• कोरोना वायरस पर नवीनतम जानकारी: भारत में संक्रमण के सक्रिय मामले- 6,28,747 और अबतक कुल केस- 21,53,010: स्त्रोत PIB
  • कोरोना वायरस से ठीक / अस्पताल से छुट्टी / देशांतर मामले: 14,80,884 जबकि मरने वाले मरीजों की संख्या 43,379 पहुंची: स्त्रोत PIB
  • कोविड-19 की रिकवरी दर 68.32% से बेहतर होकर 68.78% पहुंची; पिछले 24 घंटे में 53,878 मरीज ठीक हुए
  • सरकार ने 500 करोड़ का आवंटन आत्म निर्भर अभियान के तहत मधुमक्खी पालन बढ़ाने के लिए किया
  • शहद का उत्पादन 242% बढ़ा और निर्यात 265% बढ़ा
  • 115 जिलों में एमएसएमई पदचिह्न बढ़ाने के लिए पहल
  • ₹50 करोड़ तक का सेक्टर निवेश और MSME की नई परिभाषा में 250 करोड़ तक का कारोबार
  • ₹50 करोड़ तक का सेक्टर निवेश और MSME की नई परिभाषा में 250 करोड़ तक का कारोबार
  • यह डिजिटल और आउटडोर इंस्टॉलेशन से सुसज्जित है, जो स्वछता पर जानकारी और शिक्षा प्रदान करता है
  • अगले पांच वर्षों में पीएलआई योजना के तहत ₹11.5 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन और इसके पुर्जे तैयार किए जाएंगे

सुशांत की मौत या 'हाई प्रोफाइल मर्डर'? 'हत्या' में बॉलीवुड माफिया और राजनीतिक कनेक्शन!

आपने अक्सर टीवी के क्राइम शो में देखा होगा कि कुछ मर्डर मिस्ट्री को इस कदर उलझा दिया जाता है, जिसे सुलझाना लगभग असंभव सा लगने लगता है. लेकिन एक लूप होल से बड़े से बड़े हाई प्रोफाइल मर्डर के गुनहगारों की असलियत सामने आ ही जाती है. सुशांत सिंह राजपूत के केस ने भी कुछ ऐसा ही मोड़ ले लिया है. जिसमें राजनीति और बॉलीवुड के गुंडों का कनेक्शन सामने आ रहा है..

सुशांत की मौत या 'हाई प्रोफाइल मर्डर'? 'हत्या' में बॉलीवुड माफिया और राजनीतिक कनेक्शन!

सुशांत सिंह राजपूत की मौत एक 'हाई प्रोफाइल मर्डर' है, ये राज़ सभी जानते हैं. लेकिन इसके पीछे कौन है इसकी परतें खुलनी अब शुरू हुई हैं. इस पूरे मामले की उलझी हुई गुत्थी को देखकर ये समझ आने लगा है कि एक हाई प्रोफाइल मर्डर कैसा हो सकता है, क्योंकि सोशल मीडिया पर कई तरह की खबरों का बाजार गर्म हैं. 

'मर्डर' में सियासी और बॉलीवुड कनेक्शन!

चूकि जांच नहीं हुई है, डेढ़ महीने से अधिक का वक्त बीत जाने के बाद भी जांच को खिलवाड़ बनाने का सिलसिला चलता रहा और कोई पुख्ता सबूत नहीं है. जिस मुंबई पुलिस को सबूत जुटाने चाहिए थे, उसने सबूतों का ही पोस्टमार्टम कर दिया. सवाल को ये है कि क्या सबूत को बर्बाद करके पुलिस ने कातिलों को ही सुरक्षा दे दी?

इस मामले में बॉलीवुड पर राज करने वाले सबसे दबंग परिवार और महाराष्ट्र की टॉप पॉलिटिकल फैमिली के चश्मोचिराग का नाम आ रहा है. सोशल मीडिया पर क्या आरोप सामने आ रहे हैं? इसकी एक झलक हम आपको दिखा देते हैं.

मुंबई पुलिस पर किसने बनाया भारी दबाव?

आप ज़रा सोचिए कि इस मामले की जांच में खिलवाड़ आखिरकार किसके कहने पर किया जा रहा है. वो पुलिस जो सबूत जुटाने का काम करती है, आखिर किसके आदेश पर सबूतों के साथ खेल रही है और सबूतों की धज्जियां उड़ा रही है. आखिर महाराष्ट्र के किस बड़े राजनेता का मुंबई पुलिस पर दबाव है?

एक 'हाई प्रोफाइल मर्डर' कहे जाने वाले इस केस पर आखिर मुंबई पुलिस क्यों पर्दा डाल रही है. इसके पीछे के बहुत बड़े रहस्य से पर्दा उठने वाला है. क्योंकि ये किसी से नहीं छिपा है कि पुलिस और अधिकारी सिर्फ और सिर्फ सरकार की कठपुतली बनकर काम करते हैं. पुलिस तो सिर्फ एक टूल है जिसे चलाने का असल काम सरकार करती है. तो क्या मुख्यमंत्री के आदेश पर मुंबई पुलिस अपने कर्तव्यों से पीछे हट रही है?

मुंबई पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है, आखिर किस दबाव के चलते सुशांत के मामले में पुलिस इस केस को जबरदस्ती सुसाइड करार देना चाहती है. बिहार पुलिस के अधिकारियों के साथ मुंबई पुलिस का रवैया, वो भी तब जब बिहार पुलिस उन जानकारी को जुटाकर बड़े खुलासे करने लगी, जिसे मुंबई पुलिस ने जानबूझकर अनदेखा कर दिया. किसी एक राज्य की पुलिस, दूसरे राज्य की पुलिस के साथ कभी ऐसा व्यवहार नहीं कर सकती. मतलब साफ है क्या महाराष्ट्र के नेता किसी बहुत बड़े नाम को छिपा रहे हैं, जो उनका खास है और सुशांत के हत्या का पूरा राज़ जानता है?

सरकार की बागडोर किसके हाथ में है?

हर किसी को याद होगा कि महाराष्ट्र चुनाव के बाद कैसे शिवसेना ने भाजपा की पीठ पर छुरा घोंपा और जनाब उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे का राजतिलक कराने की चाहत रखने लगे, लेकिन बात नहीं बनी को जनाब उद्धव को सीएम की कुर्सी मिल गई, कहने के लिए तो महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे हैं, लेकिन सरकार की बागडोर उनके 'पुत्र' आदित्य ठाकरे के ही हाथ में हैं.

वैसे तो जनाब आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं, सुशांत के मौत से ठीक एक दिन पहले उनका जन्मदिन भी था.

खास बात तो ये है कि आदित्य ठाकरे हाल के दिनों में अचानक से ऐसी बैठकें की है, जो उनके क्षेत्राधिकार से बाहर थी. मतलब वो सरकार की बागडोर को अपने हाथों में लिये हुए हैं, 

क्या रिया के 'फरारी' में मुंबई पुलिस का हाथ?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिया चक्रवर्ती के खिलाफ समन जारी कर दिया है. बिहार पुलिस कई घंटों से रिया और उसके भाई शोविक चक्रवर्ती से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अचानक से रिया सोशल मीडिया पर अपना रोना-रोते हुए एक वीडियो शेयर कर देती है. लेकिन वो कहां फरार हो गई इसका पता नहीं देती है. यदि रिया का इस माजरे से कोई भी ताल्लुक नहीं है, तो वो 'बिल' में छिपकर क्यों बैठी है?

आखिर कौन सा राज खुलने का डर उसे और उसके भाई को फरारी काटने पर मजबूर कर दिया है. सवाल तो मुंबई पुलिस को लेकर भी है कि जब मुंबई पुलिस केस पर सुसाइड का ठप्पा लगाकर रिया को जांच के लिए बुलाती है तो वो दौड़ी चली आती है. लेकिन जब बिहार पुलिस उससे पूछताछ करना चाहती है तो वो बिल में छिप जाती है. तो क्या उसे बिल में छिपाने की प्लानिंग मुंबई पुलिस ने की है? ये सवाल इसलिए क्योंकि मुंबई पुलिस वैसे भी बिहार पुलिस की जांच में खुलकर रोड़े अटका रही है.

कंगना के घर पर चली गोली का ठाकरे कनेक्शन

सुशांत को इंसाफ दिलाने के लिए आवाज बुलंद करने वाली कंगना रनौत के घर के बाहर गोली चल गई. उन्होंने हाल ही में करण जौहर को लेकर सीएम उद्धव ठाकरे और उनके परिवार पर सवाल उठाया था.

इस घटना के बाद कंगना ने आरोप लगाया है कि उनको डराने के लिए गोलियां चलाई गईं, ये करतूत उनकी है, जिन्हें उनके ‘गुंडागर्दी’ के लिए जाना जाता है. साथ ही कंगना ने ये भी दावा किया कि एक मुख्यमंत्री के खिलाफ उनकी टिप्पणी ने राजनीतिक समूह को परेशान कर दिया होगा. कंगना ने तो ये तक कह दिया है कि ‘मेरे घर के पास विदेशी हथियार से चलाई गोली, फिर भी नहीं डरूंगी’

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मुंबई पुलिस ने पहले ही दिन से सुशांत के केस को सुसाइड करार दे दिया. या यूं कहे कि पुलिस ने अपने राजनीतिक आकाओं के आदेश पर अनजान हत्यारो को बचाने के लिए जल्द से जल्द इस केस को रफा-दफा करने का फरमान जारी कर दिया, तभी तो सबूतों को ताक पर रखकर मुंबई पुलिस सिर्फ एक ही मकसद से इस हाई प्रोफाइल मर्डर को सुसाइड करार देने पर तुल गई.

बॉलीवुड और राजनीति का चोला ओढ़कर भले ही सुशांत के हत्यारे अपनी गुनाहों को पावर का इस्तेमाल करके फिलहाल छिपा रहे हैं. लेकिन उनके जुर्म का हिसाब जरूर होगा. पूरा देश एकजुट हो गया है, सबूत और जांच के अभाव में सुशांत सिंह राजपूत को इंसाफ दिलाने के लिए मुहिम चलाने वाला ज़ी हिन्दुस्तान उन कातिलों की करतूत पर मुहर नहीं लगा सकता है, लेकिन हम आपको ये भरोसा जरूर दिला सकते हैं कि सच सामने आने तक हम निडरता के साथ सच्ची पत्रकारिता का फर्ज निभाते हुए अपनी कलम चलाते रहेंगे.

आयुष सिन्हा

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