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दिल्‍ली एयरपोर्ट: विमानों को रन-वे तक पहुंचाने के लिए विश्‍व में पहली बार होगा 'टैक्‍सी-वोट' का इस्‍तेमाल

टैक्‍सी-वोट के इस्‍तेमाल से हर फ्लाइट का बचेगा करीब 213 लीटर ईधन, एयरलाइंस को सालाना 35 मिलियन अमेरिकी डॉलर की होगी बचत. 

दिल्‍ली एयरपोर्ट: विमानों को रन-वे तक पहुंचाने के लिए विश्‍व में पहली बार होगा 'टैक्‍सी-वोट' का इस्‍तेमाल
आईजीआई एयरपोर्ट पर टैक्‍सीवोट का आठ महीने तक ट्रायल किया गया है. इस ट्रायल के दौरान 83,265 लीटर से अधिक ईधन बचाया गया है.

नई दिल्‍ली: दिल्‍ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट पर विमानों को रन-वे तक पहुंचने के लिए अब एयर टर्बाइन फ्यूल का इस्‍तेमाल नहीं करना पड़ेगा. अब विमानों को एयरोब्रिज या पार्किंग-वे से रन-वे तक पहुंचाने के लिए टैक्‍सी-वोट नामक विशेष वाहन एयरपोर्ट पर उपलब्‍ध होगा. जिसकी मदद से किसी भी एयरलाइंस के विमान को टो करके एयरोब्रिज या पार्किंग-वे से रन-वे तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. एयरपोर्ट की निजी संचालक संस्‍था दिल्‍ली इंटरनेशलन एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) का दावा है कि आईजीआई एयरपोर्ट विश्‍व का पहला ऐसा एयरपोर्ट होगा, जहां पर टैक्‍सी-वोट की सुविधा उपलब्‍ध होगी. 

डायल के वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत स्‍पाइस जेट एयरलाइन 28 मई से दिल्‍ली एयरपोर्ट पर टैक्‍सी-वोट के जरिए विमानों को रन-वे तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करेगी. उन्‍होंने बताया कि विभिन्‍न एयरलाइंस को टैक्‍सी-वोट की सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए डायल ने केएसयू एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक अनुबंध किया है. टैक्‍सी-वोट के बारे में जानकारी देने देते हुए उन्‍होंने बताया कि टैक्‍सी-वोट एक सेमी-ऑटोमैटिक वाहन है. जिसे इजराइली एयरोस्‍पेस इंडस्‍ट्रीज (IAI) द्वारा तैयार किया गया है. टैक्‍सी-वोट को एयरपोर्ट पर लाने के दो मकसद है. इसमें पहला मकसद एयरक्राफ्ट का इंजन स्‍टार्ट किए बिना उसे रन-वे तक पहुंचाना है और दूसरा मकसद टो करते समय विमान की सेफ्टी और इफिशिएंसी को बढ़ाना है. 

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विश्‍व में पहली बार इस विशेष वाहन का होगा दिल्‍ली एयरपोर्ट में इस्‍तेमाल
इस बाबत डायल के सीईओ विदेह कुमार जयपुरियार का कहना है कि एयर ट्रैवल एक्‍सपीरियंस को बढ़ाने के लिए डायल हमेशा से नई टेक्‍नोलॉजी को दिल्‍ली एयरपोर्ट पर लेकर आया है. एविएशन स्‍पेस में टैक्‍सी-वोट का इस्‍तेमाल टेक्‍नोलॉजिकल इनोवेशन की तरह है. उन्‍हें खुशी है कि इस तरह की तरनीक को अपना कर आईजीआई एयरपोर्ट विश्‍व का पहला ऐसा एयरपोर्ट बन गया है, जहां पर इस तरह की तकनीक का इस्‍तेमाल किया जाएगा. उन्‍होंने कहा कि टैक्‍सी वोट को अपनाकर आईजीआई एयरपोर्ट पर न केवल एडवांस टैक्‍सीइंग सल्‍यूशन उपलब्‍ध कराया जाएगा, बल्कि यह तकनीक पर्यावरण के लिहाज से भी लाभप्रद साबित होगी. आईजीआई एयरपोर्ट पहले भी पर्यावरण के अनुरूप विभिन्‍न उपायों के लिए कई मंचो पर सम्‍मानित किया जा चुका है. 

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टैक्‍सी-वोट के जरिए हर फ्लाइट में बचाया जाएगा 213 लीटर से अधिक ईधन 
डायल के सीईओ विदेह कुमार जयपुरियार ने बताया कि आईजीआई एयरपोर्ट पर टैक्‍सी-वोट के जरिए हर फ्लाइट का करीब 213 लीटर एयर टर्बाइन फ्यूल बचाया जा सकेगा. यदि हम, इस ईधन के कीमत की अमेरिकी डालर में गणना करें तो एक साल में करीब 35 मिलियन अमेरिकी डालर की बचत एक फ्लाइट से की जा सकेगी. उन्‍होंने बताया कि टैक्‍सी-वोट को लांच करने से पहले आईजीआई एयरपोर्ट में करीब आठ महीने तक इसका ट्रायल किया गया. इस ट्रायल में डायरेक्‍टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल सहित एयरलाइंस प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था. करीब 400 से अधिक सफल ट्रायल करने के बाद टैक्‍सी-वोट को एयरपोर्ट में लांच किया गया है. 

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टैक्‍सी-वोट की मदद से खत्‍म की जा सकेगी जेट ब्‍लास्‍ट जैसी घटनाएं 
डायल के सीईओ विदेह कुमार जयपुरियार ने बताया कि टैक्‍सी-वोट सिस्‍टम क मदद से एयरलाइंस की फ्यूल कास्‍ट को कम किया जा सकेगा. एप्रन का इस्‍तेमाल बढ़ेगा, जिससे ज्‍यादा से ज्‍यादा विमानों को एयरोब्रिज की सुविधा मिलेगी. चूंकि, टैक्‍सीइंग के दौरान विमान का इंजन बंद रहेगा, लिहाजा एयरपोर्ट पर शोर कम होगा. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर टैक्‍सी वोट के जरिए जेट ब्‍लास्‍ट जैसी घटनाओं को रोका जा सकेगा. उन्‍होंने बताया कि बीते आठ महीनों के ट्रायल के दौरान दिल्‍ली एयरपोर्ट पर कार्बन डाई आक्‍साइड की मात्रा को 234028 किलो तक कम किया गया. 83265 लीटर ईधन की बचत हुई. इंजन की लाइफ में 51 घंटे का इजाफा कर ग्राउंड टाइम में 27.3 घंटे की बचत की गई.