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VIDEO: आखिर किसने कहा- 'यदि मुसलमान गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़ा रहने दो'?

पीएम मोदी ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि इसी पार्टी के एक पूर्व नेता ने एक बार मुसलमानों के लिए कहा था कि यदि वे गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़े रहें. हालांकि उन्‍होंने नेता का नाम नहीं लिया.

VIDEO: आखिर किसने कहा- 'यदि मुसलमान गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़ा रहने दो'?
आरिफ मोहम्‍मद खान राजीव गांधी सरकार में मंत्री थे. 1986 में शाहबानो केस में उन्‍होंने कांग्रेस से अलग राय रखते हुए मंत्री पद से इस्‍तीफा दे दिया था.(फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर सोमवार को धन्‍यवाद प्रस्‍ताव के दौरान बोलते हुए तीन तलाक के मुद्दे पर कांग्रेस से समर्थन की अपील की. हालांकि इसके साथ ही कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि इसी पार्टी के एक पूर्व नेता ने एक बार मुसलमानों के लिए कहा था कि उनका उत्‍थान करना पार्टी का काम नहीं है, यदि वे गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़े रहें. हालांकि उन्‍होंने नेता का नाम नहीं लिया. लेकिन इसके बाद लोगों को अंदाजा लगाने में ज्‍यादा देर नहीं लगी कि वह वास्‍तव में किस नेता की तरफ इशारा कर रहे थे.

दरअसल पीएम मोदी ने पूर्व मंत्री आरिफ मोहम्‍मद खान के एक पुराने इंटरव्‍यू के हवाले से ये बात कही. 1986 में शाहबानो केस में कांग्रेस से अलग राय रखने और मंत्री पद से इस्‍तीफा देने वाले आरिफ मोहम्‍मद खान ने उस इंटरव्‍यू में कहा था कि तत्‍कालीन केंद्रीय मंत्री पीवी नरसिंह राव ने मुसलमानों को लेकर ये टिप्‍पणी की थी.

इस संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए आरिफ मोहम्‍मद खान ने कहा कि ये इंटरव्यू बहुत पुराना है. मुझे ठीक से याद भी नहीं है कि ये 6 साल, 7 साल या 8 साल पुराना है. उस दौरान एक टीवी चैनल ने अब तक जितने भी प्रधानमंत्री हुए, उनके कार्यकाल में हुई महत्‍वपूर्ण घटनाओं को कवर करते हुए एक सीरियल बनाया था.

उन्‍होंने कहा कि राजीव गांधी के ज़माने में शाहबानो केस महत्‍वपूर्ण माना जाता है तो मुझे उन्‍होंने एक एपिसोड के लिए इंटरव्यू किया था. इसमें उन्होंने सवाल किया था कि पार्टी ने आपको इस्‍तीफा वापस लेने के लिए नहीं कहा तो मैंने कहा कि जिस दिन इस्तीफा दिया, उस दिन मैं घर से गायब हो गया. कोई मुझसे संपर्क नहीं कर पाया क्‍योंकि उस ज़माने में सेलफ़ोन भी नहीं था.

इसके साथ ही आरिफ मोहम्‍मद ने कहा कि अगले दिन जब मैं पार्लियामेंट पंहुचा तो अरुण सिंह जोकि प्रधानमंत्री के सलाहकार थे वो सबसे पहले मुझे मिले और उन्होंने मुझे समझाने की बहुत कोशिश की. उन्‍होंने बहुत अच्‍छी बातें कहीं, मैं उनका बहुत आदर करता हूं. उन्होंने मुझसे कहा कि नैतिक आधार पर आपकी कोई गलती नहीं निकाल सकता लेकिन इस पर गौर कर लो. मैंने जब मना कर दिया तो उसके बाद अरुण नेहरू, फोतेदार आये, फिर मेरे पुराने तीन मंत्री भी आये, जिनके साथ मैंने काम किया था और पूरे दिन PM के वेटिंग रूम में एक-एक करके लोग आते रहे और मुझे समझाते रहे.

इसके साथ ही आरिफ मोहम्‍मद खान ने कहा कि सबसे आखिर में तत्‍कालीन केंद्रीय मंत्री पीवी नरसिंह राव आये. उन्होंने कहा, ''भाई तुम इतना क्यों जिद कर हो जब शाहबानो ने भी अपना बयान बदल दिया है तो तुम्हें क्या परेशानी है. हम कोई सोशल रिफॉर्मर थोड़े ही हैं मुसलमानों के...अगर वो गड्ढे में रहना चाहते है तो पड़े रहने दो...''

आरिफ मोहम्‍मद खान ने राव से कहा कि फेमिनिस्ट के तौर पर मेरी कोई रेपुटेशन नहीं है और न ही मैंने महिलाओं के अधिकारों की बड़ी लड़ाई लड़ी है. मेरे सामने पर्शनल इंटिग्रिटी का सवाल है. मेरी अपनी नैतिकता क्या है? मैंने 55 मिनट सुप्रीम कोर्ट के फैसले को डिफेंड किया है. लोकसभा में अब सरकार कह रही है कि इस फैसले को बदलने के लिए वह कानून ला रही है तो मैंने कहा मैं अकबर का बीरबल नहीं हूं कि एक दिन उसने कहा कि बैंगन की सब्ज़ी बहुत अच्छी है तो बीरबल ने बैंगन के 100 गुण बता दिए और जिस दिन कहा कि बैंगन बहुत ख़राब है तो उसके 100 दुर्गुण बता दिए. मैं ये काम नहीं कर सकता.