गांधी परिवार को खुश करने के लिए हर मर्यादा तोड़ने को तैयार अलका लांबा

कांग्रेस पार्टी की एक नई नवेली नेता अलका लांबा ने राहुल गांधी, कांग्रेस और गांधी परिवार को खुश करने के लिए अमेठी में राहुल को पटखनी देने वाली नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को गालियों से नवाजा है. उन्होंने अपनी इस बोली से नीचता की सारी हदें तोड़ दी है.

गांधी परिवार को खुश करने के लिए हर मर्यादा तोड़ने को तैयार अलका लांबा

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी की पूर्व नेता और विधायक, कांग्रेस नेता अलका लांबा की जुबान कैची की धार से भी तेज चलने को उतारू हो गई है. मैडम अलका ने महिला होकर भी, एक महिला को ऐसी गाली से नवाजा है. जिसे सुनकर भी किसी व्यक्ति को शर्म आ जाए.

ये गाली और ये बोली, वाह रे कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी की नई नवेली नेता मैडम अलका लांबा ने एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने अपने जीवन के कुछ सुनहरे शब्दों का इस्तेमाल करके एक महिला मंत्री को गाली से नवाजा है. लांबा ने अपने ट्वीट में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के लिए गाली का इस्तेमाल कर दिया.

कांग्रेस नेता अलका लांबा ने केंद्रीय मंत्री की फोटो पर लिखा है कि 'यहां भी इसका "सास - बहू" का नाटक चालू है, संसद भी इसको थिएटर लगता है, डायलॉग बाजी कर, थोड़ा रोना धोना कर, यह सोचती है कि एक मंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों और जवाबदेही से यह बच निकालेगी.
#NihalChand #Chinmayanand #Nithyananda #Senger पर चुप्पी रखने वाली दोगली महिला, शर्म कर.'

ट्वीट देखें-

शब्दों पर जरा गौर फरमाइयेगा, क्योंकि ये मैडम अलका लांबा ने लिखा है. जो नई दिल्ली से विधायक हुआ करती थीं, आम आदमी पार्टी की नेता थी. इनकी ऐसी ही करतूतों से जब इन्हें पार्टी ने नजरअंदाज करना शुरू कर दिया, तो मैडम लांबा को बुरा लग गया. वो आम आदमी पार्टी के खिलाफ ही झंडा बुलंद करने लगी. बगावती तेवर इस कदर सिर चढ़कर बोलने लगा कि इन्होंने AAP को टाटा-बाय-बाय कर दिया. और मैडम सोनिया की पार्टी कांग्रेस से नाता जोड़ लिया.

मैडम को खुश करना चाहती हैं 'मैडम'?

ये कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस की पहचान का सबसे बड़ा जरिया गांधी परिवार है. ऐसे में जो गांधी परिवार का करीबी है, वो राजनीतिक अखाड़े में बैठकर खूब मलाई खा रहा है, मजे कर रहा है. उसे बड़ी जिम्मेदारियां मिली हैं. कांग्रेस की सबसे बड़ी दुश्मन भाजपा है. जिसने उसे सत्ता से इतना दूर खदेड़ दिया है कि उसे वापस लौटना एक ख्वाब की तरह लगने लगा है. ऐसे में कांग्रेस परिवार खासकर मैडम सोनिया की करीबी बनने की ख्वाहिश लेकर मैडम अलका ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने भाजपा सरकार की महिला मंत्री को निशाना बनाया और गालियों से नवाज कर वो अपनी चापलूसी करने की कोशिश में जुट गईं.

हंगामा है क्यों बरपा?

दरअसल, शुक्रवार को संसद के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन था. BJP ने राहुल गांधी समेत कांग्रेस सांसदों के रेप कैपिटल और रेप इन इंडिया जैसे विवादित बयानों को लेकर जमकर हंगामा किया. भाजपा सांसदों ने राहुल पर हमला बोलते हुए उनसे अपने विवावित बयानों को लेकर मांगी मांगने को कहा. आरोप लगने लगें कि राहुल गांधी ने देश की महिलाओं का अपमान किया है. वहीं स्मृति ईरानी ने भी कहा कि राहुल ने अपने बयान से ऐसा संदेश दिया है कि भारतीय महिलाओं का रेप होना चाहिए. स्मृति ईरानी ने हमला करते हुए ये तक कह दिया कि राहुल को सांसद रहने का हक नहीं है. गांधी परिवार के बेटे ने रेप का आह्वान किया है.

राहुल गांधी ने कहा है कि वो अपने 'रेप इन इंडिया' वाले बयान पर माफी नहीं मांगेंगे. इसपर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, कि देश को सोचना पड़ेगा. कि ऐसे नेता को कब तक सहा जाएगा. स्मृति ने ये भी बोला कि राहुल गांधी देश का ऐसा कोई विषय नहीं है. जिसे वो बिना कागज देखे पढ़ सकें. स्मृति ईरानी ने कहा कि 'जब देश की संसद में रेप इन इंडिया वाले बयान पर हंगामा हो रहा था. तब वो मुस्कुरा रहे थे. इसी से उनकी संवेदनशीलता समझी जा सकता है.'

ऐसे हंगामे के बीच राहुल गांधी की बेईज्जती होता देख, कांग्रेस की नई 'चापलूस' नेता मैडम लांबा से देखा नहीं गया. उन्होंने सोचा कि चलो एक वार कर देते हैं. लेकिन उनके इस वार में उन्होंने गाली को अपना हथियार चुना. अलका लांबा ने 'दोगली' शब्द का इस्तेमाल कर अपनी घटिया मानसिकता का बड़ा उदाहरण पेश कर दिया है.

ऐसे में अलका लांबा के लिए कुछ सवाल उठने वाजिब हैं.

1). स्मृति ईरानी को गाली देकर गांधी परिवार को मख्खन लगाना चाहती हैं अलका लांबा?
2). चापलूसी करके कांग्रेस पार्टी की कितनी खास बनना चाहती हैं अलका लांबा?
3). खुद एक महिला होकर महिलाओं को 'दोगली' बोलने में लांबा को शर्म नहीं आई?

'आप' से रूठकर ठामा था 'हाथ'

अलका लांबा अपनी ही पार्टी AAP से कई अलग-अलग मुद्दों पर भिड़ती रहती थी. अपने बागी तेवर के चलते उनका कद पार्टी में घटने लगा था. लांबा ने पार्टी और सीएम केजरीवाल से 2019 लोकसभा चुनाव में हार की जवाबदेही मांगी थी, जिसके बाद उनकी भद्द पिटने लगी. उनका पार्टी में रहना, ना रहने के बराबर ही था. क्योंकि उन्हें AAP सदस्यों के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप से हट दिया गया था. जब कोई चारा नहीं बचा तो उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामकर अपनी सियासत की दुकान चलाने का फैसला कर लिया.

सदन में राहुल गांधी को खरी-खोटी सुनाई जा रही थी तो, अलका लांबा को ये बात कांटे की तरह चुभने लगी. वो आगे आईं और स्मृति के लिए ट्विटर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करके गाली और बेहूदी बोली जैसी टिप्पणी कर दी. लांबा के इस बयान पर बखेड़ा खड़ा होना तय है.

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