पाकिस्तान की फिर इंटरनेशनल बेइज्जती! यहां पढ़ें: ना'पाक' के 3 झूठे किस्से

पाकिस्तान हर बार हिन्दुस्तान के बारे में बोल कर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी थू-थू कराता रहा है, एक बार फिर उसने अपनी गलती दोहराई है. चलिए आपको उसके ऐसे ही 3 झूठ से रूबरू करवाते हैं-

पाकिस्तान की फिर इंटरनेशनल बेइज्जती! यहां पढ़ें: ना'पाक' के 3 झूठे किस्से

नई दिल्ली: पाकिस्तान लगातार अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी बेइज्जती कराह रहा है. हिंदुस्तान के अंदरूनी मामलों को लेकर पाकिस्तान के नुमाइंदे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बोलते हैं और अपनी इंटरनेशनल जलालत कराते हैं. पाकिस्तान की बेहद करारी और बेहद ताज़ी बेइज्जती पेरिस में हुई है. जहां पाकिस्तान के शिक्षा मंत्री शफकत महमूद ने कश्मीर और अयोध्या मुद्दे को उठा दिया और उसी के जवाब में इंडिया ने जब जवाब दिया तो पाकिस्तान की बखिया उधेड़ दी.

सबक नहीं सीखता है ना'पाक'

यूनेस्को में भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि 'अध्यक्ष महोदय, हम पाकिस्तान के बचकाने दुष्प्रचार का खंडन करने के लिए, भारत को मनगढ़ंत झूठ, छल-कपट से भरी बातों के जरिए अपमानित करने के लिए जवाब देना चाहते हैं. हम भारत के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर पाकिस्तान के अनुचित बयान की निंदा करते हैं. ये फैसला कानून के शासन के बारे में है, सभी धर्मों के लिए समान सम्मान के बारे में, वो अवधारणाएं जो पाकिस्तान और उसके व्यवहार से दूर-दूर तक ताल्लुक नहीं रखतीं. पाकिस्तान की ऐसी बातें हैरान नहीं करतीं, क्योंकि वो हमारे अंदरूनी मामलों पर बोलने के आदि हो चुके हैं, जिससे वो नफरत फैलाने की साजिश करते हैं, हम इसकी निंदा करते हैं.

इमरान के मंत्री शफकत महमूद अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करने से पहले कश्मीर मसले पर अपने झूठ और प्रोपगेंडा को फैलाने के लिए इस मंच को चुना था. उन्होंने कहा था कि 'आज करीब 100 दिन हो गए हैं जब कश्मीर के लोग कर्फ्यू के तहत कैद हैं. उनके मूलभूत मनवाधिकार और मूलभूत आजादी के साथ खिलवाड़ हो रहा है.'

इमरान के मंत्री को इतना भी इल्म नहीं है कि जम्मू और कश्मीर में किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है. सूबे में कहीं भी कर्फ्यू नहीं है, अमन और चैन कायम है. लोगों का जीवन सामान्य रूप से चल रहा है और यहां की आवाम ने भी सरकार के उस फैसले को स्वीकार किया है. जिसके तहत धारा 370 को समाप्त किया गया और जम्मू और कश्मीर को भारत के बाकी राज्यों के अनुसार एक समान कानून के तहत लेकर आया गया. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी घोर बेइज्जती कराने का आदि हो चुका पाकिस्तान इस बार भी हिंदुस्तान के हाथों टेररिस्तान करार दिया गया.

इतना ही नहीं भारत ने जब एक एक कर के पाकिस्तान की बखिया उधेड़ी तो दुनिया के सामने पाकिस्तान के टेररिस्तान बनने की कहानी सामने आ गई. हिन्दुस्तान ने सवालों में पाकिस्तान का सच दुनिया के सामने एक बार फिर पेश किया. और ये सच इमरान के मंत्री को बेनकाब करने के लिए काफी था.

यूनेस्को में भारतीय अधिकारी ने ये भी कहा कि 'हम सवाल पूछना चाहते हैं कि किस देश में 9/11 और 26/11 हमले के साजिशकर्ता पकड़े गए. कहां ओसामान बिन लादेन और मुल्ला उमर पाए गए. कौन सा देश UN लिस्ट में शामिल 130 आतंकियों और 25 आतंकी संगठनों का घर है. कौन सा देश है जो आतंकी गुटों को आर्थिक मदद मुहैया करा रहा है. किस देश की सेना ने अपने ही लाखों लोगों का कत्ल किया है, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो दूसरी भाषा बोलते थे. इन सारे सवालों का एक जवाब है पाकिस्तान.

ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान को भारत ने जमकर धोया है. ऐसा लगता है कि पड़ोसी देश को इसकी आदत पड़ चुकी है और वो रह-रहकर ख़ुद को हिन्दुस्तान की वाशिंग मशीन में धकेल देता है. और ऐसा लगता है कि जैसे अगर किसी दिन भारत को लेकर इमरान की इंटरनेशनल बेइज्जती नहीं होती उस दिन उसे नींद नहीं आती.

झूठा किस्सा नंबर 1

इससे पहले भी धारा 370 और कश्मीर को लेकर अलग-अलग अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इमरान खान और उनके मंत्री अपनी बेइज्जती कराते आए हैं. इमरान ख़ान ने पाकिस्तान में लोगों को भरोसा दिलाया था कि वो इस मसले को हर एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाएंगे और कोशिश करेंगे कि दुनिया पाकिस्तान की सुने लेकिन पूरी दुनिया में भीख मांग रहे पाकिस्तान के मंत्री को कोई भी एक मुल्क नहीं मिला. जिसने कश्मीर मसले पर पाकिस्तान राग में सहमति दर्ज की हो. दिलचस्प बात ये है कि हर बार इमरान और इमरान के मंत्रियों को हिन्दुस्तान की बेटियां जवाब देने आईं और हर बार पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब किया.

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हाल ही में सितंबर महीने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली में कश्मीर का मुद्दा उठाया था और धारा 370 को हटाने को लेकर सवाल खड़े किए थे. तब भी इमरान को भारत से करारा जवाब मिला था. यूएन में भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव विदिशा मैत्रा ने जमकर लताड़ा था. और यहां भी आतंकिस्तान पाकिस्तान की कलई खोल कर रख दी.

झूठा किस्सा नंबर 2

इमरान से पहले मलिहा लोधी ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर से धारा 370 हटाने का मुद्दा उठाया था. साथ ही फिलिस्तीन की एक जख़्मी बच्ची की तस्वीर दिखाकर, उसे कश्मीर का नागरिक बताया था और ये कहा था कि घाटी में बच्चों पर जुल्म किए जा रहे हैं. इसके जरिए वो मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाना चाहती थी, जिस पर भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र प्रथम सचिव पालोमी त्रिपाठी ने पाकिस्तान के फेक एजेंडे को उजागर कर दिया और पाकिस्तान के असल चेहरे को बेनकाब कर दिया था.

फर्ज़ी फोटो के ज़रिए दुनिया को गुमराह करने की कोशिश बेकार हो गई. कभी झूठिस्तान तो कभी आतंकिस्तान की स्याह हकीकत हर बार हिन्दुस्तान दिखाता रहा है. पमोली त्रिपाठी ने पाकिस्तान के उस चेहरे को दुनिया के सामने पेश किया जिसमें ये साफ था कि किस तरह से कश्मीर में मानवाधिकार की दुहाई देनेवाला पाकिस्तान खुद कश्मीर में कत्लेआम मचाने की फिराक में रहता है.

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झूठा किस्सा नंबर 3

सितंबर महीने में ही युगांडा की राजधानी कंपाला में आयोजित 64वें कॉमनवेल्थ देशों के संसदीय सम्मेलन में भी पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दा उठाया था. जिसका भारतीय प्रतिनिधि मंडल ने कड़ा विरोध किया था. कॉमनवेल्थ संसदीय समम्मेलन में पाकिस्तान ने कश्मीर में भारतीय जवानों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कश्मीरियों को बंधक बनाने का झूठा आरोप लगाया था. इस पर भारतीय संसदीय प्रतिनिधि मंडल की सदस्य रूपा गांगूली ने कश्मीर पर पाकिस्तानी दुष्प्रचार का पुरजोर विरोध करते हुए कहा था कि सैनिक शासन की परम्परा पाकिस्तान में है और पाकिस्तान 33 सालों से सेना के शासन में रहा है.

जाहिर है पाकिस्तान को हर बार अपने गिरेबां में झांकने की जरूरत है, जो खुद अपने मुल्क को आतंक की आग में जला रहा है और उसके साथ पूरी दुनिया में लगातार उसकी बदनामी हो रही है.