CAA विरोध के नाम पर गुजरात के बनासकांठा, अहमदाबाद में प्रदर्शनकारियों ने मचाया उत्पात

नागरिकता बिल पर गुजरात के बनासकांठा में प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया.

CAA विरोध के नाम पर गुजरात के बनासकांठा, अहमदाबाद में प्रदर्शनकारियों ने मचाया उत्पात
गुस्से में प्रदर्शनकारी ने गाड़ी को धक्का दिया और उसे गिराने की कोशिश की.

अहमदाबाद: नागरिकता बिल पर गुजरात के बनासकांठा में प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया. पुलिसवालों की गाड़ियों को घर लिया. उसे हिलाया. गुस्से में प्रदर्शनकारी ने गाड़ी को धक्का दिया और उसे गिराने की कोशिश की. एक और वीडियो अहमदाबाद का सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से मारपीट कर रहे हैं.

इतनी ही नहीं, गुजरात के कई जिलों में नागरिकता कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. वड़ोदरा में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और नेताओ द्वारा नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन किया गया है लेकिन खुद पार्टी प्रमुख विनोद शाह को इस बिल के बारे में जानकारी नहीं है. मीडिया ने जब उनसे CAA को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा की मुझे बिल के बारे में कोई जानकारी नहीं है. वडोदरा के मांडवी इलाके में भी  नागरिकता बिल के खिलाफ विरोध देखा गया. मांडवी इलाके में व्यापारियों ने बंद का एलान किया है. व्यापारियों ने इलाके की तमाम दुकाने बंद कर अपना विरोध दिखाया है. वही अन्य क्षेत्रों में बंद का कोई असर नहीं देखा गया है.

अहमदाबाद की बात करें तो वह भी नागरिकता बिल का विरोध किया गया है. विरोध के चलते शहर के ढालगरवाड और त्रण दरवाजा इलाके को संपूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है. व्यापारियों द्वारा सम्पूर्ण तोर पर दुकाने बंद की गई हैं. सतर्कता के रूप में, इलाके में पुलिस बंदोबस्त भी तैनात किया गया है. अहमदाबाद के लाल दरवाजा सिटी कॉलेज के सामने से बिल का विरोध कर रहे 5 छात्रों को हिरासत में लिया गया है. सभी पांच छात्र एनएसयूआई के कार्यकर्ता है. लाल दरवाजा और सीटी इलाकों में पुलिस का कड़ा बंदोबस्त किया गया है.

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नागरिकता बिल पर रिक्शा एसोसिएशन ने हड़ताल का ऐलान किया था लेकिन इसका शहर में कहीं असर नहीं देखा जा रहा. कालूपुर रेलवे स्टेशन, गीता मंदिर बस स्टेशन और पूरे शहर में रिक्शा चल रहे हैं. रिक्शा चालकों का कहना है की, CAA बिल देश के नागरिकों के लिए अच्छा है और इसीलिए हम किसी भी हड़ताल में शामिल नहीं होंगे. क्योंकि अगर हम हड़ताल करेंगे तो शाम को खाएंगे क्या?

(इनपुट: निर्मल त्रिवेदी)