हरियाणा की इस भैंस ने तोड़ डाला पाकिस्तान का वर्ल्ड रिकॉर्ड, पढ़िए आखिर क्या है पूरी कहानी

जिस प्रकार से सेना ने पाकिस्तान के दांत खट्टे किए थे वैसे ही सरस्वती ने एक बार फिर से सेना वाला काम करके दिखाया है.

हरियाणा की इस भैंस ने तोड़ डाला पाकिस्तान का वर्ल्ड रिकॉर्ड, पढ़िए आखिर क्या है पूरी कहानी
पाकिस्तान का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने वाली भैंस सरस्वती के साथ सुखबीर ढांडा.

हिसार: ''जिसके घर में काली, उसकी रोज दिवाली'' पंक्ति हरियाणा का काला सोना माने जाने वाली मुर्राह नस्ल की भैंस के लिए कही गई है, लेकिन इस पंक्ति को वास्तव में चरितार्थ किया है हिसार के लितानी गांव के रहने वाले सुखबीर ढांडा ने. आज के दौर में भले ही पशुपालक पशुपालन से दूर होते जा रहे हो, लेकिन अभी भी कई पशुपालक ऐसे भी हैं जो अपनी मेहनत के दम पर हमारे देश का डंका पूरे विश्व में बजा रहे हैं. एक ऐसे ही मेहनतकश पशुपालक सुखबीर की भैंस सरस्वती ने पाकिस्तान की भैंस का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे भारत का डंका पूरे विश्व में बजाया है.

ज़ी मीडिया से बातचीत में सुखबीर ने बताया कि उन्होंने 2007 से पशुपालन शुरू किया था. 2009 से वह दुग्ध देने की प्रतियोगिता में भाग लेने लगे थे. हाल में सुखबीर अपनी भैंस सरस्वती को लेकर पंजाब के लुधियाना के गांव जगरांव में हुए डेयरी एंड एग्री एक्सपो भाग लेने गए थे. वहां पीडीएफए प्रतियोगिता में पाकिस्तान की भैंस का दूध देने के मामले में वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा है.

सरस्वती की उम्र 7 साल
सुखबीर की भैंस सरस्वती की उम्र 7 साल है. जब से यह बात एरिया में पता चली है, तब से सरस्वती इन दिनों खूब चर्चाओं में है. पीडीएफए यानी प्रोग्रेसिव डेरी फार्मर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में दूध देने की प्रतियोगिता में सरस्वती ने 32 किलो 66 ग्राम दूध देकर चैंपियन बनने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है.


अपने घर बंधी सरस्वती और अन्य पशुओं के साथ पशुपालक सुखबीर.

पहले भी तोड़ा था पाकिस्तान का रिकॉर्ड
सुखबीर ने बताया कि इससे पहले भी उनकी एक 4 दांत वाली भैंस पाकिस्तान का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है. सुखबीर अपने दिन के शुरुआत ही घर में बंधे सरस्वती और अन्य पशुओं की देखभाल से करते हैं. इनके पास अकेली सरस्वती ही नहीं बल्कि गंगा और जमुना के नाम से भी पहले भैंसें रह चुकी हैं. इनकी पाली भैंस ब्यूटी कम्पीटिशन में भी भाग लेकर खिताब अपने नाम कर चुकी है. सुखबीर की कामयाबी वो खुद नहीं बताते, बल्कि उनके घर में पशु बांधने वाले कमरे पर लगे अवॉर्ड और सर्टिफिकेट की फोटो बता देती हैं. देश के अलग अलग हिस्से में सुखबीर पशु पालन की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं और लाखों के इनाम भी जीत चुके हैं.


सुखबीर जीते गए पुरस्कारों के सर्टिफिकेट के साथ.

हर साल लाखों कमा लेते हैं
सुखबीर के पास अब सरस्वती का ही कटड़ा है, जिसका नाम नवाब है. नवाब से वो हर साल लाखों रुपये कीमत के सीमन तैयार करके बेचते हैं. पशुपालक ने बताया कि उनकी सरस्वती से ही क्लोन तैयार करने की भी तैयारी वैज्ञानिक कर रहे हैं. इतना ही नहीं, सरस्वती से ही पैदा हुई कटड़ी की कीमत साढ़े 4 लाख की है. भैंस सरस्वती की कीमत 51 लाख लग चुकी है, लेकिन वो कहते है कि भले ही उन्हें कोई एक करोड़ पर भी दे दे तो भी वो सरस्वती को बेचना नहीं चाहते.
 
पशुपालक हताश ना हों
पशुपालकों को संदेश देते हुए सुखबीर सिंह ने कहा कि वह किसी भी मामले को लेकर हताश ना हों. पशुपालन में भी बढ़िया करियर बनाया जा सकता है. बस अच्छे सीमन के उपयोग करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यह काम मेहनत और धैर्य मांगता है. हालांकि सरकार की उदासीनता को लेकर कई पशु पालक इस काम को छोड़ रहे हैं. इस सवाल पर सुखबीर ने कहा कि ऐसा नहीं है, क्योंकि सरकार की तरफ से कई योजनाएं चलाई गई है उनका किसानों को और पशुपालकों को फायदा उठाना चाहिए.

मां और ग्रामीण भी खुश, बोले- बेटे ने नाम कमाया
सुखबीर की इस उपलब्धि से उसकी मां काफी खुश है. हालांकि सुखबीर ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को ही दिया, लेकिन सुखबीर की माता केलों देवी का कहना है, ''जिस मुकाम पर सुखबीर आज पहुंचा है वह उसी की मेहनत का फल है.''

सुखबीर के गांव के पूर्व सरपंच रमेश चन्द्र ने कहा, ''सुबीर ने उनके गांव का नाम पूरे हरियाणा में तो चमकाया ही है. साथ ही साथ, हाल ही में दूसरी बार पाकिस्तान की भैंस को मात देकर पूरे वर्ल्ड में उनके गांव का नाम रोशन करने का काम किया है.''
 
दूर-दूर से आ रहे लोग
सुखबीर की भैंस सरस्वती द्वारा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए जाने की सूचना जैसे ही आसपास के इलाकों में पहुंच रही है तो इस भैंस को देखने के लिए दूर-दराज से भी लोग लितानी गांव में पहुंच रहे हैं. पानीपत इलाके के गांव समालखा से पहुंचे मनीष कुमार भी सरस्वती और सुखबीर की इस उपलब्धि पर तारीफों के पुल बांध रहे हैं.


सरस्वती को देखने पहुंचे लोग और उनके साथ सुखबीर.

मनीष ने तो यह भी कह दिया कि जिस प्रकार से सेना ने पाकिस्तान के दांत खट्टे किए थे वैसे ही सुखबीर और सरस्वती ने एक बार फिर से सेना वाला काम करके दिखाया है. कुछ ऐसी ही बात जमावड़ी के विनोद और करनाल के राजेन्द्र ने कही.