आग लगने पर कैसे करें फायर सेफ्टी का इस्तेमाल, पुलिस ने दिल्ली की सड़कों पर चलाया अभियान

पुलिस कॉन्स्टेबल ने जगह जगह सिगनल पर रुकी गाड़ियों को लाउडस्पीकर के जरिए, फायर सेफ्टी किट का उपयोग करने का संदेश दिया. 

आग लगने पर कैसे करें फायर सेफ्टी का इस्तेमाल, पुलिस ने दिल्ली की सड़कों पर चलाया अभियान
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के हैड कॉन्सटेबल संदीप शाही ने बताया कि भारत में सभी कमर्शियल वाहनों में फायर सेफ्टी किट होना अनिवार्य है.

नई दिल्ली : एक छोटी सी लापरवाही ने पूरे परिवार को आग की चपेट में ले लिया. हम बात कर रहे हैं दिल्ली में अक्षरधाम के पास हुए हादसे की जिसमें एक चलती गाड़ी ने अचानक से आग पकड़ ली. गाड़ी चला रहे शख्स ने किसी तरह खुद को और अपनी एक छोटी बच्ची को तो गाड़ी से बाहर निकाल लिया लेकिन अपनी पत्नी समेत दो बेटियों को आग की चपेट में आने से नहीं बचा सका. आग लगने की वजह तो अभी साफ नहीं है लेकिन इतना साफ है कि अगर उस वक्त गाड़ी में कोई फायर सेफ्टी किट होती तो इतना बड़ा हादसा होने से रोका जा सकता था. इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एक खास अभियान चलाया है जिसमें लोगों को कमर्शियल गाडि़यों के साथ-साथ निजी गाड़ियों में फायर सेफ्टी किट लगाने के लिए जागरुक किया जा रहा है.  

इसके लिए ट्रैफिक पुलिस कॉन्स्टेबल ने जगह जगह सिगनल पर रुकी गाड़ियों को लाउडस्पीकर के जरिए, फायर सेफ्टी किट का उपयोग करने का संदेश दिया. साथ ही फायर एक्सटिंगविशर दिखाते हुए लोगों को उसका इस्तेमाल करना सिखाया. इतना ही नहीं कॉन्सटेबल्स ने गाड़यों तक जा जा कर लोगों को फायर एक्सटिंगविशर रखने की सलह दी 

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के हैड कॉन्सटेबल संदीप शाही ने बताया कि भारत में सभी कमर्शियल वाहनों में फायर सेफ्टी किट होना अनिवार्य है. इसमें बसें, टेक्सी, ओला, उबर, कैब्स यहां तक की अॉटो रिक्शा भी शामिल हैं. इनमें फायर सेफ्टी किट न होने पर 5000 रुपये तक का चालान हो सकता है. लेकिन निजी वाहनों में इस तरह का कोई नियम नहीं है. इसलिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ये मुहीम चलाई है. जिससे खास तौर पर निजी वाहन रखने वाले लोग अपनी सुरक्षा का ध्यान रख सकें. 

हैरत की बात ये है कि सड़क पर चल रहे किसी भी वाहन में फायर सेफ्टी किट मौजूद नहीं थी. निजी वाहन चालकों की मानें तो उन्हे कभी इसका ख्याल नहीं आया. कमर्शल वाहनों की बात करें तो कई टैक्सी गाडियों में फायर एक्सटिंग्विशर थे तो लेकिन वो या तो सीट के नीचे रखे हुए थे य फिर ऐसी जगहों पर जहां से अासानी से निकाला नहीं जा सकता. एसे में हासदे के वक्त वाहन चालक जब तक इसे निकालेगा. तब तक गाडी पूरी तरह से जल चुकी होगी. कई कमर्शियल गाड़ियों में सफर कर रहे लोगों ने बताया कि उन्होने कभी भी गाड़ी में बैठने से पहले ये चैक नहीं किया कि उसमे फायर सेफ्टी किट है या नहीं.  बाकियों में से कुछ ने बहाना बना दिया और कुछ ने तुरंत लगवाने का वादा किया. 

इस तरह के बड़े हादसों को रोकने के लिए गाडि़यों के एक्सपर्ट कई सुझाव देते हैं. ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स टू टू धवन बताते हैं कि आम तौर पर आग या तो शॉर्ट सर्किट की वजह से होती है या फिर गैस लीक होने की वजह से आजकल जो गाडियां आती हैं उनके अंदर इस्तेमाल होने वाले 60% पार्ट्स सिंथेटिक होते हैं इसलिए ज़रा सा भी स्पार्क कुछ ही सेकंड में आग लगा देता है. पैसे बचाने के लिए लोग सड़क से ही मेंटेनेंस करा लेते हैं जबकि उन मैकेनि कों के पास नकली पार्ट्स होते हैं ऐसे में दुर्घटना हो सकती है.