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JAYPEE : कर्जदाताओं ने NBCC की बोली स्वीकार करने के लिये रखी 5 शर्तें

जेपी इंफ्राटेक (Jaypee Infra) के कर्जदाताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीसीसी से कर्ज में डूबी रीयल्टी कंपनी के अधिग्रहण को लेकर बोली को और आकर्षक बनाने को कहा है. साथ ही यह भी मांग की है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को 950 एकड़ जमीन के बजाए 1,426 एकड़ भूमि की पेशकश करनी चाहिए तथा आयकर विभाग तथा विकास प्राधिकरणों से मंजूरी हासिल करने का जिम्मा लेना चाहिए.

JAYPEE : कर्जदाताओं ने NBCC की बोली स्वीकार करने के लिये रखी 5 शर्तें

नई दिल्ली : जेपी इंफ्राटेक (Jaypee Infra) के कर्जदाताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीसीसी से कर्ज में डूबी रीयल्टी कंपनी के अधिग्रहण को लेकर बोली को और आकर्षक बनाने को कहा है. साथ ही यह भी मांग की है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को 950 एकड़ जमीन के बजाए 1,426 एकड़ भूमि की पेशकश करनी चाहिए तथा आयकर विभाग तथा विकास प्राधिकरणों से मंजूरी हासिल करने का जिम्मा लेना चाहिए.

20 हजार से ज्यादा फ्लैट समेत अटकी पड़े
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीली न्यायाधिकरण (NCLAT) के निर्देश के तहत कर्जदाता जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण के लिए एनबीसीसी की बोली और 20 हजार से ज्यादा फ्लैट समेत अटकी पड़ी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर उसके साथ बातचीत कर रहे हैं. आईडीबीआई की अगुवाई में कर्जदाताओं के समूह ने एनबीसीसी को पत्र लिखकर कहा है कि अगर कंपनी उनकी पांच शर्तों को पूरा करती है तो वह उसकी बोली पर सकारात्मक रूप से विचार करेगा.

एनबीसीसी को यह पत्र कर्जदाताओं की समिति की बैठक से दो दिन पहले सोमवार को लिखा गया. 13 बैंकों के समूह की तरफ से सिरील अमरचंद मंगलदास ने लिखा है, 'समाधान योजना के तहत फिर से 1,426 एकड़ भूमि को रखा जाना चाहिये जैसा कि पहले सुरक्षित वित्तीय कर्जदाताओं को ऋण संपत्ति अदला-बदली व्यवस्था के तहत पेशकश की गयी थी.' इसमें कहा गया है कि भूखंड वित्तीय कर्जदाताओं को उनके कर्ज के आधार पर समानुपातिक रूप से दिया जाना चाहिए.

पत्र में लिखा गया है कि अगर प्रस्तावित बोली के तहत यमुना एक्सप्रेस और भूमि विशेष उद्देश्यीय कंपनी को हस्तांतरित करने के बारे में संबंधित प्राधिकार से मंजूरी नहीं ली गयी है तो एनबीसीसी को यमुना एक्सप्रेस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट आथोरिटी (वाईईआईडीए) से जरूरी अनुमति लेनी चाहिए. कर्जदाताओं ने यह भी कहा है कि एनबीसीसी को भविष्य की कर देनदारी से छूट के बारे में आयकर प्राधिकरण से जरूरी मंजूरी लेनी चाहिये. इस संबंध में एनबीसीसी को अपनी बोली के क्रियान्वयन को लेकर प्राधिकरण से जरूरी मंजूरी प्राप्त करनी चाहिये.

कर्जदाता बिना बिके फ्लैट के संदर्भ में एनबीसीसी को वित्तीय सहायता उपलब्ध करााने पर विचार करेगा बशर्ते इस प्रकार की सहायता को केंद्र से गारंटी मिले. पत्र में कहा गया है, 'भूखंड के हस्तांतरण के कारण भविष्य में जो आयकर या जीएसटी या कंपनी कर देनदारी बनेगी, उसे समाधान आवेदनकर्ता द्वारा ही वहन किया जाएगा. गारंटी वाले वित्तीय रिणदाता ऐसी कोई देनदारी नहीं चुकायेंगे.'

कर्जदाताओं की समिति की 30 मई को बैठक होगी जिसमें एनबीसीसी की बोली पर चर्चा की जाएगी. तेरह बैंकों तथा 23,000 मकान खरीदारों के पास समिति में मतदान का अधिकार है. इससे पहले, कर्जदाताओं की समिति ने मुंबई की कंपनी सुरक्षा रीयल्टी की बोली बोली को खारिज कर दिया. बाद में समिति ने एनबीसीसी की पेशकश पर मतदान कराने का निर्णय किया. हालांकि, बैंकों ने एनबीसीसी की समाधान योजना में कुछ शर्तों को लेकर कदम का विरोध किया था.