Farmer Protest: किसानों के बीच शैतान! अराजक गैंग का पूरा सच

किसान आंदोलन में अराजक गैंग के दखल से पूरा देश आहत है. किसानों के वेश में शैतानों ने नीचता की सारी सीमाएं लांघ दी. जिस ज़ी हिन्दुस्तान ने अन्नदाताओं की आवाज बुलंद की, उसी ज़ी हिन्दुस्तान की महिला रिपोर्टर्स को किसानों के बीच छिपे वहशी भेड़ियों ने अश्लील शब्दों से नवाज़ा और बदसलूकी की सारी हदें पार कर दी..

Written by - Ayush Sinha | Last Updated : Dec 26, 2020, 09:36 PM IST
  • हम तो मानते रहे 'अन्नदाता भगवान'
  • किसानों के बीच निकलते रहे 'शैतान'
  • कैमरे के पीछे से आंदोलन का कच्चा-चिट्ठा
Farmer Protest: किसानों के बीच शैतान! अराजक गैंग का पूरा सच

नई दिल्ली: किसानों की आड़ में शैतानों की असलियत का खुलासा हो चुका है. ज़ी हिन्दुस्तान ने उन सभी बदतमीजों को बेनकाब कर दिया है, जिसने आंदोलन को हाईजैक करके महिलाओं पर भद्दी-भद्दी टिप्पणियां की. किसान आंदोलन का वो चेहरा जिसे देखकर हर कोई सिहर उठेगा, किसान आंदोलन का वो चेहरा जो हर किसी को अंदर तक झकझोर देगा.

महिलाओं के साथ शैतानों ने की अभद्रता

ज़ी हिन्दुस्तान ने किसानों की आवाज को सड़क से उठा कर सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, ज़ी हिन्दुस्तान ने किसानों की आवाज बुलंद करने के लिए अपना माइक किसानों के हाथ में देने का साहस दिखाया, ज़ी हिन्दुस्तान ने किसानों को रिपोर्टर बना दिया, ज़ी हिन्दुस्तान ने अन्नदाता को भगवान कहा, उन्हें बेहिसाब सम्मान दिया. लेकिन 31 दिन की कवरेज के बाद आज ये सच आखिर सामने आ ही गया कि किसानों के बीच शैतान भी घुसे हुए हैं. जिन किसानों की आवाज ज़ी हिन्दुस्तान ने उठाई उन्होंने हमारी महिला सहयोगियों के साथ अश्लीलता और बदसलूकी की. आज सबूतों के साथ किसानों के बीच घुसे ऐसे शैतानों का कच्चा-चिट्ठा सामने आ चुका है.

कैमरे के आगे और माइक के सामने ये लोग जी हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते रहें और कैमरा बंद होते ही हमारे रिपोर्टर्स को भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं. गोदी के चमचे कहा गया. आप इस वीडियो को देखिए और खुद ही समझिए कि किसानों के आंदोलन में छिपे ये शैतान कैसे महिला रिपोर्टर्स के साथ बदसलूकी की.

ज़ी हिन्दुस्तान की पत्रकार प्रिया सिंह के साथ किसानों के वेश में शैतानों ने कैसे बदसलूकी की ये आपने उपर दिए VIDEO में देख लिया होगा. लेकिन ये बदतमीजी सिर्फ प्रिया के साथ ही नहीं हुई, बल्कि ज़ी हिन्दुस्तान के एक-एक पत्रकारों को शैतानों ने निशाना बनाने की कोशिश की.

हमारी महिला पत्रकार श्वेता भट्टाचार्या के साथ तो इन शैतानों ने इतनी शर्मनाक बातें की जिसे बताना भी मुनासिब नहीं होगा. कोई भला इतनी नीच हरकत कैसे कर सकता है? क्या उनके घरों में मां-बहनें नहीं हैं? क्या उनको शर्म नहीं आती? हमारी महिला पत्रकार रीतिका माहेश्वरी के साथ भी बदसलूकी की गई, मल्लिका मल्होत्रा के साथ भी इन शैतानों ने गिरी हुई हरकतें की.

इसके साथ ही लक्ष्मी उपाध्याय के साथ बदसलूकी की. इन शैतानों ने हमारी महिला पत्रकार दीपिका यादव से साथ बदतमीजी की. जिन किसानों के साथ ज़ी हिन्दुस्तान डटा रहा और उनकी आवाज को सरकार के कानों तक पहुंचाई, उसी किसान आंदोलन में छिपे 'भेड़ियों' ने महिलाओं के साथ गिरी हुई हरकतें की, उन्हें गंदी नजरों से ना सिर्फ देखा बल्कि 'कपड़े खींचने' जैसी टिप्पणियां की. और भी गिरी हुई भाषा का प्रयोग किया, जो सिर्फ और सिर्फ एक शैतान ही कर सकता है.

जिस लोकतंत्र ने किसानों को आंदोलन का अधिकार दिया है उसी ने लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले मीडिया को भी आंदोलन की हकीकत समूचे देश के लोगों तक पहुंचाने का हक दिया है. फिर एक महिला रिपोर्टर को गुंडों की तरह घेरकर उसके साथ बदसलूकी क्यों की जा रही है.

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सिर्फ महिला रिपोर्टर्स ही नहीं बल्कि पुरुष पत्रकारों के साथ भी हाथापाई की गई. ज़ी हिन्दुस्तान के पत्रकार हितेन विठलानी को भी किसान के वेश में छिपे गुंडों ने शिकार बनाने की कोशिश की, उन्हें गालियां दी. भला ये कैसा आंदोलन है? जहां खुले तौर पर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है. एक गुंडे ने तो ये तक कह दिया कि "तुम्हारे चैनल का नाम ही गलत है. संविधान में कहीं भी दिखा दो कहां हिन्दुस्तान लिखा है, अगर तुम्हारा नाम हिन्दुस्तान है, तो खालिस्तान में क्या प्रॉब्लम है."

इन लोगों को सचमुच शर्म नहीं आती है. तभी तो ज़ी हिन्दुस्तान ने पहले भी आपको बताया था कि कैसे किसानों के आंदोलन को खालिस्तानियों ने हाईजैक कर लिया है. यहां छिपे खालिस्तानियों ने देश विरोधी हरकतें भी की, जिसके कई सबूत भी सामने आ चुके हैं.

हमारे पत्रकार रमन ममगांई के साथ गुंडागर्दी की गई. उन्हें खुले तौर पर धमकियां दी गई, इसके अलावा ज़ी हिन्दुस्तान के पत्रकार अक्षय विनोद शुक्ल के साथ मारपीट करने की कोशिश की गई. अक्षय ने किसानों को साफ-साफ शब्दों में ये समझाने की कोशिश की और अपील करते हुए कहा कि महिला से बदतमीजी ना करो. जिन किसानों के आंदोलन में ज़ी हिन्दुस्तान कंधे से कंधे मिलाकर खड़ा रहा, उसी आंदोलन के शैतानों ने हमें बिकाऊ कहा, जिसका जवाब भी अक्षय ने दिया और पूछा कि आप कैसे खरीदे हुए चैनल कह रहे हैं? हम तीस दिन से आपकी बात रख रहे हैं, आप से पहले से हम यहां खड़े हैं. इतने में ही कुछ गुंडों ने कहा कि मारो-मारो.. अक्षय ने फिर से अपील की और कहा कि आप मारपीट की बात मत करिये भैया.. लेकिन ये किसान के रूप में छिपे गुंडे हैं, भेड़िये हैं, शैतान हैं.. जिन्हें सिर्फ और सिर्फ बवाल करने और बदसलूकी करने ही आता है.

देश के जवानों और किसानों के हक की बात, देशहित और अपनी मिट्टी की मर्यादा की बात, सच्चाई और निष्पक्षता की बात, यही हमारा राष्ट्रवाद है. ज़ी हिन्दुस्तान पिछले 31 दिन में आंदोलन स्थल पर जमीनी हकीकत देखी, उसके दम पर ज़ी हिन्दुस्तान ताल ठोक कर कह रहा है कि इस किसान आंदोलन में किसान कम है और बाहर से घुस आए शैतान ज्यादा हैं.

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हम अन्नदाता कहते रहे, वो अपमान करते रहे, हमने माइक दी, उनको रिपोर्टर बनाया और उन्होंने नीचता की सारी हदें पार कर दी, हम आवाज बने वो आवाज दबाते के लिए गुंडई करते रहे. खुद को किसान कहने वाले कुछ शैतानों ने कैमरे के सामने तो ज़ी हिन्दुस्तान हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए, लेकिन कैमरे के पीछे उन्होंने बदसलूकी और बदतमीजी को अपना हथियार बना लिया. ये किसान आंदोलन में छिपे शैतानों की असलियत है. जिसे देखकर हर किसी की जुबान से एक ही शब्द निकलेगा, 'लानत है'.

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