जरा याद करो कुर्बानी: पुलवामा में शहादत का एक साल आज हुआ पूरा

दुर्भाग्यपूर्ण पुलवामा हमले की पहली बरसी है आज. आज इस घटना के ही स्थल पर होगा शहीद स्मारक का उद्घाटन जिसके साथ सभी अमर बलिदानियों को याद किया जाएगा.  

जरा याद करो कुर्बानी: पुलवामा में शहादत का एक साल आज हुआ पूरा

नई दिल्ली. आज के दिन ही पिछले साल पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुआ था एक ज़ोरदार आतंकी हमला.  इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे.इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने भारतीय सेना को एक बड़ी सीख दी है. अब सतर्कता उनके दैनिक जीवन का अविभाज्य अंग बन चुका है. अब सेना अपनी आवाजाही के दौरान अधिक सतर्क हो गई है.  चालीस जवानों के के सर्वोच्च बलिदान ने देश के राष्ट्र के शत्रुओं के खात्मे का सेना का संकल्प और भी दृढ कर दिया है.

लेथेपोरा में होगा स्मारक का उद्घाटन 

पुलवामा हमले की बरसी पर आज लेथेपोरा में इस हमले के शहीदों की याद में बनाए गए स्मारक का उद्घाटन किया जाएगा. हार्दिक आभार जताते हुए  देश की सुरक्षा के लिए जान गंवाने वाले इन वीर सपूतों को याद किया जाएगा. स्मारक में सीआरपीएफ का ध्येय वाक्य ‘सेवा और निष्ठा'  के साथ बलिदानी जवानों के नामों के साथ ही उनकी तस्वीरें भी होंगी.

हुआ था आत्मघाती बम धमाका 

साल था 2019 याने पिछले साल और महीना यही था फरवरी का. जिस समय देश और दुनिया में वैलेंटाइन्स डे मनाया जा रहा था, लेथेपोरा में सीआरपीएफ के ये जवान देशरक्षा की अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद थे. और तभी हुआ था उन पर आतंकी हमला जिसने सारे देश को दहला दिया था. इस आत्मघाती बम धमाके में शहीद हुए थे सीआरपीएफ के 40 जवान. यद्यपि बाद में अलग-अलग अभियानों के दौरान इस हमले के साजिशकर्ताओं को मार गिराया गया था. 

 

आयोजित किया जाएगा सम्मान समारोह 

सीआरपीएफ के विशेष महानिदेशक जुल्फिकार हसन, महानिरीक्षक कश्मीर क्षेत्र राजेश कुमार और वरिष्ठ अधिकारी तथा  सुरक्षा बल के जवान लेथेपोरा स्थित सीआरपीएफ प्रशिक्षण केंद्र में पुलवामा में बलिदान हुए सेनानियों को श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे. जुल्फिकार हसन ने बताया कि यह एक सम्मान समारोह होगा जिसके अंतर्गत एक शहीद स्तंभ का अनावरण किया जाएगा जो कि पुलवामा हमले में बलिदान सीआरपीएफ के जवानों के नाम पर होगा. एक रक्तदान शिविर भी इस अवसर पर ही लेथेपोरा में आयोजित किया जाएगा.

बलिदानियों के परिजन नहीं आमंत्रित हैं 

बलिदानियों के परिजनों को आमंत्रित नहीं करने का कारण बताते हुए जुल्फिकार हसन ने कहा कि उनके घरों में भी बरसी आदि कार्यक्रम होंगे जिसे ध्यान में रख कर ये फैसला करना पड़ा है.

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