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...तो क्या हवाई यात्रा से फैला कोरोना? 24 मार्च से सभी घरेलू उड़ानों पर रोक

अगर आप फ्लाइट से अपने घर/गांव जाने के बारे में सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी जानकारी है. 24 मार्च यानी मंगलवार की रात से देश में सभी हवाई उड़ानों पर रोक लगा दी गई है. आपको इस खास रिपोर्ट के जरिए समझाते हैं कि कोरोना को फैलाने में हवाई यात्रा की क्या भूमिका है.

...तो क्या हवाई यात्रा से फैला कोरोना? 24 मार्च से सभी घरेलू उड़ानों पर रोक

नई दिल्ली: चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस का कहर अब 165 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले चुका है. एक देश से दूसरे देश तक पांव पसारते जा रहे कोरोना की महामारी से पूरी दुनिया दहशत में है. इस बीच देश में अब सभी प्रकार की हवाई यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

24 मार्च से भारत में हवाई यात्रा पर रोक

भारत सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए देश में अब सभी घरेलू उड़ानों को रद्द कर दिया गया है. 24 मार्च रात 12 बजे के बाद किसी प्रकार की हवाई यात्रा नहीं होगी. जानकारी के अनुसार सभी एयलाइंस को मंगलवार रात 12 बजे से पहले आखिरी लैंडिंग का आदेश दिया गया है. ऐसे में आपको हम बताते हैं कि कोरोना वायरस को फैलाने में हवाई यात्रा की क्या भूमिका रही.

ग्लोबलाइजेशन से फैला कोरोना वायरस!

सवाल ये है कि जिस ग्लोबलाइलेजशन की वजह से पूरी दुनिया एक हुई है, क्या उसी ग्लोबलाइलेजशन ने कोरोना को भी देश-देश तक पहुंचा दिया है. आज अधिकतर देशों के बीच हवाई उड़ानों का लंबा-चौड़ा नेटवर्क है यानी एक देश से दूसरे देश तक पहुंचना चुटकी का खेल बन गया है.

गौर करने वाली बात ये है कि आज जिन मुल्कों में कोरोना का कहर सबसे ज्यादा टूटा है, उन मुल्कों में दूसरे देशों से हवाई यात्राएं भी सबसे ज्यादा हुई हैं. ऐसे में ये सवाल लाजिमी है कि हवाई नेटवर्क के चलते कोरोना वायरस एक मुल्क से दूसरे मुल्क होते हुए पूरी दुनिया को अपनी चपेट में तो नहीं ले लिया?

ज्यादा एयर कनेक्टिविटी तो ज्यादा खतरा!

2008 में जब स्वाइन फ्लू की महामारी ने दुनिया भर में दस्तक दी थी तब से अब तक हवाई यात्राओं की तादाद में 50 फीसदी से भी ज्यादा का इजाफा हो चुका है. विदेश से आने वाले लोगों के लिहाज से टॉप 5 देशों में नंबर एक पर फ्रांस है जहां 2018 में दूसरे देशों से 8.9 करोड़ लोग पहुंचे. दूसरे नंबर पर स्पेन है जहां 2018 में दूसरे मुल्कों से 8.3 करोड़ लोगों ने दौरा किया.

तीसरे नंबर पर अमेरिका है जहां 2018 में विदेश से 8 करोड़ लोग पहुंचे थे. चौथे नंबर पर चीन है जहां 2018 में 6.3 करोड़ लोग विदेश से आए थे. पांचवें नंबर पर इटली है जहां दूसरे मुल्कों से 6.2 करोड़ लोग पहुंचे थे. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि ये पांचों देश कोरोना से संक्रमित टॉप-8 मुल्कों में भी शामिल हैं.

अगर किसी देश से विदेश जाने वाले लोगों के आंकड़ों पर गौर करें तो इस मामले में टॉप पर चीन है जहां 2018 में 15 करोड़ लोग विदेश गए और सबसे ज्यादा कोरोना का संक्रमण चीन में ही हुआ. दूसरे नंबर पर जर्मनी आता है जहां 2018 में 10.9 करोड़ लोग यहां से दूसरे मुल्कों का सफर किया था. तीसरे नंबर पर अमेरिका है जहां से 9.3 करोड़ लोगों ने अलग-अलग देशों की उड़ान भरी थी. चौथे नंबर पर हांगकांग है जहां से 9.2 करोड़ लोगों ने दूसरे मुल्कों का दौरा किया. ब्रिटेन पांचवें नंबर पर है जहां से 7 करोड़ लोगों ने दूसरे देशों का सफर तय किया.

हवाई नेटवर्क से दुनिया में फैला कोरोना!

अगर भारत की बात करें तो यहां भी साल-दर-साल विदेश से आने वालों में भारी वृद्धि होती जा रही है. 2008 में स्वाइन फ्लू के वक्त जितने लोग विदेश से भारत आते थे, वो एक दशक में तीन गुना हो गए हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 2008 में 53 लाख लोग विदेश से भारत आए थे. 2009 में ये 52 लाख हो गया लेकिन 2010 में बढ़कर 58 लाख पहुंच गया. साल 2011 में ये तादाद बढ़कर 63 लाख हो गई जो 2012 में 66 लाख के आंकड़े को छू गया और फिर 2013 में 70 लाख तक पहुंच गया.

2014 में विदेश से भारत आने वालों की तादाद 1 करोड़ 31 लाख हो गई जो 2015 में बढ़कर 1 करोड़ 33 लाख तक पहुंच गई. 2016 में ये आंकड़ा 1 करोड़ 46 लाख था जो 2017 में 1 करोड़ 55 लाख हो गया और फिर 2018 में बढ़कर 1 करोड़ 74 लाख के स्तर को छू गया.

दूसरे मुल्कों से भारत आने वालों में विदेशी सैलानी तो होते ही हैं, साथ ही एनआरआई या आप्रवासी भारतीयों की भी तादाद होती है. 2018 के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत आने वाले 1 करोड़ 74 लाख लोगों में से 60 फीसदी तो विदेशी पर्यटक थे तो वहीं 40 फीसदी NRI थे.

कोरोना वायरस का एयर नेटवर्क से नाता!

गौर करने वाली बात यहां ये भी है कि जिन मुल्कों में कोरोना का कहर टूटा है, वहां से भी भारी तादाद में लोग भारत आते रहते हैं. 2018 के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा बांग्लादेश से 22.6 फीसदी लोग भारत आते हैं. अमेरिका से 14.6 तो ब्रिटेन से 10.3 फीसदी लोग भारत आए थे. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से साढ़े तीन-तीन फीसदी तो चीन से 2.8 फीसदी लोग साल 2018 में भारत की यात्रा पर आए थे.

भारत में विदेश से आने वाले करीब आधे लोग दिल्ली या मुंबई में लैंड करते हैं. 2018 के आंकड़ों के मुताबिक विदेश से भारत आने वालों में से 28.9 फीसदी लोगों ने दिल्ली में तो 15.5 फीसदी ने मुंबई में लैंड किया था. चेन्नई में 7.4 फीसदी तो बेंगलुरु में 5.8 फीसदी विदेशी यात्रियों ने 2018 में लैंड किया था. ध्यान देने वाली बात ये है कि मुंबई और दिल्ली में कोरोना संक्रमण के केस सामने आए हैं. 

2018 के आंकड़ों के मुताबिक, विदेश से भारत आने वाले यात्रियों में से 60.7 लाख लोगों ने तमिलनाडु राज्य का दौरा किया था. 50.8 लाख लोगों ने महाराष्ट्र तो 37.8 लाख यात्रियों ने उत्तर प्रदेश का सफर किया था. दिल्ली का दौरा करने वालों की तादाद 27.4 लाख थी तो वहीं राजस्थान का सैर करने वाले 17.5 लाख लोग थे.

ऐसा नहीं है कि विदेश से भारत आने वाले लोगों की तादाद ही बढ़ी है बल्कि यहां से विदेश जाने वाले यात्रियों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है. 2009 में भारत से 1 करोड़ 11 लाख लोगों ने दूसरे मुल्कों की यात्रा की थी जो कि 2018 में बढ़कर 2 करोड़ 63 लाख तक पहुंच गई. इस तरह से एक दशक में 1.52 करोड़ ज्यादा भारतीयों ने विदेश की यात्रा की.

हवाई यात्रा से फैला कोरोना?

अब भारत में बिगड़ते हालात को देखते हुए और इन हालातों से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला किया है कि मंगलवार यानी 24 फरवरी की रात से देश में सभी घरेलू उड़ानों को रद्द किया जाएगा.

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भारत से जिन मुल्कों में लोग जाते हैं, उनमें से कई देश आज कोरोना का दंश झेल रहे हैं. 2018 के आंकड़े बताते हैं कि विदेश जाने वाले भारतीयों में से सबसे ज्यादा 16.2 फीसदी लोगों ने सऊदी अरब की यात्रा की थी. 11.7 फीसदी भारतीयों ने अमेरिका तो 11.4 फीसदी लोगों ने कुवैत का सफर किया था. विदेश जाने वाले भारतीयों में से 11 फीसदी ने सिंगापुर, 10.8 फीसदी ने थाईलैंड तो 8 फीसदी ने चीन की यात्रा की थी.

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