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Jaypee इंफ्रा दिवाला मामले में NBCC की बोली पर आखिरी फैसला 20 मई को, खरीदार करेंगे वोट

इस बोली में 13 बैंक शामिल हैं, जबकि 23,000 से अधिक घर खरीदारों के पास करीब 59 प्रतिशत मत हैं. 

Jaypee इंफ्रा दिवाला मामले में NBCC की बोली पर आखिरी फैसला 20 मई को, खरीदार करेंगे वोट
घर खरीदार मतदान के पक्ष में थे जबकि बैंक इससे सहमत नहीं थे. (फाइल)

नई दिल्ली: कर्ज तले दबी जेपी इंफ्राटेक को कर्ज देने वाले बैंकों और घर खरीदारों ने कंपनी के अधिग्रहण और 20 हजार से अधिक फ्लैट का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए सरकारी कंपनी NBCC की ओर से प्रस्तुत बोली पर गुरुवार को मतदान शुरू किया. मतदान रविवार को पूरा होगा और नतीजे 20 मई को आएंगे. घर के लिए पैसा लगाने वाले सहित वित्तीय ऋणदाता जयप्रकाश उद्योग समूह की इस भू/भवन सम्पत्ति विकास कंपनी के कर्ज के समाधान की नए निवेशकों की योजना पर दूसरी बार मतदान कर रहे हैं.

बैंकों की समिति के पास 40.71 फीसदी मताधिकार हैं
तीन मई को हुए पहले मतदान में मुंबई की कंपनी सुरक्षा रीयल्टी की बोली खारिज कर दी गयी थी. जेपी इंफ्राटेक, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) की अनुषंगी कंपनी है. कंपनी को कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों और बैंकों की समिति (सीओसी) के पास कुल 40.71 प्रतिशत मताधिकार हैं, इसमें 13 बैंक शामिल हैं, जबकि 23,000 से अधिक घर खरीदारों के पास करीब 59 प्रतिशत मत हैं. 

खरीदार NBCC के पक्ष में डाल सकते हैं वोट
सूत्रों ने कहा कि ज्यादातर घर खरीदार NBCC की बोली की पक्ष में मतदान कर सकते हैं लेकिन कई लोगों को डर है कि कर्जदाता NBCC की बोली को खारिज कर सकते हैं क्योंकि वह नहीं चाहते हैं कि उनके 9,782 करोड़ रुपये के दावों में 60 प्रतिशत तक की कटौती की जाए. इस हफ्ते की शुरुआत में , सीओसी ने NBCC की संशोधित बोली को मतदान के लिए रखने का फैसला किया था. घर खरीदार मतदान के पक्ष में थे जबकि बैंक इससे सहमत नहीं थे. 

बैंकरों ने नई बोली का विरोध किया था
बैंकरों ने NBCC की बोली पर मतदान का विरोध किया था तथा अभी और बातचीत की वकालत की थी. बैंकों ने मतदान प्रक्रिया पर रोक के लिए नेशनल कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में भी गुहार लगाई थी , लेकिन उन्हें वहां से राहत नहीं मिली थी. NBCC ने अपनी संशोधित बोली में 200 करोड़ रुपये की इक्विटी डालने , बैंकों को 5,000 करोड़ रुपये मूल्य की 950 एकड़ जमीन हस्तांतरित करने और 2023 तक फ्लैटों का निर्माण कार्य पूरा करने का वादा किया है ताकि वित्तीय ऋणदाताओं के 23,723 करोड़ रुपये के लंबित दावों का निपटान किया जा सके.