कब अक्ल ठिकाने आएगी मलेशिया की ?

क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा ! लगता है भारत को ही मलेशिया की अकल ठिकाने लगानी पड़ेगी..  

कब अक्ल ठिकाने आएगी मलेशिया की ?

नई दिल्ली. भारत एक सहनशील और मैत्रीपूर्ण देश है, इस बात से दुनिया में कोई इंकार नहीं कर सकता. और ये बात मलेशिया को भी मालूम है. लेकिन भारत के साथ ही नहीं, दुनिया के हर देश के साथ मलेशिया को अपनी इस्लामिक कट्टरता से बाहर आकर व्यवहार करना होगा, वरना उसके हितों को जिन देशों से सुरक्षा मिल रही है, वे उसे धता बता देंगे.

भारत-विरोधी तेवर दिखा रहा है मलेशिया 

ये तो पता नहीं कि ये मलेशिया की ये अपनी दुर्बुद्धि है या फिर इसके पीछे कोई और है जो उसे भारत के खिलाफ भड़काने में लगा है. लेकिन कुछ भी हो, मलेशिया के भारत विरोध से एक बात जो समझ में आ रही है वो ये है कि मलेशिया इस्लामिक कट्टरपंथी सोच की गिरफ्त में है और ये बात उसके राष्ट्रीय हितों के पक्ष में नहीं जाएगी.

कश्मीर के बाद अब सीएए पर भारत विरोधी बयान  

मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर मुहम्मद को सनकी तो किसी तरह नहीं माना जा सकता लेकिन उनको बुद्धिमान भी अब कोई नहीं मानेगा. बरसों से भारत इस छोटे से देश से मैत्री निभा रहा है जिसका सिला ये देश उसे इस मौके पर इस तरह दे रहा है. भारत की सरकार अपने देश में कोई कदम उठा रही है तो इससे किसी बाहरी तत्व को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. किन्तु कश्मीर में धारा  370  के समापन पर भी मलेशिया को मिर्ची लगी थी और अब जब भारत की संसद ने देश के लिए नागरिकता संशोधन क़ानून बनाया है तो फिर मलेशिया को तकलीफ होने लगी है.

मलेशिया के तल्ख तेवर ठंडे करेगा भारत

भारत किसी के घरेलू मामले में नहीं बोलता किन्तु यदि उसके घरेलू मामले में कोई टांग डालेगा तो टांग टूट भी सकती है. कुछ इसी अंदाज़ में मलेशिया को सबक सिखाएगा भारत. नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मलयेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर मुहम्मद के रुख पर भारत की नाराज़गी जायज़ है.

मलेशिया के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाएगा भारत 

भारत की मैत्री का एक उदाहरण मलेशिया से भारत एक्सपोर्ट होने वाला पाम ऑइल भी है. इस एक्सपोर्ट को बंद करने के बाद भारत अब मलयेशिया से आने वाले माइक्रोप्रोसेसर्स को भी पूरी तरह प्रतिबंधित करने की बात सोच रहा है. भारत ने ये बात मलेशिया को साफ़ तौर पर बता दी थी कि कश्मीर और नागरिकता संशोधन कानून, दोनों हमारे आंतरिक विषय हैं और इन पर बोलने का मलयेशियाई प्रधानमंत्री को कोई अधिकार नहीं बनता.

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