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आर्थिक वृद्धि के लिये इंफ्रा बॉन्ड से 95 हजार करोड़ रुपये तक जुटा सकती है सरकार: बोफा

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.4 प्रतिशत के पिछले स्तर पर ही सीमित रखने का लक्ष्य रख सकती है.

आर्थिक वृद्धि के लिये इंफ्रा बॉन्ड से 95 हजार करोड़ रुपये तक जुटा सकती है सरकार: बोफा
2019-20 की आखिरी तिमाही में विकास दर घट गई थी. (प्रतीकात्मक)

मुंबई: सरकार आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिये ढांचागत क्षेत्र के बॉन्ड जारी कर 95,000 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है. ये बॉन्ड विशेष उद्देशीय निकाय (एसपीवी) के जरिये जारी किये जा सकते हैं. एक ब्रोकरेज कंपनी की रिपोर्ट में यह कहा गया है. बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच के अर्थशास्त्रियों ने इस रिपोर्ट में कहा है कि बेशक इस प्रकार के बॉन्ड जारी करने से सरकार का कर्ज बढ़ेगा लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया प्रतिकूल नहीं होगी क्योंकि इस प्रकार जुटाया गया धन खास जरूरत को पूरा करने के लिये होगा. 

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को पूरा करने के लिये एक एसपीवी द्वारा ढांचागत बॉन्ड जारी किये जा सकते हैं. इससे निजी निवेश के लिये जरूरी वित्त में समस्या खड़ी किये बिना आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा.’’ अर्थशास्त्रियों ने नोट में कहा है कि वित्त मंत्री इस तरह के बॉन्ड जारी कर आराम से 95,000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं. उन्होंने कहा है कि इस प्रकार जो राशि जुटाई जायेगी वह सावधि जमाओं से निकलकर बॉड जारी करने वाले एसपीवी में जायेगी और इस प्रकार बैंक जमा अथवा रिण वृद्धि पर कोई असर नहीं होगा. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यदि इस तरह के अवसंरचना बॉन्ड के जरिये धन जुटाने की घोषणा करती है तो इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और पूंजी लागत कम होगी. कमजोर पड़ती आर्थिक वृद्धि पर भी इसका बड़ा वित्तीय असर नहीं होगा. उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2018- 19 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घट कर पांच साल के निम्न् स्तर 5.8 प्रतिशत पर आ गयी और पूरे साल की जीडीपी वृद्धि भी 6.8 प्रतिशत पर नीचे ही रही. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.4 प्रतिशत के पिछले स्तर पर ही सीमित रखने का लक्ष्य रख सकती है. लेकिन वह 0.3 प्रतिशत तक अतिरिक्त सार्वजनिक व्यय का प्रस्ताव कर सकती हैं.