पुतिन के 'रूसी फॉर्मूले' ने कोरोना को किया STOP

ब्रिटेन, इटली, फ्रांस जैसे तमाम यूरोपीय देश कोरोना की मार से बेहाल हैं. लेकिन रूस ने खुद को कोरोना के भीषण हमले से अब तक बचाकर कर रखा है. चीन से लंबी सीमा जुड़ी होने के बावजूद रूस ने ये कमाल कैसे किया और कोरोना को रोकने का रशियन मॉडल भारत के किस तरह काम आ सकता है. ये जानना भी आपके लिए बेहद जरूरी है.

पुतिन के 'रूसी फॉर्मूले' ने कोरोना को किया STOP

नई दिल्ली: अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली जैसे सभी बड़े देश कोरोना के अटैक से सहमे हुए हैं. इन सभी देशों के मुखिया के माथे पर चिंता की लकीरें हैं, लेकिन इस बीच रूस, जिसने कोरोना के कदम को बड़ी मजबूती से रोक कर रखा है. उसके राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन अस्पताल के अंदर कोरोना से निपटने की तैयारियों का जायज़ा ले रहे हैं.

रूसी फॉर्मूले से कोरोना को मिली मात!

ऐसे में सवाल उठता है कि  रूस ने कैसे रोके कोरोना के कदम? और क्या है कोरोना से निपटने का रशियन फॉर्मूला?

ऐसा नहीं कि रूस में कोरोना ने अब तक कदम नहीं रखा हो, लेकिन चीन से 2600 मील लंबी सीमा बंद करने के बावजूद रूस में अब तक कोरोना के 658 संक्रमित मरीज़ सामने हैं. जबकि कोरोना के संक्रमण से एक व्यक्ति की मौत हुई है. रूस में कोरोना के ज्यादातर मरीज़ राजधानी मॉस्को मे हैं.

राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन रूस में कोरोना के मामलों को बढ़ने से रोकने के लिए अधिकारियों के साथ मीटिंग में जुटे हैं. कोरोना अगर रूस में अब तक ज्यादा पांव नहीं पसार पाया तो इसके बड़ी वजह है कि यहां वकत रहते कड़े नियम लागू करने के बाद उनका सख्ती से पालन करवाया गया.

रूस ने कोरोना को कैसे रोका?

- रूस ने चीन से लगने वाली 2600 मील लंबी सीमा सील कर दी
- वायरस का पता चलने के तुरंत बाद टेस्टिंग शुरू हो गई
- रूस के सभी एयरपोर्ट पर टेस्टिंग सुविधा उपलब्ध कराई गई
- 65 साल से ज्यादा के बुजुर्गों को घर में रहने के आदेश दिया गया
- रूस में सभी सांस्कृति और खेल आयोजनों को रद्द किया
- स्कूल-कॉलेज बंद, वीडियो कांफ्रेंसिंग से पढ़ाई जारी
- बाहरी नागरिकों की लिए रूस की सीमाएं सील
- चीन, साउथ कोरिया और ईरान के यात्रियों की सबसे पहले निगरानी की गई
- कोरोना वायरस को लेकर रूस में 1 लाख 63 हजार से ज्यादा टेस्ट किए गए

हालांकि, एशिया और यूरोप के देशों की तरह रूस में सरकार ने तालाबंदी नहीं की है. यहां दुकानों और फॉर्मेसी में जाकर जरूरत की चीजें खरीदी जा सकती है. लेकिन रूस के जो नागरिक विदेशों से लौट रहे हैं उनकी कड़ी जांच की जा रही है.

रूस में विदेशों से आए लोगों की निगरानी

मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने कहा कि "काफी लोग घर पर रह रहे हैं, उनका परीक्षण नहीं किया गया. जो विदेश से आए हैं वो अपने घरों में आइसोलेट हैं. अगर उनमें बीमारी के लक्षण नहीं मिलते तो ये बहुत अच्छा है. उनको घरों में ही रहना चाहिए."

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रूस में बुजुर्गों को  लेकर सबसे ज्यादा एहतियात बरती जा रही है. बुजुर्गों की पेंशन जारी रखी गई है और युवाओं को भी सलाह दी गई है कि वो बुजुर्गों के संपर्क में आने से बचें. क्योंकि ऐसा करने से वो संक्रमित हो सकते हैं.

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