अमेरिका में कच्चे तेल के दाम गिरने से क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? यहां जानें

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अमेरिका में कच्चे तेल के दाम गिरने से क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? यहां जानें
फाइल फोटो

नई दिल्ली: कोरोना काल (Coronavirus) में अमेरिका (America) से एक चौंका देने वाली खबर सामने आई है. यहां कच्चे तेल की कीमत माइनस में चली गई है. अमेरिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब वहां कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत माइनस में चली गई है. अमेरिका में WTI Crude Oil  के फ्यूचर्स ट्रेड दाम माइनस में गए. बता दें कि WTI यानी West Texas Intermediate क्रूड आयल की वो कैटेगरी है जिसे अच्छा माना जाता है.

बताते चलें कि माइनस 37 डॉलर का दाम 20 मई तक के फ्यूचर वाला रेट था. इसकी डिलीवरी बाद में होनी थी. वहीं इसके अगले दिन से जून का फ्यूचर ट्रेडिंग शुरू होना था, इसलिए बेचने वालों ने उस तरह भाव लगाया जैसे भारत में शाम को कोई सब्जी वाला घर जाने का भाव लगाता है और बहुत सारा सामान सस्ते में दे जाता है.

क्यों कम हुए दाम?
इंडियन ऑयल के पूर्व चेयरमैन बीएम बंसल कहते हैं कि दुनियाभर के विभिन्न देशों में फैले कोरोना वायरस के मद्देनजर लॉकडाउन जारी है. ऐसे में हवाई जहाज, गाड़ियां आदि रूक गई हैं. जिससे मार्केट में डिमांड कम हो गई है. लेकिन उत्पादन और सप्लाई लगातार जारी है. ऐसे में तेल निर्माता कंपनियों के पास तेल स्टोर करने की समस्या उत्पन्न होने लगी है. उन्होंने बताया कि तेल का उत्पादन बंद करना ज्यादा महंगा होगा बजाए सस्ती दर पर तेल देने के. इसके अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं है. इसलिए तेल के दामों में एतिहासिक गिरावट देखने को मिली है.

हालांकि जून का फ्यूचर रेट अमरीका में भी 20 डॉलर प्रति बैरल हो गया है, यानि नेगेटिव जोन से बाहर आ गया. अब भारत की बात करें तो भारत में तेल की खपत 48 लाख बैरल प्रतिदिन है. जबकि 2300 लाख टन हम सालाना इंपोर्ट करते हैं. आंकड़ों की बात करें तो लॉकडाउन के कारण भारत में भी तेल की डिमांड करीब 40-50% कम हुई है.

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आयल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन रहे सुनील कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि कुछ तेल खनन कंपनियों को 1 बैरल निकालने की कीमत 35 डॉलर आ रही है जबकि इंडियन क्रूड बास्केट का दाम 25 डॉलर प्रति बैरल है. यानि उन्हे 10 डॉलर प्रति बैरल का नुकसान हो रहा है. वहीं कुछ के लिए 45 डॉलर प्रति बैरल उत्पादन लागत आ रही है. ऐसे में उन्हें 20 डॉलर का नुकसान हर बैरल पर हो रहा है.

उन्होंने आगे बताया कि आयल मार्केटिंग कंपनियों की बिक्री नहीं हो रही है. ऐसे में उनकी बैलेंस शीट गड़बड़ा रही है. इस क्रम में उन्होंने बताया कि कच्चा तेल सस्ता होने से जो थोड़ा बहुत फायदा हो रहा है उसका पैसा कोरोना से लड़ने में लग जाएगा. इसलिए कोई ये सोच रहा है कि पेट्रोल डीजल के दाम कम हो जाएंगे तो ऐसा नहीं होगा. बीएम बंसल भी मानते हैं कि आयल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव है, हालांकि हमें स्ट्रेटेजिक रिजर्व बनाना है इसलिए दूसरी डिमांड तो हमारे पास है. भारत के लिए ये सही समय है स्ट्रैटेजिक रिजर्व बनाने का. ऐसे समय में भारत को 50-60 अरब डॉलर का फायदा हो सकता है.

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सुनील कुमार श्रीवास्तव भी मानते हैं कि ये सही मौका है जब हमें आपदा की स्थिति के लिए तेल का भंडार बनाना चाहिए. भारत के पास लगभग 53 लाख मीट्रिक टन का आयल रिजर्व है जो कि आपदा की स्थिति में 10-13 दिन के लिए चल सकता है. ये रिजर्व विशाखापट्टनम मैंगलूर, पाढुर (केरल) में है. वहीं भारत में 65 लाख टन का ऑयल रिजर्व और बनाया जा रहा है. ये पाढुर, चांदीखोल उड़ीसा, बीकानेर राजस्थान, राजकोट गुजरात में बनाया जा रहा है.

बता दें कि तेल उत्खनन कंपनियां (Oil Exploration Companies) जैसे कि ओएनजीसी, आयल इंडिया, केयर्न एनर्जी है, वहीं उत्खनन के बाद तेल से बने प्रोडक्ट जैसे पेट्रोल, डीजल एविएशन टरबाइन फ्यूल बेचने का काम ऑयल मार्केटिंग कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, एचपीसीएल, बीपीसीएल का है. ये भी बताते चलें कि पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का है. पेट्रोल के दामों में लगभग 54% और डीजल के दामों में लगभग 45% हिस्सा इन्हीं का है.

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