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पूर्व चीफ जस्टिस के बाद CJI गोगोई ने PM मोदी से मांग, जज एसएन शुक्ला को हटाने का प्रस्ताव लाए

साल 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार के एडवोकेट जनरल राघवेंद्र सिंह ने जस्टिस शुक्ला के आदेश पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी. तब सीजेआई दीपक मिश्रा ने मद्रास हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी, सिक्किम हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस के अग्निहोत्री और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पी के जायसवाल की इनहाउस कमेटी से इन आरोपों की जांच कराई थी.

पूर्व चीफ जस्टिस के बाद CJI गोगोई ने PM मोदी से मांग, जज एसएन शुक्ला को हटाने का प्रस्ताव लाए
फाइल फोटो

नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज एसएन शुक्ला को बर्खास्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पीएम मोदी को लेटर भेजा है. इससे पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने जनवरी 2018 में और अब मौजूदा चीफ जस्टिस रंजन गोगई ने पीएम से आग्रह कर जस्टिस शुक्ला को पद से हटाने के लिए उनके खिलाफ संसद में मोशन लाने की मांग की है. 

साल 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार के एडवोकेट जनरल राघवेंद्र सिंह ने जस्टिस शुक्ला के आदेश पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी. तब सीजेआई दीपक मिश्रा ने मद्रास हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी, सिक्किम हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस के अग्निहोत्री और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पी के जायसवाल की इनहाउस कमेटी से इन आरोपों की जांच कराई थी.

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि जस्टिस शुक्ला के खिलाफ साफ और पर्याप्त सबूत हैं. उन्हें अविलंब हटाया जाय. 18 महीने यानी डेढ़ साल पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने इस इनहाउस पैनल ने जस्टिस शुक्ला को बदनीयती से अपने अधिकारों के दुरुपयोग का दोषी मानते हुए इनको पद से हटाए जाने की सिफारिश की थी. जस्टिस शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर एक निजी मेडिकल कॉलेज को दाखिले की समयसीमा बढ़ाने की छूट दी थी. 22 जनवरी 2018 को सुप्रीमकोर्ट ने जस्टिस शुक्ला से ज्यूडिशियल वर्क छीन लिया था. 

ताजा हालात में जस्टिस शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस से मांग की है कि उन्हें ज्यूडिशियल वर्क वापस दिया जाए, यह मांग चीफ जस्टिस ने ठुकरा दी है, साथ ही पीएम को रिमाइंडर भेज जस्टिस शुक्ला को हटाने के लिए संसद में मोशन लाने की मांग की है. 

आपको बता दें कि शनिवार को सीजेआई रंजन गोगोई के द्वारा प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखे जाने की खबर सामने आई थी, जिसमें उन्होंने देश की अदालतों में लंबित पड़े मुकदमों को निपटारे के लिए जज की संख्या बढ़ाने और हाई कोर्ट के जजों के रिटायर्ड होने की आयु सीमा को 62 साल से 65 साल किए जाने का पीएम को सुझाव दिया था.