विधानसभा चुनाव से पहले यह जदयू नेता थाम सकते हैं भाजपा का दामन !

जदयू के पुराने नेताओं की पार्टी से नाराजगी एक चिंता का विषय है. जदयू आलाकमान इससे विधानसभा चुनाव से पहले जरूर निपटना चाहेगी. लेकिन क्या पार्टी से बगावती तेवर दिखाने वाले जदयू नेता अजय आलोक तब तक भाजपा में शामिल हो जाएंगे ? रविवार को पटना में जो हुआ, उसे देखकर तो यहीं लगता है.  

विधानसभा चुनाव से पहले यह जदयू नेता थाम सकते हैं भाजपा का दामन !

पटना: लोकसभा चुनाव के दौरान अपने बागी तेवर से अपनी ही पार्टी जदयू के निशाने पर आ गए अजय आलोक ने उस वक्त पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद भी अपने तेवर से कोई समझौता नहीं किया और जदयू की खामियों पर टीका-टिप्पणी करते रहे. कभी राजनीति में एंट्री करते ही जदयू के उपाध्यक्ष बन बैठे प्रशांत किशोर पर तो कभी पार्टी के बहुतेरे नेताओं को आड़े हाथों लेते रहे. ऐसे में लोग यह मानने लगे थे कि अजय आलोक की नजदीकी जदयू में रहते हुए भी भाजपा से अधिक है. शायद यही कारण है कि अब जदयू पूर्व प्रवक्ता बिहार में भाजपा का दामन थाम सकते हैं.

भाजपा से अजय आलोक की बढ़ती नजदीकी

दरअसल, लंबे समय से चल रही इन कयासों पर अब भी कोई मुहर नहीं लगी है, लेकिन हाल की गतिविधियों को देख यह अंदाजा जरूर लगाया जा रहा है कि अजय आलोक को अब जदयू से कुछ खास मतलब नहीं रह गया है. रविवार को जदयू नेता भाजपा के केंद्रीय राज्यमंत्री नित्यानंद राय के साथ पुस्तक विमोचन के एक कार्यक्रम में साथ दिखे. इस दौरान वे काफी सहज लग रहे थे. पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के अलावा इस कार्यक्रम में सूबे के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल भी थे. मौका था पटना के ज्ञान भवन में अमित शाह और लिखे पुस्तक के विमोचन का. इसमें जदयू से एकमात्र नेता अजय आलोक ही थे.

जब प्रशांत किशोर से उलझ गए अजय आलोक

पिछले कुछ दिनों से जदयू नेता अपनी ही सरकार की खूब आलोचना करते आ रहे हैं. महाराष्ट्र में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे से जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर की मुलाकात के बाद उन्होंने जमकर हमला बोला था.

उन्होंने बकायदा ट्वीट कर प्रशांत किशोर के ऊपर व्यंग्य के बाण छोड़े. अजय आलोक ने जदयू उपाध्यक्ष को मातर साहब और राजनीतिक स्ट्रैटजिस्ट तक कहा. महाराष्ट्र में सरकार बदलने के पीछे प्रशांत किशोर के बहलावे को जिम्मेदार ठहराया और इस पर खूब बरसे भी. इसके अलावा पार्टी के अन्य नेताओं पर भी समय-समय पर टिप्पणियां करते ही रहे हैं. अब जदयू के कार्यक्रमों से ज्यादा भाजपा नेताओं के साथ ज्यादा दोस्ताना बनाये जाने के बाद इन बात पर जोर दिया जा रहा है कि अजय आलोक जदयू छोड़ भाजपा में शामिल हो सकते हैं. आगामी विधानसभा चुनाव के पहले यह शायद संभव हो.

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और भी कई नेता हैं जदयू प्रमुख से नाराज

हालांकि, जदयू से नाराज चल रहे या यूं कहें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उखड़े नेताओं में सिर्फ यहीं एक नाम नहीं है. अजय आलोक के अलावा जदयू नेता आरसीपी सिंह भी अपनी अलग ही राह बनाने में लगे हुए हैं. कभी सीएम नीतीश कुमार के करीबियों में से भी सबसे ऊपर माने जाने वाले आरसीपी सिंह की भाजपा से नजदीकी बढ़ने लगी है. खासकर एनडीए सरकार में केंद्रीय कैबिनेट में जदयू की भागीदारी को के कर. तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने दो करीबियों आरसीपी और लल्लन सिंह में से किसी एक को भी कैबिनेट में न भेज कर केंद्रीय कैबिनेट में जदयू की भागीदारी से ही कन्नी काट लिटा था. उसी वक्त से आरसीपी का भरोसा जदयू प्रमुख आए उठ गया था.