समाज सुधारक रामकृष्ण परमहंस को भी याद किया साथ में दक्षिणेश्वर मंदिर में मां काली की पूजा भी की. शाह ने अपने दूसरे दिन की शुरूआत विश्वभारती विश्वविद्यालय से की जहां शांति निकेतन में एक घंटे से ज्यादा रूके. इस दौरान कलाकारों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किया. शांति निकेतन में शाह ने कहा कि गुरुदेव ऐसी शख्सियत थे जो आजादी के आंदोलन के दौरान राष्ट्रवाद की एक धारा के प्रमुख थे जबकि दूसरी धारा के प्रमुख बापू थे. उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी की कामना है कि एक बार फिर गरुदेव के आदर्शों को दुनियाभर में मान्यता मिले.

राम कृष्ण परमहंस और उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद बंगाली राष्ट्रवाद और अस्मिता के सबसे बड़े प्रतीक हैं. लिहाजा मिशन बंगाल पर जब शाह पहुंचे तो दोनों के दर पर जाना नहीं भूले. बंगाली समाज में रामकृष्ण परमहंस और उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद को भगवान की तरह पूजा जाता है. शाह ने कहा कि अफसोस है कि तुष्टीकरण की राजनीति में दोनों महापुरूषों को भुला दिया गया .

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मंदिर मार्ग से बीजेपी की बंगाल विजय

कोलकाता का दक्षिणेश्वर काली मंदिर बंगाली समुदाय की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है. गृहमंत्री अमित शाह ने यहां मां काली का आशीर्वाद लिया. यही वो मंदिर है जहां रामकृष्ण परमहंस मुख्य पुजारी थे और बंगाली समाज में घर कर गईं तमाम कुरीतियों पर उन्होंने कुठाराघात किया.

विधवा विवाह शुरू कराया और बाल विवाह के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया. अपने दौरे के दूसरे दिन बोलपुर में शाह हनुमान मंदिर पहुंचे और बजरंगबली का आशीर्वाद लिया जबकि बोलपुर में बाउल गायक के घर भोजन करने से पहले शाह ने शिव मंदिर में जलाभिषेक किया. बंगाल में दो दिन के दौरे में शाह की शक्ति पूजा और भक्ति ने विरोधियों को साफ संदेश दिया है कि बंग की जंग में मंदिर मार्ग से ही बीजेपी फतह हासिल करेगी. 

दरअसल ये वही बंगाल है जहां दीदी वोटबैंक के लिए संप्रदाय विशेष पर ममता बरसाती रहीं लेकिन सनातन संस्कृति पर चोट भी करती रहीं. तो क्या बंगाल इस बार शाह के साथ जयश्रीराम बोलेगा और दीदी को राम- राम कह देगा. फिलहाल तो हवाओं का रूख बदला हुआ है और मोदी का मिशन बंगाल पूरा होता दिखाई पड़ रहा है.

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